Friday, February 15, 2019

देश के सीने पर आतंकी हमला, 37 जवान शहीद

कल का दिन हमारे देश के लिए और हम देशवासियों के काला दिन साबित हुआ. कल दोपहर 3.27 के आस-पास जम्मू के पुलवामा से एक बहुत ही दुःखद खबर सुनने और टीवी पर देखने पर मिली. CRPF के 54 वीं बटालियन के जवानों पर जम्मू के स्थानीय आतंकी ने आईईडी के माध्यम से हमला करके हमारे 37 वीर सपूतों को शहीद कर दिया और लगभग इतने हीं जवानों के घायल होने की खबर है. ये खबर सुनते हीं मानो कलेजा कट कर बाहर आ गया हो, हमे ऐसा प्रतीत हो रहा था. धमाके का असर इतना था कि हमारे जवानों के शव के चीथड़े उड़ गए , बसों के परखचे उड़ गए. कल ये दृश्य देखकर आँख से खून टपकने लगा. जिस माँ की गोद सुनी हो गयी, जिस औरत का सुहाग उजड़ गया , जिस बहन का भाई कल हमेशा के लिए उससे दूर हो गया. उनका क्या हाल होगा मुझे तो ये सोचने मात्र से हीं घबराहट हो रही है. कल जैसे-जैसे शाम गहराती गयी वैसे-वैसे शहीद जवानों की संख्या में इजाफा होता गया और ये संख्या इतनी बड़ी हो गयी कि शाम ऑफिस से घर पहुंचते-पहुंचते 37 की नजर आने लगी. भारत में इतना बड़ा आतंकी घटना मेरे होश में कभी नहीं हुआ था.
सरकार एक तरफ कहती है कि हमारे देश में 2014 के बाद कोई आतंकी हमला नहीं हुआ है. ये सरासर गलत है इस सरकार के आने के बाद 17 बड़े हमले शामिल हैं जिनमें उरी और कल हुआ पुलवामा आतंकी हमला भी शामिल है. कल जो हमला हुआ है वो तालिबानी शैली में किया गया है. ऐसे सुसाइड बॉम्बर तालिबान में ऐसी बड़ी और घिनौनी घटना को मानव बम की तरह पुलवामा की शैली में करते रहें हैं. हमारे देश में इस तरह की आतंकियों की घटना का शुरुआत होना हमारे देश के सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता की बात है. पर आज हम सारे देश वासी अपनी सेना और अपने सरकार के साथ खड़े हैं.   
फिल्म बनाने और उसका श्रेय लेते-लेते 37 और जवानों की बलि चढ़ा दी गयी. सरकार इतनी सुप्त अवस्था में क्यों चली गयी कि आतंकियों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि वो सीधा जवानों के काफिले पर हमला कर देते हैं. अगर सरकार सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय लेती है तो कल की असफलता का भी श्रेय लेना चाहिए न की श्रेय लेने से भागना चाहिए। ऐसी हीं वीभत्स घटना मुझे याद है 2012 के आस-पास सुकमा में उग्रवादियों ने किया था जो कुछ इसी तरह का हमला करके इतना हीं नुकसान हमारी सेना को पहुंचाया था. मेरी नजर में उग्रवाद और आतंकवाद दोनों को एक तरह की हीं सजा मिलनी चाहिए और निश्चित तौर पर वो सजा मौत होनी चाहिए.
आज मैं सुबह से हीं देख रहा हूँ कि देश के समस्त नागरिक और राजनितिक पार्टियां हमारे वीर जवानों के साथ है और सब एक सुर में कायरों के खिलाफ कार्र्यवाही करने की बात को बार-बार दोहरा रहें हैं. इस घटना के बाद देश अपार गुस्से में उबल रहा है. मै सोशल मीडिया से लेकर साधारण लोगों की बातों में भी ऐसे कुकृत्य करने वालों के खिलाफ एक तरह का भयानक गुस्सा देखने और सुनने को मिल रहा है. देश का हर नागरिक इस कायरानी हरकत के लिए पड़ोसी मुल्क को जिम्मेदार मान रहें हैं जो वास्तविक सत्य है. देशवासी अपना गुबार अपने शब्दों के माध्यम से संभावित स्थान पर निकाल रहें हैं.
देश के समस्त नेताओं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी , पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह , अमित शाह , ममता बनर्जी , मायावती , अखिलेश यादव , कमलनाथ , शिवराज सिंह चौहान , फारूख अब्दुल्ला , उमर अब्दुल्ला , महबूबा मुफ़्ती ........ जैसे समस्त नेताओं ने एक सुर में इस कायराने हमले की निंदा की.
मैं एक नागरिक की हैसियत से अपने वीरों के प्रति अपनी संवेदना जाहिर करते हुए उन्हें नमन करता हूँ और परम् पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वो शहीद परिवारी जन को दुःख के इस बेला में दुःख सहने की असीमित क्षमता प्रदान करें. इस दुःख की घड़ी में पूरा देश आपके साथ है.

जय जवान  
     
हे माँ भारती के लाल 
तुम्हें कोटि-कोटि प्रणाम  
वीरो मैं आज निःशब्द हूँ 
खुद में विरक्त हूँ 
आप तो खुद हीं देव हो 
मैं किसकी करूँ वंदना 
नापाक कायर गद्दार है वो 
गीदड़ की औलाद है वो 
अब महाकाल प्रलय होगा 
शत्रु रक्त से भोजन होगा 

"गिरि"

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