आगामी पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव का ऐलान चुनाव आयोग की तरफ से कर दिया गया है। कांग्रेस समेत सभी पार्टियां जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुट गई हैं। एक तरफ राहुल गांधी अपने नये सिपहसालारों के साथ केरल, पुड्डूचेरी, तमिलनाडु, असम में जी तोड़ मेहनत कर रहें हैं। तो दूसरी तरफ बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष और लोकसभा में कांग्रेस के नेता सदन अधीर रंजन चौधरी बंगाल की सियासी लड़ाई में दो-दो हाथ कर रहे हैं तथा प्रियंका गांधी समूचे उत्तर प्रदेश का ताबड़तोड़ दौरा करते हुए पहली बार यू पी से बाहर असम में प्रचार करने के लिए निकली हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के बूढ़े शेर कांग्रेस के हीं नाव में छेद करने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी के असर को बेअसर करने के लिए कांग्रेस के कुछ बुजुर्ग नेताओं ने ठान लिया है। जिसकी अगुवाई कुछ हफ्तों पहले तक राज्य सभा में नेता विपक्ष रहे श्री गुलाम नबी आजाद जी कर रहे हैं। इस अभियान में दिग्गज वकील और कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल, राज्य सभा में कांग्रेस के उप-नेता आनन्द शर्मा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, मनीष तिवारी, पृथ्वीराज चौव्हाण, विवेक तन्खा, संदीप दीक्षित, मिलिन्द देवड़ा, जितिन प्रसाद, राज बब्बर समेत 23 नामचीन कांग्रेसी नेता कर रहें हैं। इनमें से कुछ लोग अभी बुक महासचिव हैं तो कुछ दिग्गज सांसद और विधायक भी हैं। जिनको G-23 गुट नाम दिया गया है। कांग्रेस में यह दृश्य लगभग 4 दशक बाद देखने को मिल रहा है। जहां एक खेमा बागी होने के कगार पर खड़ा है। बेशक ये गुट उतना ताकतवर नहीं है लेकिन छवि गढ़ने और बिगाड़ने के लिए काफी है।
कुछ अपवादों को छोड़कर ये सभी नेता ऐसे हैं जो बमुश्किल हीं अपने राजनैतिक जीवन में कोई चुनाव जीता हो। आज जब राहुल गांधी गंभीर और जन सरोकार की राजनीति कर रहे थे तब ये नेता कश्मीर में राहुल की धरती से राहुल विरोध की राजनीति कर रहे हैं। ये लोग अपने मंचो से खुद को कांग्रेस का कार्यकर्ता तो बताते हैं परन्तु कृत्य विरोधियों वाला करते हैं। ट्विटर पर देखा कि आनन्द शर्मा खुलेआम कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं। बंगाल गठबंधन के संबंध में उनका ट्वीट बागी के रूप में लिखा हुआ प्रतीत हो रहा है। मुझे तो लगता है कि ये तथाकथित बड़े नेता राहुल गांधी के खिलाफ साजिश कर रहे हैं तथा कांग्रेस को आगामी चुनाव में हारते हुए देखना चाहते हैं। जिससे राहुल गांधी की क्षमता पर मुखर होकर सवाल उठा सकें। यदि इन आगामी चुनावों में कांग्रेस को अपेक्षित सफलता मिल गई तो इन तथाकथित बड़े G-23 के बागी नेता नेपथ्य में चले जायेंगे और कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी का एक छत्र राज स्थापित हो जायेगा।
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