Tuesday, February 19, 2019

पुलवामा में 3 दिन में 45 वीर जवान शहीद

सर्वप्रथम हमारे वीर शहीदों को कोटि-कोटि नमन 
वीर सपूतों को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि 

बीते तीन दिनों में (पुलवामा हमले के बाद और कल के दिन तक) हमारे 45 बाहदुर जवान शहीद हो चुके हैं जिसमें पुलवामा में 40 की एक पहन जैसी संख्या भी शामिल है. कल शाम पुलवामा की घटना में शामिल आतंकियों को मारने की कोशिश में भी हमारे मेजर समेत 5 जवान शहीद हुए, "जिनमें 2 जम्मू-कश्मीर के पुलिस कांस्टेबल भी थे". ये कितना दुखद है देश के एक नागरिक के लिए कि हमारे ही भाई, हमारे हीं पिता की हत्या आतंकी इतनी आसानी से कैसे करने में सफल हो जा रहें हैं ? देश में ये विभत्स तस्वीर देखकर हर तरफ रूदन का माहौल है. देश के लोग वो चाहे किसी भी अंचल के हो सभी गमगीन हैं और गुस्से से भरे पड़े हैं. हर कोई इस कायराना घटना के लिए विशुद्ध रूप से पाकिस्तान को दोषी मानते हुए जी भरकर गरिया रहे हैं. लेकिन कोई अपनी सरकार से सवाल करना मुनासिब क्यों नहीं समझ रहा है कि ऐसी घटना रोकी क्यों नहीं गयी ? 

मुझ साधारण इंसान के जेहन में भी कुछ मौजू प्रश्न उठ रहें हैं -
  • क्या आतंकियों के पास हमारे जवानों से ज्यादा अच्च्छी टेक्नोलॉजी है  ?
  • क्या उनके पास हमारे से ज्यादा अत्याधुनिक हथियार है ?
  • क्या उनका खुफिया तंत्र हमारे खुफिया तंत्र से ज्यादा मजबूत है ? 
  • क्या उनके पास हमारे जवानों की सूचना कोई गद्दार पहुंचाता है ?
मेरा जबाब हैं नहीं.

मिडिया हो या तथाकथित बुद्धजीवी लोग सरकार से कठिन सवाल पूछने से क्यों कतरा रहें है ? क्या मजबूरी है कि सब लोग सरकार के सुर में सुर मिला कर एक हीं राग में गा रहें हैं. अगर इन सब लोगों और सरकार के मुताबिक़ देश की अंदर की साड़ी ब्यवस्थाएँ चाक-चौबंद थी तो ये कायर पापी कहाँ से हमें इतना  नुकसान पहुंचाने में सफल हुए. क्यों नहीं इनको खुफिया विभाग के लोग पहले पकड़ लिए, इनके पास इतने भारी मात्रा में विस्फोटक कहाँ से आया जाहिर सी बात है कि ये पापी सीमा पार से विफोटक लेकर तो आये नहीं होंगें. तो इनको देश के अंदर कश्मीर में ये सब विस्फोटक और हथियार कौन मुहैया करवाया, इसकी भी भनक किसी को क्यों नहीं लग सकी ? जाहिर तौर पर ये सब एक दिन में नहीं हुआ होगा इसके लिए एक लम्बा वक्त लगा होगा.तो इतने दिन तक हमारी एजेंसियां कहा थी और क्या कर रही थी ? उनसे भी तो स्पष्टीकरण आना चाहिए. हमारे जवानों का खून इतना सस्ता न था इसे सस्ता बनाया है दिल्ली की मदमस्त सत्ता ने.

आज कल पुलवामा की घटना के बाद सारी देशभक्ति भाषणों, सोशल मीडिया, टी वी चैनल और राजनैतिक रैलियों में हीं नजर आ रहा है. जस दिन ये घटना घटी उसी दिन शाम 4 बजे कांग्रेस की नवनियुक्त महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी की पहली औपचारिक पत्रकार वार्ता थी जिसे उन्होंने सैनिकों के गम के साथ जोड़ते हुए रद्द कर दिया था दूसरी और अपने आप देश की एकमात्र राष्ट्रवादी पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी / आरएसएस के लोग अपनी देशभक्ति का सुबूत रैलियों के माध्यम से हीं दे रहें हैं. शर्म की बात ये है कि जिस दिन पुलवामा में इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ उस दिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 5 बजे, योगी आदित्य नाथ 6 बजे रैली करके और भाजपा सांसद मनोज तिवारी रात प्रयाग में नाच-गाकर अपने सर्वश्रेष्ठ देशभक्ति का प्रदर्शन कर रहे थे (वैसे 1947 से पहले इनके राजनितिक पूर्वज भी यही किया करते थे). हद तो तब हो गयी जिस दिन शहीदों की जनसख्या 40 तक पहुंचने की खबर अहले सुबह देशवासियों को मिली और पूरा देश वीर शहीदों की याद में गमगीन था उसी समय दिन के लगभग 10 बजे हमारे देश के प्रधानमंत्री जी उर्फ़ चौकीदार साहेब (परिधान मंत्री) झाँसी में "बंदे मातरम ट्रेन" को झंडी दिखाकर उदघाटन करने के मूड में थे और उसी समय झाँसी की रैली में जनता को सम्बोधित करते हुए कहा था कि पकिस्तान को इसकी कड़ी कीमत चुकानी होगी जो साहेब भरपूर रैलियों के माध्यम से चुका भी रहें हैं. ये सिलसिला अगले दिन भी जारी रहा और चौकीदार महोदय ने नागपुर में रैली को सम्बोधित किया और पाकिस्तान को करारा जबाब देने की बात दोहराई.

उन 40 वीरों की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि कल 18 फरवरी को आतंकी हमारे मेजर समेत 5 को फिर शहीद कर दिया। और अपने आप को राष्ट्र और सेना को सर्वोपरि बताने वाली पार्टी बीजेपी महाराष्ट्र में शिव सेना से गठबंधन का ऐलान कर रही थी. इनको रत्ती भर भी अपने जवानो को लेकर शर्म नहीं आयी. अब आप देशवासी हीं ये तय करे कि सच्चा राष्ट्र भक्त कौन है और झूठा भक्त कौन है. यह वक्त शहीद जवानों के परिवार वालों के साथ खड़े होने का है और ठहर कर सोचने का है कि हम कैसे अपने समाज में इस तरह के विष को फैलने से रोके. इसकी जिम्मेदारी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर भारतीय की है.  

हे वीर जवानों एक बार फिर आपको शत-शत नमन


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