Monday, August 5, 2019

संघ और बीजेपी की राजनीति कश्मीर और राष्ट्रवाद

मुझे हैरत होती है कि विपक्ष अब तक ये क्यों नहीं समझ पा रहा है कि संघ/बीजेपी की राजनीति का मॉडल क्या रहा है ? अब तक विपक्ष इस पर क्यों नहीं सोच सका कि जिस पार्टी की घोषित निति हीं कश्मीर को लेकर रहीं हो. वो सत्ता में आने के बाद इस पर कोई न कोई बड़ा फैसला तो लेगी हीं. खैर जो भी हो आज हलचल कुछ ज्यादा हीं तेज है. सरकार के इस फैसले की आशंका तो उस समय हीं चल गयी थी जब सरकार ने कश्मीर में ज्यादा अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश दिया। जभी से कुछ बड़े परिवर्तन की आहत होने लगी थी. उसी का असर ये था कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की पूर्व सहयोगी पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ़्ती के बयानों और फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला के कथनों से समझा जा सकता है. कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं में एक अलग तरह की बेचैनी देखी जा रही है जिसका असर विशेष तौर पर घाटी में देखि और समझी जा रही है. शायद ! आज नेहरू जी के 1954 के फैसले को पलट दिया जाएगा, जिसकी संभावना सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है. सरकार भी जानती है कि कश्मीर एक संवेदनशील मुद्दा है. घाटी की पार्टियों की सबसे बड़ी चिंता जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष अधिकार 35 A और धारा 370 को लेकर है और इसी को लेकर पूरे देश के लोगों का ध्यान आज संसद की अपनी धड़कने बढ़ाकर देख रहें हैं.  

कश्मीर पर कोई भी फैसला सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है इस बात का इल्म सरकार को भी है. इसीलिए सरकार सेना,अर्धसैनिक बलों और राज्य के प्रशासनिक अमलों की सहायता से इसे अमलीजामा पहनाने की पूरी तैयारी की जा चुकी है. बीजेपी की सहयोगियों पार्टयों में भी कुछ पार्टियां जैसे शिवसेना, अकाली दाल, आरपीआई और कुछ छोटे दल तो सरकार के साथ हैं तो वहीं जेडीयू जैसी पार्टी जो कि बीजेपी की दूसरी या तीसरी मौजूदा दौर की सबसे बड़ी पार्टी है. जो पहले से हीं सरकार के इस बिल की खिलाफत करती आयी है और हाल के तीन तलाक बिल पर भी सरकार के बिल का विरोध किया था. तो संभावना ये भी बनती है कि जेडीयू निश्चित तौर पर सरकार के कश्मीर बिल का विरोध करेगी. अब क्या होता है थोड़ी देर में या यूं कहें कुछ मिनटों में संसद के माध्यम से देश की जनता को गृहमंत्री श्री अमित शाह जी बताएंगे। जब सारा राज खुल जाएगा और सारी किन्तु-परन्तु का दौर खत्म हो जाएगा.     

  

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