कल बिहार विधान सभा में जब पुलिस ने घुसकर विधायकों को मारा-पीटा. उसे बिहार हीं नहीं बल्कि पूरे देश के लिए "दमन दिवस" के रूप में याद किया जाना चाहिए. हमें समाचार पत्रों और इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से जो पढ़ने और मिला। वह वाकई हैरान करने वाला रहा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सत्ता मौजूदगी में विपक्ष के राजद और कांग्रेस के चुनें हुए विधायकों के ऊपर हुए बर्बरता को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता. अब मुख्यमंत्री महोदय इस सन्दर्भ में चाहे जितनी भी दलीलें दें, वो जायज नहीं होगा. निश्चित तौर पर विधान सभा के अंदर की इस घटना ने नीतीश जी के सौम्य एवं धैर्यशील छवि को बहुत बड़ा आघात पहुंचाया है.
निश्चित तौर पर आपकी विपक्षी विधायकों और उनकी पार्टियों की नीतियों को मतभेद हो सकता है. लेकिन इस तरह का घृणित कृत्य निंदनीय है. क्योंकि हो सकता है कि कल आप भी सत्ता से हटकर विपक्ष में आएंगे. उस समय भी यदि यही कृत्य दोहराया जाएगा तो आपकी मनोस्थिति क्या होगी ? इस बात का भी आंकलन आपको कर लेना चाहिए था. मार्शलों के अलावा विधान सभा में अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना माननीय विधान सभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार था. इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता. लेकिन सरकार का चेहरा मुख्यमंत्री होते कि विस अध्यक्ष. आज से आप जहां भी जनता के बीच जाएंगे तो जनता आपसे जबाब मांगेगी न कि अध्यक्ष जी से.
विपक्ष के विधायक बस पुलिस विशेषाधिकार क़ानून जो आपने विपक्ष की अनुपस्थिति में विधान सभा में पास करवाया. उसी का तो विरोध कर रहे थे. उनकी बात सुनकर भी आप उस बिल को पास करवा सकते थे. महिला विधायकों को भी महिला पुलिस ने बर्बरता पूर्वक पीटा और घसीटा. शायद नितीश जी जब आप भी अपने घर पर ये दृश्य देखे होंगे.तो आपको भी उतना हीं वीभत्स लगा होगा. जितना की मुझे और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले मुझ जैसे करोड़ों लोगों को लगा है. आप उन विधायकों से सदन की तरफ से माफी मांग सकते हैं.
No comments:
Post a Comment