कल प्रियंका गांधी की रैली में जुटी भीड़ को देखकर कांग्रेसी समर्थक बहुत खुश हुए होंगे। क्योंकि कल जो भीड़ उमड़ी थी वो कांग्रेस की सोच से कहीं ज्यादा थी. हर तरफ बस प्रियंका के हीं चर्चे थे. सारा शहर प्रियंका के फोटो और पोस्टरों से सना पड़ा था. हर तरफ उत्साह और उल्लास का माहौल था. मेरे ख्याल से कांग्रेस के लिए यह ऐतिहासिक लम्हा था, मैं ऐतिहासिक इस लिए कह रहा हूँ कि तीन दशक तक कांग्रेस ने कभी ऐसा दर्शन लखनऊ की सड़कों पर नहीं कराया। जाहिर तौर पर विपक्षी पार्टिया इस रैली को देखकर मन हीं मन अपनी पार्टी के लिए दूसरी रणनिति बनाने के काम में निश्चित रूप से लग गयी होंगी। यह भब्य रोड शो अमौसी एयरपोर्ट से शुरू होकर लखनऊ कांग्रेस मुख्यालय नेहरू भवन तक थी. जिसमें जनता का अपार हुजूम उमड़ा पड़ा था.
प्रियंका जी का ऐसा अद्भुत राजनितिक रूप निखर कर सामने आया कि लखनऊ की सड़कों पर सुबह से ही जनता उनके के लिए लम्बी-लम्बी कतारों में कतारबद्ध हो कर घंटों का इन्तजार किया। इसमें बहुत से नवजवान युवक-युवतियां थी जिन पर प्रियंका की दीवानगी हावी थी और वो अपना स्कूल, घर का कार्य छोड़कर प्रियंका जी इन्तजार करती दिखी। प्रियंका जी की पूरी रैली को मैं टेलीविजन के माध्यम से देखा तो उनका ब्यक्तित्व बहुत हीं आकर्षण समेटे हुए था. वो अपनी रैली के दौरान कार्यकर्ताओं की आँखों में आँखें डालकर सांकेतिक रूप से उनसे जुड़ने की गवाही दे रही थी. कार्यकर्ता भी उन्हें निराश न करते हुए ढोल की थाप पर नाचते-गाते, पुष्पों की वर्षा करते हुए प्रियंका जी स्वागत एवं अभिनंदन कर रहे थे. आस-पास के घरों और दुकानों की छतों पर लोग खड़े होकर प्रियंका जी को निहारने के लिए लालायित थे.
लखनऊ से प्रकाशित होने वाले प्रमुख अखबारों की झलकियां -
क्या अंग्रेजी क्या हिंदी देश के सभी बड़े और प्रमुख अखबारों में पूरे-पूरे पृष्ठ पर बस राहुल और प्रियंका की रैली के ही चर्चे थे. ऐसे वाकई प्रियंका गांधी का कांग्रेस पार्टी में सक्रीय रूप से काम करने के बाद उनकी पार्टी को बहुत ज्यादा फायदा होने वाला है. मैं देश के बड़े राजनितिक समीक्षकों को इस रैली की समीक्षा और आगामी लोकसभा चुनाव में इसके होने वाले असर के कारकों को पूरे दिन चर्चा करते हुए देखा और लगभग सभी एक बात पर सहमत थे कि प्रियंका गांधी का लोकसभा चुनाव पर ब्यापक असर पड़ेगा. प्रियंका गांधी के आधिकारिक तौर पर प्रवेश के बाद भाजपा के नेताओं ने अपनी भाषा की सारी मर्यादा तोड़ते हुए अनेकों बार अभद्र टिप्पणी की. उन नेताओं में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के नेताओं का नाम शुमार है. मेरे ख्याल से शब्द हीं काफी है किसी के संस्कार का वास्तविक चित्रण करने के लिए. प्रियंका गांधी के नाम मात्र से हीं भक्त ऐसे हैरान परेशान हो रहें हैं जैसे सांड़ को लाल कपड़ा दिखा दिया गया हो. भक्त अपने शब्दों के माध्यम से अपने संघी संस्कार का परिचय दे रहें हैं. क्योंकि संघ हीं देश का एकमात्र संगठन है जो औरत को विलासिता की वस्तु मानता है. भक्त ये बखूबी जान लें ये वो खून हैं जो गोरों से भी नहीं डरा था तो सावरकर के चोरों से कैसे डरेगा.
प्रियंका के आने से कांग्रेस की फण्ड की समस्या भी काफी हद तक कम हो जायेगी। इसी संदर्भ में अमेरिका की एक प्रतिष्ठित ‘फॉरेन पॉलिसी' नामक पत्रिका ने अपने लेख में लिखा है कि 'कांग्रेस पार्टी की नई प्रचारक भले ही वास्तव में चुनाव नहीं लड़ें, लेकिन वह ऐसे देश में पार्टी के वित्तपोषण संबंधी अंतर को कम कर सकती हैं जहां चुनाव जीतने के लिए बहुत धन की आवश्यकता होती है'. तो आज प्रियंका गांधी की खबर विश्व जगत में भी बन रही है जो कांग्रेस के लिए कही ज्यादा लाभप्रद है बनस्पति प्रियंका के. प्रियंका गाँधी के आने का एक सबसे बड़ा असर ये हुआ है कि उन्होंने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को घर से निकालकर जमीन पर ला दिया है. आने वाले दिनों में इसका क्या असर होता है वो समीक्षा के लिए खुला हुआ है और समीक्षा होनी भी चाहिए।



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