सादर आभार,
राष्ट्र वादी महंगाई के दौर में आपका स्वागत है। महंगाई के बढ़ने की गति बांस (करैल) से भी तेज है। क्या डीजल, क्या पेट्रोल, क्या गैस सिलेंडर ? सबमें महंगाई का जबरदस्त तड़का लगा हुआ है। कमरतोड़ मंहगाई से रसोईं और सड़क दोनों का बजट बुरी तरह बिगड़ चुका है। लेकिन इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। जैसे लोगों को महंगाई की आदत सी हो गई है। लाकडाउन और कोरोना की वजह से करोड़ों लोग पहले से हीं बेरोजगार हो चुके थे और ऊपर से ये राष्ट्र वादी महंगाई तो जान निकालने का काम कर रही है।
अगर मैं कुछ पिछले सात-आठ साल पहले की बात करूं। तब दिल्ली की सत्ता पर एक दूसरी पार्टी काबिज थी। उस दौर में जब पेट्रोल-डीजल के दामों में एक रूपए की वृद्धि होती थी तो विपक्ष के लिए महंगाई डायन हो जाती थी। जबकि उनके शासनकाल में सिलेंडर की सर्वाधिक कीमत 413 रूपए, पेट्रोल 76 रुपए था और वो भी तब जब कच्चे तेल की कीमत 124 डालर प्रति बैरल होती थी। तब की महंगाई डायन आज डार्लिंग बन गई है। विपक्ष में रहते हुए जिस पार्टी ने महंगाई पर तमाम ब्यंग बाण चलाते थे। तब के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी को चूड़ियां भेजते थे। अब वो मानो कोमा में चले गए हैं या उनका अब जनता से सरोकार नहीं रहा।
जभी तो मैं इसे राष्ट्र वादी महंगाई का नाम दे रहा हूं। आज अगर नये उभरे कट्टर राष्ट्रवादियों से महंगाई पर बात करो तो वो वहीं व्हाट्सएप विश्वविद्यालय का ज्ञान बांटने लगते हैं कि जब लाकडाउन में पांच रूपए वाला गुटखा चालीस रूपए में ले सकते थे तो देशहित में पेट्रोल सौ रुपए का क्यों नहीं ले सकते। आज का दिल्ली में पेट्रोल का रेट 90.18 पैसा है और सिलेंडर की कीमत 717 राष्ट्र वादी रूपया हो चुका है। वर्तमान राष्ट्र वादी सरकार पेट्रोल पर 33 और डीजल पर 32 रूपए टैक्स के रूप में लेती है। इसके उलट कांग्रेस की सरकार पेट्रोल पर 10 तथा डीजल पर 5 रूपए टैक्स के रूप में वसूलती थी। महंगाई के ऊपर 2014 के तमाम विडियो मोदी जी और उनकी पार्टी के नेताओं के वायरल हो रहे हैं और लोग अब सवाल पूछ रहे हैं। अब तो कट्टर समर्थक भी स्टेटस पर साहेब के पुराने पोस्ट चिपकाने लगे हैं।
No comments:
Post a Comment