Tuesday, September 3, 2019

यातायात जुर्माने में बेतहाशा वृद्धि

1 सितंबर 2019 से देश में एक संशोधित "मोटर व्हीकल एक्ट" लागू किया गया है. इस मोटर व्हीकल एक्ट में गलत दिशा में गाड़ी चलाने, बिना हेलमेट गाड़ी चलाने, नाबालिग द्वारा गाड़ी चलाने, बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाने अथवा अन्य तरह के जुर्माने की राशि को पांच गुना से दस तक बढ़ा दिया गया है. जहां तक मेरी समझ काम कर रही है वहां तक यह निर्णय जनता के लिए ठीक नहीं है. इससे पुलिसिया लूट-खसोट को बढ़ावा मिलेगा. मसलन पहले बिना ड्राइविंग लाइसेंस के गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने पर महज 500 रूपये का चालान अथवा अर्थदंड लगता था जिसे लोग गलती होने पर भर देते थे पर अब नए आदेश के बाद जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 5000 रुपया कर दिया गया है. इसी तरह और तमाम जुर्मानों को बढ़ाया गया है. सरकार का कहना है कि जुर्माने की राशि बढ़ाने से लोग डरेंगे और यातायात नियमों का पालन करेंगे, परन्तु इसकी क्या गारंटी है कि लोग नियम के विरुद्ध काम नहीं करेंगे ? पहले भी तो क़ानून था जब भी लोग उसके खिलाफ जाते थे और जुर्माना भर देते थे. परन्तु नए आदेश के अनुसार वो 500 की जगह 5000 का जुर्माना कदापि न चुकाना चाहेंगे और नगद लेन-देन करके निकल जायेंगे. मुझे लगता है कि इस तरह का नियम बनाने वालों ने गांव या सुदूर के उस आम नागरिक के बारे में नहीं सोचा जिसे सोसायटी से खाद-बीज तो लाना होगा पर वो किसी कारण से अपना कोई कागज घर पर भूल गया होगा तो इस जुर्माने की राशि भरने के चक्कर में उसका खेती का काम अधूरा रह जाएगा. ऐसा लगता है कि यह नियम दक्षिण के मशहूर अभिनेता महेश जी की फील मो देखकर बनाया गया है. फिल्म के अंदर महेश बाबू मुख्यमंत्री होते हैं और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क़ानून में ठीक इसी प्रकार से भारी अर्थदण्ड का प्रावधान करते हैं और सारी सड़क दुर्घटनाएं रूक जाती है. शायद उसी कथानक को फ़िल्मी पर्दे से उठाकर जीवन-दर्शन पर अपनाने की सरकारी योजना है.

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