जैसी की पहले से उम्मीद थी कि विकास दूबे भागते हुए एनकाऊंटर में मारा जायेगा। ठीक वैसा हीं हुआ। आज भागते हुए अपराधी मारा गया। वैसे जब कुत्ते को भागना हीं था तो सरेंडर क्यों किया ? सरकार को यह नोट कर लेना चाहिए कि अब कानून, संविधान की कोई आवश्यकता देश में रही नहीं। इसलिए कानूनी प्राविधान को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए!
आज जिस विकास दूबे को उत्तर प्रदेश की पुलिस अदालत तक नहीं पहुंचा सकती। उससे आप उम्मीद करते हैं कि वो आपको जिन्हें लायक सुरक्षित माहौल मुहैय्या करवायेगी तो आप मूर्ख हीं नहीं महामूर्ख हैं। विकास दूबे तो मारा गया लेकिन जो नेता, वर्दीधारी, विधायक उसकी उसकी चाकरी करते थे। उनका खात्मा कब होगा ? विकास को मारकर पुलिस का इकबाल पहले से और कम हो गया है। जनता को खुश करने के लिए भले हीं इस तरह के अन्याय भरे फैसले लिए गए हों पर संविधान और न्याय प्रणाली के अनुसार पूरी तरह से गलत है।
विकास दूबे को उसके किए की सजा निश्चित तौर पर मिलना चाहिए था। लेकिन न्याय के दायरे में। आज पुलिस के इस बात पर किसी को भी यकीन नहीं हो रहा है कि गाड़ी पलटने के बाद वो पिस्टल छोड़कर भागने की कोशिश किया। जिसमें पुलिस की तरफ से जबाबी हुई और विकास मारा गया। विकास के मारे जाने के बाद पुलिस पर कुछ गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिनकी जानकारी सरकार जनता से साझा करें।
पुलिस इनकाउंटर पर उठते कुछ गंभीर सवाल -
जो पुलिस के लोग रिश्र्वत लेते थे उनसे विकास का सामना क्यों नहीं करवाया गया ?
जो अपराधी खुद से आत्मसमर्पण किया हो, वो क्यों भागेगा ?
7 दिन तक वो किस प्रभावशाली ब्यक्ति के सम्पर्क में रहा और पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई, अब उसका सच देश की जनता के सामने कैसे आयेगा ?
जिस गाड़ी में वो उज्जैन से आ रहा था उस गाड़ी को क्यों बदला गया ?
पुलिस वैन के साथ चल रहे मीडिया के लोगों को इनकाउंटर वाली जगह से 20 किलोमीटर पहले क्यों रोका गया ?
5 लाख के ईनामी दुर्दांत अपराधी के हाथ पुलिस वैन में खुले हुए क्यों थे ?
उसे गिरफ्तार करने के बाद पुलिस द्वारा उसे हथकड़ीयां क्यों नहीं लगाई गई थी ?
क्रेन से गाड़ी को गिरे हुए साइड से रगड़ते हुए पुलिस ने क्यों खिंचवाया ?
आखिरकार सरकार किसे बचाना चाह रही है ?
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