Wednesday, February 6, 2019

आखिर बीजेपी और संघ पश्चिम बंगाल को लेकर इतने इतने आक्रामक क्यों हैं

बीजेपी और संघ आज जितना आक्रामक पश्चिम बंगाल को लेकर है शायद उतना कभी नहीं रही है. आप सोच रहे होंगे कि दो महीने बाद लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और बीजेपी उत्तर भारत में होने वाले संभावित नुकसान को भांपते हुए अपना सारा जोर पश्चिम बंगाल पर लगा रही है क्योंकि इस बहाने उसे बीजेपी बंगाल में अपने जनाधार को भी बढ़ा सकती है और हो न हो तो सरकार भी बना सकती है. जो आजादी के बाद से हीं वहां सरकार बनाने से मरहूम रही है. तो आप मेरे अनुमान से गलत सोच रहें हैं क्योंकि आजादी के बाद यानी सन १९४७ से पहले बंगाल में पहले हिन्दू महासभा के सदस्य बाद में जनसंघ (बीजेपी) के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी १९४२ में अंग्रेजों की सरकार में वित्त मंत्री (उप-प्रधानमंत्री) थे और फजलुल हक उनके प्रधानमंत्री थे. तो आप खा गए न गच्चा, बीजेपी और संघ अपनी अग्रेजों के समय वाली सत्ता वापस पाना चाहते हैं. यह मेरी तरफ से कोई मनगढ़ंत आरोप नहीं लगाए जा रहें हैं बल्कि साक्ष्यों और प्रमाण के साथ अपनी बात को आप विद्वान् जनता के समक्ष रख रहा हूँ.

जोया चटर्जी नामक एक इतिहासकार ने  (Bengal Divided: Hindu communalism and Partition १९३२-१९४७) इस पुस्तक में इन घटनाक्रमों का उल्लेख किया है. जिस किसी को सत्यापन की जरूरत हो वो इस किताब को पढ़ सकता है.

इसी वक्त में जब देश आंदोलनों के माध्यम से अपना एक बेहतर भविष्य देख रहा था उसी समय बंगाल में शयामा प्रसाद मुखर्जी जी हिन्दू-मुस्लिम के बीच विवाद बढ़ाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे और पूर्वी बंगाल को हिन्दुओं के लिए अलग देश बनाने की मांग रहे थे और १९५२ के चुनाव में जनसंघ ने चुनाव भी लड़ा था पर उसका आधार वोट घटकर ४ % तक आ गया था. 

A 1947 newspaper cutting from the exhibit.

एक तरफ जहाँ पूरा देश महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ "भारत छोड़ो आंदोलन" की मुहीम में जुटा था ठीक उसी समय फजूल हक (पश्चिम बंगाल के प्रधानमंत्री, अंग्रेजी हुकूमत) के नेतृत्व में श्यामा प्रसाद मुखर्जी वित्तमंत्री (दुसरे सबसे वरिष्ठ मंत्री) के रूप में अंग्रेज नीत सरकार की सेवा कर रहे थे. जब भारत छोड़ो आंदोलन अपने चरम पर था उसी समय २६ जनवरी सन १९४२ को हिन्दू महासभा के (अब बीजेपी संस्थापक) श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के ब्रिटिश गवर्नर जॉन हर्बर्ट को सम्बोधित करते हुए एक चिट्ठी लिखी थी जो अंग्रेजी में थी जो इस प्रकार थी -

 laying out a plan to combat the Congress. “Anybody who, during the war, plans to stir up mass feelings, resulting in internal disturbances or insecurity, must be resisted by any government that may function for the time being,” promised Mookerjee. “As one of your Ministers, I am willing to offer you my whole-hearted cooperation and serve my province and country at this hour of crisis”. 

अब आप को ऐसे लोगों को पहचानने की जरूरत है जो आज देश के हर किसी तबके को देशभक्ति का प्रमाणपत्र बाटते फिरते है और अपना इतिहास भूल कर दूसरे को देशद्रोही बोलते हैं. जिस समय हिन्दू महासभा के नेतृत्व में ये बंगाल सरकार में मंत्री रहते हुए ब्रिटिश गवर्नर को चिट्ठी लिखी थी वो अपने नागरिकों के साथ इतिहास की सबसे बड़ी गद्दारी थी. पर इनको शर्म कहाँ आती है. ऐसे लोगों की सेवा में चूर आज संवैधानिक पदों पर बैठे कुछ लोग हैं. मंगलवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव ने एक बयान में कहा कि RSS सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष और समावेशी संगठनों में से एक है, क्योंकि इस संगठन ने लोगों के अपने विश्वास का पालन करने के व्यक्तिगत अधिकार का सम्मान किया है. इस पर महबूबा ने चुटकी लेते हुआ कहा कि फिर तो मैं ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ हूँ.

तो आप समझ गए न कि क्यों भाजपा और संघ बंगाल पर इतना आक्रामक है, अपनी आजादी के वक्त में गद्दारी करने वाली रियासत को फिर से पाना चाहते हैं.

जय हिन्द  

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