Tuesday, April 16, 2019

सतपाल सत्ती और आजम की भाषा

आप किसी ब्यक्ति विशेष, महिला विशेष से नाराज हो सकते है, उसकी बातों से असहमत हो सकते हैं, हो सकता है आप उसे नापसंद करते हो पर इसका ये कत्तई मतलब नहीं है कि आप उन्हें गाली दें. राजनीति में भाषा का रसातल में जाना एक हमारे समाज के लिए एक धब्बा है दो दिनों में एक आजम खान ने जया प्रदा के बारे में अत्यंत घटिया शब्द का प्रयोग किया और दूसरा मामला हिमाचल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने राहुल गांधी की माँ का बाकायदा नाम लेकर खुले मंच से गाली दिया। इसे अविलम्ब रोकना चाहिए अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब भाषा भी हिन्दू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद के लड़ाई की तरह और समाज में विद्वेष फैलाने के लिए दिमागी रूप से खाली नेताओं के मुंह से निकलने लगेगी और समाज में अपना एक अहम स्थान बना लेगी। जैसे आज के दौरे में देखा जा रहा है कि जो हत्या, बलात्कार, साम्प्रदायिक सौहार्द तोड़ने में और मुकदमों की लिस्ट में जितना ऊपर है वो उतना ही सम्मानित नेता है ठीक उसी तर्ज पर यह देखकर उनका आंकलन किया जाएगा कि वो कितनी बार किसे माँ-बहन की गाली दिया है, कितनी बार किसका अंडरवेअर देखा है. मेरी समाज के सभी लोगों से चाहे वो किसी भी पार्टी के पक्ष या समर्थन में हो ऐसे लोगों का साथ कत्तई न दें. क्योंकि जब आप एक समाज के रूप में इनका बहिष्कार करने लगेंगे जब इनकी औकात शून्य हो जायेगी तो दूसरे लोग इनसे सबक लेंगे और इस तरह की भाषाओँ का प्रयोग करने से बचेंगे.

कल राजनितिक दलों की तरफ से देश में दो घटनाएं हुई हैं जो अत्यंत निंदनीय है और इनकी जितनी निंदा की जाए उतना कम है. पहली घटना राम पुर से सपा के लोकसभा प्रत्याशी आजम खान की तरफ से हुई जो एक महिला और भाजपा प्रत्याशी जया प्रदा के खिलाफ घोर आपत्ति जनक बयान दिया, आजम ने अपने रैली में भाषण देते हुए कहा कि "उन्हें मैं 19 दिनों में हीं पहचान गया हूँ और तो और उनका अंडरवेयर भी खाकी रंग है." इस तरह का बयान एक महिला के लिए अत्यंत अशोभनीय और अक्षम्य अपराध है. चुनाव आयोग को तो आजम को जेल में डाल  देना चाहिए था न कि 72 घंटे का चुनावी रैली पर पाबंदी. इस बयान पर उनकी पार्टी और खुद आजम की काफी मजम्मत हुई फिर भी नेता अपने थेथरपन से बाज नहीं आ रहे हैं. 

दूसरी घटना देवभूमि हिमांचल में घटी जहां दोनों जगह केंद और हिमाचल में सत्तासीन और हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने अपने पब्लिक रैली में खुलेआम हजारों लोगों को सामने कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी की माँ को गाली दी और ऐसी भाषा का प्रयोग किया कि न तो मैं इसे यहां लिखने की साहस कर पा रहा हूँ और न हीं सोचने का. कभी आपने सोचा है कि जब कोई जिम्मेदार ब्यक्ति इस तरह की भाषा का प्रयोग करता है तो उसका निचे धरातल पर क्या असर पड़ता है. अभी तक राजनीति में सिर्फ माँ बहन की गाली बची थी अब वो भी बीजेपी के शीर्ष नेताओं की से शुरू हो गयी है. जो आगे चलकर इनकी शाखा में एक अहम अध्याय के रूप में शामिल कर लिया जायेगा और फिर उसी तरह की ट्रेनिंग दी जायेगी जैसी ट्रेनिंग ये अपनी शाखा में ईसाई और मुसलामानों को देशद्रोही बताने में करते हैं. जैसे ये कांग्रेस से उसके 70 सालों का हिसाब मांगते हैं वैसे हीं ये इसका भी हिसाब मांगेगे कि 70 सालों में माँ -बहन की गाली क्यों नहीं दी गयी इससे देश का विकास रूका हुआ था और इसके लिए नेहरू जिम्मेदार है. इस पर दलाल मीडिया और लंठ भक्त ताली पीटेंगे. जब आजम ने बीजेपी नेत्री के खिलाफ इस तरह का आपत्तिजनक बयान दिया तब देश के सभी मुख्य इलेक्ट्रानिक मीडिया और बीजेपी के भक्त समर्थक मय नेता के आजम को बहुत भला बुरा कहा और उनका गुस्सा जायज भी था पर जैसे हीं सतपाल सत्ती ने इस तरह की शर्मनाक हरकत की तो इनका गुस्सा कहा चला गया. जया मामले में विदेश मंत्री सुषमा जी ने भी मुलायम पर चुप्पी तोड़ने की नसीहत दे रही थी पर अपने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पर उन्हें भी सांप सूंघ गया है. ऐसी भाषा उनके नीच प्रवृत्ति का होने का परिचय देती है.अब कोई भाजपाई चौकीदार कुछ नहीं बोल रहा है अब आप जनता को हीं सोचना होगा कि क्या आप एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं कि आपके सामने आपके बेटे, बेटियां एक-दुसरे को फूहड़ गाली दे बात करें. आजम खान और सतपाल सिंह सत्ती दोनों ने देवी स्वरूप स्त्री का अपमान किया है दुःख और तब बढ़ जाता है जब लड़कियों को देवी मानने का ढोंग और हमारी सनातन हिन्दू की बात करने वाली पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष एक महिला के बारे में घोर आपत्तिजनक शब्द बोलता है जो वो पुरुष होकर भी कभी अपने बारे में सुनने की हिम्मत नहीं कर सकता। अपने प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर संघ/बीजेपी मौन साधकर उन्हें उनके इस हरकत की स्वीकृति तो नहीं दे रहें हैं.  

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