Saturday, February 2, 2019

मोदी सरकार का छठा बजट जुमला और हकीकत का आंकलन

कल सरकार ने कहने को तो अंतरिम बजट पारित किया परन्तु ये है पूर्ण बजट. जो संवैधानिक रूप से ठीक नहीं है वैसे भी इन्हें नेहरू जी और कांग्रेस के द्वारा शुरू किये गए कार्यक्रमों से नफरत है. इसी कड़ी में इन्होने बजट को मार्च की तुलना में फरवरी महीने में हीं करना शुरू किया। खैर इस पर किसी को कोई आपत्ति होनी भी नहीं चाहिए। अब हम आते हैं बजट पर तो यह बजट देखने, सुनने में बहुत आकर्षक लग है पर इसमें हकीकत क्या है ये तो दिनों में साफ़ हो जायेगा। मेरा मानना है कि यह बजट पूर्णतया चुनावी बजट है हकीकत से कोसों दूर.

अंतरिम बजट की कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं -
इस आखिरी साल के अंतरिम बजट में कई तरह के बहुत ही लोक लुभावन बातें कही गयी हैं. उनमें से कुछ को रेखांकित करने की कोशिश कर रहा हूँ.

आयकर की सीमा में छूट -
सबसे बड़े एवं महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक भाग आयकर का रहा. जो पहले २.५० लाख की कमाई पर आय देते थे उनके लिए इस बजट में ५ लाख तक आयकर देय से बाहर कर दिया गया है. पहली नजर में ये छूट तो बहुत लोक-लुभावन सी लग रही है पर तकनीकी आधार पर तर्क और कुतर्क की गुंजाईश बाकी है.
नए कर प्रणाली के अनुसार फायदा -
  • ३,५०,००० रुपये तक की आयकर आमदनी वालों को नए बदलाव के अनुसार २६०० रुपये का फायदा होगा.
  • ४,००,००० रुपये तक की आयकर आमदनी वालों को नए प्रारूप के अनुसार ७८००  का फायदा मिलेगा.
  • ५,००,००० रुपये तक की आयकर आमदनी वालों को १३ हजार रुपये का फायदा होगा.
  • १०,००,००० रुपये की आयकर आमदनी वाले जितना कर पहले था देते थे उतना नए बदलाव के बाद अर्थात अब भी १,१२,५०० रुपये का कर देना पड़ेगा.
किसानों के खाते में सीधा पैसा -
इस सरकार ने अपने पाँच साल के कार्यकाल के अंतिम अंतरिम में किसानों के लिए एक नई बात की शुरुआत की है और इसे "प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना " नाम दिया है. इसके अंतर्गत ५ अकड़ जोत वाले किसानों के खाते में सीधे ६ हजार रुपया वार्षिक तौर पर भेजना। सरकार के अनुमान से इस "प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना " से लगभग १२ करोड़ किसान प्रभावित होंगे। परन्तु इस पर राजनीति जोरों पर है. विपक्षी पार्टियां इसे किसान के साथ जुमला का संज्ञा देते हुए सरकार की मंशा  सवाल उठा रहीं है. मेरा भी मानना है कि ५०० रुपया महीना और १७ प्रतिदिन देने से किसान के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है. अगर सच में किसानों के प्रति कोई संवेदनशीलता दिखानी है तो किसान की इन मुख्य माँगों को सरकार को पूरा करना चाहिए।

किसानों की मुख्य मांगें -

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो
हर अनाज का MSP तय हो  
किसानों की पूर्ण कर्ज माफी हो 
खाद्यान भंडारण की समुचित ब्यवस्था हो      
डीजल पर किसानों को सब्सिडी (छूट) मिले                         
बकाया गन्ना राशि जो कि लगभग १० हजार करोड़ है, उसका भुगतान अविलम्ब हो      
सिचाई का उचित प्रबंध हो 
खाद-बीज की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित हो 
अनाज की कालाबाजारी और मंडियों में दलाली बंद हो 

बजट में निराश करने वाली बातें -
तीन बातें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की दृष्टि से अगर देखा जाये तो यह यह बजट अत्यंत निराश करने वाला रहा है.

रोजगार और युवा का भाषण में जिक्र तक नहीं -
इस बजट में रोजगार और युवा के लिए किसी तरह की कोई मदद नहीं है. वो हो भी कैसे सकता है. जब हमारे प्रधानमंत्री महोदय का ड्रीम रोजगार "पकौड़ा रोजगार " है, अगर युवाओं के लिए रोजगार की बात इस बजट में की  जाती तो हमारे प्रधानमंत्री के पकौड़े वाले रोजगार का सपना टूट जाता। जिससे देश पर पकिस्तान हावी भी हो सकता था. इसलिए भारत माता की  रक्षा के लिए कामचलाऊ वित्तमंत्री ने एक देशभक्ति से प्रेरित बजट पेश किया.
   
बजट में शिक्षा हुआ छुआ-छूत का शिकार - 
वर्तमान अंतरिम बजट में  वित्तमंत्री महोदय (पियूष गोयल) जी ने शिक्षा का नाम लेना भी मुनासिब नहीं समझा तो शिक्षा के लिए पैसा का प्रश्न हीं नहीं उठता। इस बजट में सरकार का शिक्षा से उदासीनता बजट के आँकलन के बाद साफ-साफ़ देखा जा सकता है. तरह से सही भी है.

जब पढ़ेंगे नहीं युवा 
तभी पकौड़ा बेचेंगे युवा   

कामकाजी लोगों के लिए बीमा -

बड़े कमाल की एक योजना कल-कारखानों, कंपनियों में काम करने वालों के लिए बजट में सामने आयी. ५५ रूपये का बीमा कर्मचारी करवाएगा और ५५ रुपया उपरोक्त कार्यरत संस्था देगी फिर उस कर्मचारी की उम्र ६० साल पार करने के बाद सरकार ३०००  पेंशन देगी। सरकार की चालाकी देखो हम पैसा कटवाएंगे आज  महंगाई के दर पर और हमें पेंशन जो औसतन ३० साल बाद मिलेगी वो भी आज की महंगाई दर पर मिलेगी.

कर्मचारियों के लिए एक और खबर है जिसका फंड कटता है पहले उसे मरने के बाद २,५०,००० रूपये सरकार देती थी परन्तु अब मरने के बाद ६,००,००० रूपये देगी.

आज की योजना आपकी जिंदगी के लिए नहीं है आज आप भूख से मरो और मरने के बाद आपको काजू और बादाम खिलाया जाएगा। तो आप सोच सकते हैं कि सरकार की सारी योजनाएं और उससे मिलने वाली सुविधाएँ मरने के बाद के लिए हैं अर्थात जीने का मोह त्याग कर मृत्यु को गले लगाए और सरकार के देशभक्ति बजट की सुविधाओं का लाभ उठायें.     

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