जे बी कृपलानी - महात्मा गांधी के शिष्यों में से एक थे बी कृपलानी जी को 1947 में अंग्रेजों से देश में सत्ता के हस्तांतरण के वक्त कांग्रेस के अध्यक्ष थे. जे बी कृपलानी इस तरह से कहा जाय तो आजाद हिन्दुस्तान के पहले कांग्रेस अध्यक्ष थे. उन्होंने मेरठ सत्र की अध्यक्षता की थी.
पट्टाभि सीतारमैय्या - वह 1948 और 1949 में कांग्रेस के अध्यक्ष थे. सीतारमैया भी गांधी वादी नेता थे. परन्तु सीतारमैया भाषाई आधारों पर प्रांत विभाजन के बहुत बड़े समर्थक थे. उन्होंने आजादी के हुए जयपुर सम्मेलन की अध्यक्षता की थी.
पुरुषोत्तम दास टंडन - वह 1950 में कांग्रेस अध्यक्ष बने थे. टंडन जी हिंदी भाषा के बहुत बड़े विचारक और समर्थक थे उन्होंने नासिक सत्र की अध्यक्षता की थी. अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वह उन प्रमुख चेहरों में से एक थे जिन्होंने हिंदी के लिए आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग की थी.
प. जवाहरलाल नेहरू - भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी 1951 से लेकर 1954 तक कांग्रेस के अध्यक्ष थे. नेहरू जी आजादी के पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे.
यू एन ढेबर - साल 1955 से 1959 तक ढेबर कांग्रेस के अध्यक्ष थे. उन्होंने अवडी, अमृतसर, इंदौर, गौहाटी और नागपुर में सत्रों की अध्यक्षता की थी.
इंदिरा गांधी - साल 1959 में इंदिरा गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गई थीं. इंदिरा गांधी जी भी आजादी आंदोलनों के दौरान भी जेल गयी थी.
नीलम संजीव रेड्डी - वह 1960 से 1963 तक कांग्रेस अध्यक्ष थे. उन्होंने बैंगलोर, भावनगर और पटना सत्रों की अध्यक्षता की थी. बाबू में चलकर रेड्डी जी भारत के छठे राष्ट्रपति बने.
के कामराज - वह 1964 से 1967 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे. उन्होंने भुवनेश्वर, दुर्गापुर और जयपुर सत्रों की अध्यक्षता की थी. कांग्रेस पार्टी और भारतीय राजनीति में उन्हें "K" कामराज प्रदान का जनक भी माना जाता है। कामराज जी को भारतीय राजनीति में "किंगमेकर" के तौर भी जाना जाता है.
एस निजलिंगप्पा - वह 1968 से 69 तक कांग्रेस अध्यक्ष थे. निजलिंगप्पा देश की आजादी के आंदोलन और कर्नाटक के एकीकरण के प्रमुख सदस्य थे. निजलिंगप्पा प्रखर गांधी वादी थे.
जगजीवन राम - जगजीवन राम जी को 1970 से 1971 तक कांग्रेस अध्यक्ष थे. वह पिछड़े, अछूतों, दलितों और शोषित तबकों के नेता थे. जगजीवन राम जी बाबू जी के नाम से प्रसिद्ध थे. जगजीवन राम जी कांग्रेस की सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी थे.
डा. शंकर दयाल शर्मा - शर्मा जी बहुत मृदुभाषी नेता थे. वह 1972 से 1974 तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. आगे कालांतर में शंकर दयाल शर्मा जी भारत के नौवें राष्ट्रपति बने.
देवकांता बरुआ - देवकांत बरूआ जी इंदिरा गांधी जी के विश्वासपात्र थे. जिसकी बदौलत आपातकाल के दौरान उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। वह 1975-1977 कांग्रेस अध्यक्ष रहे. उन्होंने एक बार कहा था: "भारत इंदिरा है. इंदिरा भारत है. " हालांकि, बाद में उन्होंने इंदिरा का साथ छोड़ दिया था और कांग्रेस (Urs) में शामिल हो गए थे.
ब्रह्मानंद रेड्डी - वह 1977 से लेकर 1978 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे. यह दौर आपातकाल के अन्तिम समय का था. इसके बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस और इंदिरा जी बुरी तरीके से हार गई थी और जनता पार्टी की पहली गैरकांग्रेसी सरकार बनी थी.
इस दौरान 1978 में कांग्रेस में विभाजन हो गया और बाद में इंदिरा वाले धड़े ने उन्हें फिर से पार्टी अध्यक्ष चुन लिया. इसके बाद एक छोटे से कालखण्ड को छोड़ दिया जाय तो वह 1984 में अपनी हत्या होने तक अध्यक्ष पद पर रहीं थीं.
राजीव गांधी - इंदिरा जी की 1984 में हत्या के बाद राजीव गांधी जी ने कांग्रेस की कमान संभाली और 1991 तक खुद की हत्या होने तक कांग्रेस अध्यक्ष पद पर काबिज थे. इसी दौरान वो अध्यक्ष के साथ-साथ प्रधानमंत्री भी रहे.
पी वी नरसिम्हा राव - राजीव गांधी जी की हत्या के बाद नरसिम्हा राव जी 1996 तक कांग्रेस के अध्यक्ष थे. दक्षिण भारत से वह देश के पहले प्रधानमंत्री थे, उनके कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था का उदारीकरण हुआ था और "बाबरी विध्वंस" भी उन्हीं के प्रधानमंत्री काल में हुआ था.
सीताराम केसरी - वह 1996 से 1998 तक कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे. सीताराम केसरी के अध्यक्ष रहने के दौरान कांग्रेस में बहुत बड़ी टूट हुई. जिसका नुकसान कांग्रेस पार्टी आज भी उठा रही है.
सोनिया गांधी - कांग्रेस में शरद पवार की बगावत के बाद सोनिया जी 1999 में कांग्रेस अध्यक्ष बनी थीं. उसके बाद लगातार 2017 तक अध्यक्ष पद पर काबिज रही थी.
राहुल गांधी - सोनिया गांधी जी के इस्तिफा देने के बाद 2017 में राहुल गांधी जी ने अध्यक्ष पद को संभाला था और फिर 2019 में लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद एक बार फिर सोनिया जी को पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था.
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