आज मैं बात करना चाहता हूँ कि कांग्रेस यू पी की जरूरत क्यों महशूस होने लगी है ? पिछले तीन दशक से कांग्रेस यू पी की सत्ता नदारद है. उत्तर प्रदेश की लगभग तीस फीसदी आबादी कांग्रेस के शासन को देख हीं नहीं पाई. आखिरी बार कांग्रेस की सत्ता 1989-1990 तक उत्तर प्रदेश में एन डी तिवारी के नेतृत्व में बनी थी. जब से एक अरसा गुजर गया और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस धीरे-2 अप्रासंगिक होती चली गयी. कुछ मौके आये जिसे कांग्रेस अपनी तरफ मोड़ने में असफल रही.
देश की अधिकाँश आबादी ने पिछले तीन दशकों में सपा, बसपा, बसपा-भाजपा गठबंधन और वर्तमान में भाजपा के प्रचंड बहुमत की सरकार के काम को देख लिया है. लेकिन राज्य का नौजवान जो तीस साल की उम्र का है. उसने कांग्रेस की सत्ता के अलावा सबको देख लिया है. तो ऐसे नौजवानों से मेरा आग्रह यही है कि आपने छोटे से जीवन काल में जीन सरकारों का काम देखा वो सबने निराश किय. किसी सरकार ने जात-पात की तो किसी ने धर्म की राजनीति की. इन सब ने विकास के अलावा सबकुछ किया लेकिन आम इंसान की तकलीफों को दूर करने का कोई ठोस प्रयास नहीं किया।सरकारी नौकरियों में सिंडिकेट किस तरह काम करता है और कितनी बार उजागर हुआ ? ये हममे में से लगभग हर किसी ने देखा। मुलायम सरकार की एक पुलिस भर्ती को 2007 में तो मायावती जी अनियमितता को आधार मानकर रद्द हीं कर दिया था. वो तो भला हो इलाहबाद हाईकोर्ट को जिन्होंने हजारों परिवारों को रोटी देते हुए उस पुलिस भर्ती को बहाल कर दिया।
कांग्रेस को नौजवानों, किसानों, दलितों, वंचितों की लड़ाई लड़नी चाहिए। आज देश में कृषि और कृषक दोनों की हालत दयनीय है. भाजपा की सरकार को छोड़कर पूरी दुनिया देख रही हमारे किसानों को कितना प्रताड़ित किया जा रहा है ? जो धूप-छांव की परवाह किये बिना आज 110 दिनों से तीन काले कृषि क़ानूनों के खिलाफ सड़कों पर बैठा है. ऐसे सभी पीड़ित लोग एक नया विकल्प खोज रहें है और वो विकल्प कांग्रेस को बनना होगा। कांग्रेस हीं उत्तर प्रदेश में एक मात्र ऐसा विकल्प बचा है, इसका विस्वास कांग्रेस को जनता को दिलाना है. तीन दशक की सरकारों के काम-काज को भी आज की कसौटी पर कसने की जरूरत है. जाहिर तौर पर अब की सोच 90 के सोच से कहीं ज्यादा विकसित और परिपक्व हो गई है. उस समय किये हुए कार्यों को कांग्रेस आज प्रचारित नहीं कर सकती।
यदि आज के युवाओं के साथ कांग्रेस को जुड़ना है, तो उनके हित में एक रोडमैप उनके सम्मुख रखने की आवश्यकता है. जाहिर तौर पर जब से प्रियंका गांधी सार्वजनिक जीवन में खुलकर आयी हैं. वो उस खालीपन को भरने की कोशिश कर रहीं हैं और उसमें कुछ हद तक सफलता भी प्राप्त हुई है. चाहे सोनभद्र का काण्ड हो, उन्नाव बलात्कार काण्ड, हाथरस बलात्कार कांड हो. इन सभी जगह पर प्रियंका गांधी ने कांग्रेस की उपस्थिति प्रभावी ढंग से दर्ज कराई। अर्से बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस को एक जमीनी नेता अध्यक्ष के रूप में मिला है. जिनका नाम अजय कुमार लल्लू है. जो स्वयं भी विधायक है और संगठन को मजबूत करते हुए जमीन पर गाँव-2 घूमकर जनता के सरोकारों की लड़ाई लड़ रहें हैं. इसमें कितनी सफलता कांग्रेस को मिलती है. ये 2022 का विधान सभा परिणाम बताएगा।
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