Sunday, August 23, 2020

कल कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक, अध्यक्ष पद पर गहलोत गांधी परिवार के बाद दूसरे संभावित उम्मीदवार

कल दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय पर कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों की बैठक होने वाली है। ये बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी कि सोनिया गांधी जी को कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष बनने के एक साल बाद की जा रही है। यह बैठक कांग्रेस के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है। सुनने में यह आ रहा है कि कांग्रेस के कुछ नये-पुराने कुल २३ नेता सोनिया गांधी जी को संगठन प्रमुख पद के चुनाव के लिए चिट्ठी लिखी है। जिनमें कुछ लोग राहुल गांधी जी को अगला कांग्रेस अध्यक्ष बनने की सिफारिश कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस ने और पुराने दो गुटों में बंटती जा रही है। एक ओर जहां पंजाब के मुख्यमंत्री श्री अमरिंदर सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी सोनिया गांधी का समर्थन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेष बघेल जी एवम् असम राज्य प्रमुख रिपुन बोला राहुल गांधी का अध्यक्ष पद के लिए समर्थन कर रहे हैं।

इन सबके बीच राहुल गांधी जी ने बार-बार दोहराया है कि वो अगला कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहते हैं तो उनके बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी दूसरे सर्वमान्य नेता मालूम पड़ते हैं। क्योंकि गहलोत को सोनिया और राहुल दोनों का वरदहस्त प्राप्त है। राहुल, गहलोत को गुजरात चुनाव के बाद और मानने लगे हैं। जिस तरह से गुजरात की एकतरफा लड़ाई को अपने कौशल के दम पर रोमांचक बना दिया था। उसे देखकर राहुल गांधी को गहलोत के उपर और यकीन हो गया। वैसे गहलोत राहुल के पिता स्व. राजीव गांधी जी के जमाने के नेता हैं। 

गहलोत राजस्थान के लिए तीन बार से ज्यादा मुख्यमंत्री की संभाली और प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। इन सबके बीच गहलोत की छवि राजस्थान में एक जनप्रिय नेता के तौर पर रही है। गहलोत राजस्थान की आमों-खास के नेता कहे जाते हैं। हाल हीं में सचिन पायलट और उनके संबंधों को लेकर थोड़ा विरोध किया जा सकता है। फिर भी गहलोत मजबूत स्थिति में नजर आते हैं। गहलोत कांग्रेस के कुछ आसानी से मिलने-जुलने वाले नेताओं में से एक है। कांग्रेस पार्टी में गहलोत दूसरे ऐसे नेता हैं जिनका विरोध पार्टी के भीतर कम होगा। गहलोत के पास संगठन और सरकार चलाने का अनुभव ब्यापक अनुभव है। जो उन्हें कांग्रेस के संभावित मुखिया के तौर पर स्थापित करने में सहयोग कर सकती है बनिस्पत राहुल गांधी अपने पुराने फैसले पर अडिग रहते हैं।

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