पुराने भयावह साल के बीतने की ख़ुशी अभी मनाना सही नहीं है ओमीक्रान के रूप में देश के सामने एक नई चुनौती हमारे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए उनके सामने आ खड़ी हुई है. क्योंकि पुराने साल की विदाई कोरोना की ज्यादती के साथ हुआ तो नए साल का दस्तक कोरोना के तीसरे रूप ओमीक्रान के रूप में हुआ. आज उत्तर भारत के अधिकाँश प्रदेशों में ओमीक्रान दस्तकंदे चुका है. अभी तो शुरुआत में ओमीक्रान से ग्रसित लोगों की संख्या कम जरूर है लेकिन आने वाले दिनों में ये बढ़ने वाला है. ऐसा कुछ अनुमान वरिष्ठ चिकित्स्क लगा रहें हैं.
ओमीक्रान के साथ-साथ चीन भी हमारे देश के लिए एक नई चुनौती बन कर आया हुआ है. 1962 के बाद चीन एक बार फिर आक्रामक रूप अख्तियार किया हुआ है. पिछले साल के पहले महीने में हीं चीन ने गलवान घाटी में घुसने का दुस्साहस किया था और हमारे वीर सैनिकों के ऊपर कायराना हमला किया था. जिसमें कुछ मान भारती के सुपूत शहीद भी हो गए थे. इस नए साल में देश और भी कई चुनौतियों से जूझेगा, जिसमें महंगाई, बेरोजगारी और किसानी प्रमुख होंगे.
सरकार को अब संवेदनशील होकर जनता की आवाज को सुनने की कोशिश करना होगा। बीते हुए साल में साल में हमने देखा कि कैसे सरकार के हठ के कारण हमारे किसानों को एक साल से ज्यादा वक्त तक अपना घर-खेत छोड़कर दिल्ली की सड़कों पर बैठा पड़ा था. जिसका परिणाम ये हुआ कि राजनैतिक नुकसान को देखते हुए दिल्ली की केंद्र सरकार को आखिरकार अपना कृषि बिल वापस लेना पड़ा था. इस नए साल में इस तरह के किसी भी हठ से बचने का प्रयास सरकार को करना चाहिए.
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