Monday, July 6, 2020

सावन में मठ, मन्दिर बंद होने से मठ, मन्दिरों पर निर्भर लोग बेहाल

सभी देशवासियों को सावन मास की हार्दिक शुभकामना। मा. मुख्यमंत्री जी मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि मठ, मन्दिरों को बन्द करते समय आपको उससे जुड़े लोगों की आजीविका के बारे में भी विचार करना चाहिए। लाकडाउन जैसी वैश्विक समस्या के साथ जूझते हुए लोग सावन मास में प्रसाद, फूल-मालाएं, खिलौने इत्यादि बेचकर अपना पेट पालने की जुगत में लगे थे। अचानक उन मजबूर और बेबस लोगों के पास मंदिर प्रशासन की तरफ से सूचना आई कि पूरे सावन मास तक मठ, मन्दिर बंद रहेगा। जिसे सुनकर उन्हें बहुत दुःख से गुजरना पड़ रहा है। मेरा सुझाव ये है कि सोमवार और तेरस को छोड़कर गांव के मन्दिरों को यदि कुछ सावधानियों के साथ खोल भी दिया जाय तो आपकी प्रिय जनता के लिए बहुत राहत मिल जाएगी। मैं जौनपुर जिले का निवासी हूं। मैं गांव में हीं हूं, तो मंदिर से जुड़े लोगों की परेशानियों को नजदीक से देख और समझ पा रहा हूं।

मैं अपने क्षेत्र के मन्दिर त्रिलोचन महादेव की हीं बात कर लेता हूं। जिसमें पण्डा, पुजारी, माली, बनिया समुदाय से जुड़े लोगों की संख्या तीन से चार सौ की है। लेकिन एक महीने तक के लिए मन्दिर बंद होने से सबकी आजीविका को खतरा उत्पन्न हो गया है। सब परेशान हैं कि अब धान की खेती कैसे होगी ? मन्दिर पर निर्भर लोगों से बात करो तो यही हर साल जब मन्दिर चलता था तो हम लोग लोग अपना सारा काम (खेती-बाड़ी से लेकर अन्य कार्य) मन्दिर पर हुई कमाई से कर लेते थे। जो कि इस साल संभव नहीं दिख रहा है। मुख्य रूप से मन्दिर पर ये लोग लड्डू, लाचीदाना, नारियल, अगरबत्ती, फूल-माला, बेलपत्र, खिलौना, छोला, समोसा, चाय-पान का धन्धा करते थे। जिनमें मैं कुछ नामों का उल्लेख करना जरूरी समझता हूं। जो कुछ इस तरह हैं बृजलाल गिरि, प्रशान्त गिरि, दिनेश गिरि, मनोज गिरि, उमेश गिरि, महाबीर गिरि, लौटू गिरि, गुलाब सेठ, धिरेन्द्र गिरि, अमित गिरि, काशी गिरि, रूक्मीना, विकास अग्रहरि, गोपाल अग्रहरि, जयहिंद माली, नखड़ू माली, राजनाथ गिरि, रमेश गिरि, पारस साधु, प्रमोद माली, दरोगा माली, अरविंद प्रजापति, इत्यादि और लोग भी हैं। ये सभी लाकडाउन के शिकार शुरूआती दिनों से हीं हैं। अब इनका ख्याल या तो हमारे आराध्य शिव जी रखें या हमारे मत द्वारा चुनी हुई सरकार रखें। सरकार और पार्टी से उपर उठकर इनके बारे में सोचने की आवश्यकता है।

हर हर महादेव

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