Monday, August 5, 2019

370 के संदर्भ में संघ निति का पूरा दखल

सरकार की धारा 370 हटाने की सिफारिश सरकार ने बहुत जल्दबाजी में किया है इसे सरकार का घमंड माना जाना चाहिए। अगर सरकार को इसे हटाना हीं था तो एक माहौल बनाती और और बात-चीत के जरिये हल किया जाना था. सरकार हर बात को तानाशाही तरिके से करने में यकीन रख रही है. तानाशाही तरिके से काम करने का आरोप बीजेपी हमेशा लगाती थी पर अब बीजेपी उनसे भी ज्यादा वीभत्स तरिके से काम करने लगी है. हर किसी को उम्मीद थी कि बात धारा 35 A की होगी पर ये तो निकला धारा 370 जो की पहले हीं मृतप्राय हो चुका है. अब जम्मू-कश्मीर का कोई वजूद नहीं रहेगा क्योंकि जम्मू- कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शाषित राज्य में बाँट दिया गया है. अब हमें वहां भी दिल्ली वाली धरना पार्टी देखने को मिलेगी। सरकार इतनी जल्दबाजी में जो भी कर रही है उसका परिणाम-दुष्परिणाम की विवेचना आने वाले समय में देखा और पढ़ा जाएगा। जैसे आज हम नेहरू जी के फैसले के बारे में हमें पढ़ने और सुनने को मिला था.

 जो बात आज से छः दशक पहले भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री जवाहर लाल नेहरू जी ने 21 अगस्त, 1962 को अनुच्छेद 370 के संबंध में पं. प्रेमनाथ बजाज के पत्र का उत्तर देते हुए लिखा था -

"वास्तविकता यह है कि संविधान में इस धारा के रहते हुए भी, जो कि जम्मू-कश्मीर को एक विशेष दर्जा देती है, बहुत कुछ किया जा चुका है और जो कुछ थोड़ी बहुत बाधा है, वह भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी. सवाल भावुकता का अधिक है, बजाए कुछ और होने के. कभी-कभी भावना महत्वपूर्ण होती है लेकिन हमें दोनों पक्षों को तौलना चाहिए और मैं सोचता हूं कि वर्तमान में हमें इस संबंध में और कोई परिवर्तन नहीं करना चाहिए."

आज सरकार ने संविधान की हत्या की है जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कुछ विशेष रियायत के साथ जोड़ा गया था. लेकिन सत्ता की असीमित भूख ने सरकार को संवैधानिक मूल्यों की हत्या करने से भी नहीं रोक सकी. हम आज के दौर में उस दौर के फैसले की विवेचना कर रहें हैं और उसकी तुलना करने की कोशिश कर रहें हैं जो उतना हीं हास्यास्पद है जितना की होने पिता से पूछना कि आपके पिता का नाम क्या है ? आज नेहरू, पटेल, अम्बेडकर और जितने संविधान निर्माता थे उन्हें अब स्वर्ग में भी तकलीफ हो रही होगी कि जो उन्होंने उस जमात को वादा किया था उसे आज कुछ छद्म राष्ट्रवादियों द्वारा सत्ता ने नशे में चूर होकर बर्बाद कर दिया गया. जिस संघ पर कभी पटेल ने प्रतिबंध लगाया था, जिस कश्मीर नीति को पटेल ने नेहरू के असहमतियों के साथ दृढ़ निश्चय के साथ लागू किया था. आज उस पटेल के आत्मा की हत्या आज उन्हीं के प्रदेश से आने वाले वर्तमान गृहमंत्री श्री शाह ने किया। संघ के कलंकित इतिहास को बदलने का कार्य इस सरकार द्वारा किया जा रहा है. आज कश्मीर के पूर्व राजा हरि सिंह की आत्मा जहाँ कहीं भी विचरण कर रही होगी वो रो रही होगी कि उन्होंने जो अपनी कश्मीरी अवाम को उस दौर में वादा किया था उसे आज तोड़ दिया गया. इस सरकार के नितियों में संघ का कितना दखल है यह तीन तलाक और धारा 370 बिल पर देखा जा सकता है. इतिहास उन लोगों को भी याद करेगा जो आज अपनी मौलिक जिम्मेदारियों से अलग होकर मात्र सत्ता सुख के लिए सरकार के साथ सहभागी बने हुए हैं. मैं ये नहीं कहता कि 370 को नहीं हटाना चाहिए, जरूर हटाना चाहिए पर उससे पहले वहां के लोगों के साथ एक संवाद होना चाहिए। फिर आप सबको साथ लेकर आप इसे हटाइये लेकिन जबरदस्ती आप अपनी जिद हर किसी पर नहीं थोप सकते.

"यह जो नीति है ये सरकार या लोकनिति नहीं हैं. यह संघ निति है. जिसकी अपनी एक अलग राष्ट्र की कल्पना है. जिसमें बस हिन्दू है और उसके अलावा कोई नहीं है."



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