आज दोपहर लगभग तीन बजे मैं नोएडा से जा रहा था। तो सहसा सेक्टर 6 में पहुंचते हीं मेरी नज़र उस शख्स पर पड़ी। जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सच की आवाज हमेशा बुलंद किया। वो शख्स चाहे आज तक का "दस्तक" हो या एबीपी न्यूज का "मास्टरस्ट्रोक"। इन सभी शो में अपनी दमदार एंकरिंग से छा जाने वाले पूण्य प्रसून बाजपेयी जी से हुई। वो बिल्कुल सरल स्वभाव के इंसान हैं। उनसे रूक कर महज दो मिनट बात हुई होगी। क्योंकि वो अति ब्यस्त थे। जब मैंने उनसे उनके टी वी शो का उल्लेख किया तो उनका जवाब था कि आप हमारी यात्रा के बारे में काफी कुछ जानते हो। तो मैं बोला जी हां। इसके बाद वो अपने घर में चले गए। अब मुझे उनसे मिलने का इंतजार है। यह सत्य है कि जब भी मुझे किसी तथ्य की पुष्टि करनी होती है तो मैं सबसे पहले बाजपेयी जी को हीं सर्च करता हूं। बाजपेयी जी की ब्यस्तता के कारण उनके साथ एक तस्वीर भी नहीं ले सका। इसका मुझे मलाल है, लेकिन जब दोबारा मिलूंगा तो मैं मौका हाथ से जाने नहीं दूंगा। यह साल तो विश्व समुदाय के लिए मासूमियत वाला साल रहा है। लेकिन साल के अन्तिम दिन बाजपेयी जी से दो क्षण की मुलाकात हीं सही अन्त बढ़ियां बना गया।
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