Thursday, February 4, 2021

किसानों को और कितना यातना देगी केन्द्र की घमंडी सरकार

आज 70 दिन हो गए किसान भाइयों को दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हुए हैं। लेकिन उनकी समस्या का हल अब तक नहीं निकल पाया। प्रधानमंत्री आवास बीस किलोमीटर की दूरी पर संसद भवन और सुप्रीम कोर्ट भी लगभग समान दूरी पर स्थित है। लेकिन किसी को अन्नदाताओं की बेबसी नहीं दिखी। अब तो कोरोना के बाद का बजट भी आ गया। बजट के आंकड़ों पर भी नजर डाला जाय तो पिछले साल की तुलना में बहुत मामूली बढ़त की गयी है। लेकिन वो बढ़त इतनी नहीं है कि आन्दोलनकारी किसानों में सरकार के प्रति विश्वास बहाली का सिलसिला शुरू हो सके। मेरा तो लगभग रोज नोएडा सेक्टर 62 तक आना-जाना लगा रहता है। की बार तो नेहरू प्लेस से वापस घर लौटते हुए आन्दोलन स्थल पर रूकना भी हो जाता है। जहां पर किसानों के जज्बे और बुलंद हौसले को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो राधे प्रिय खुद कुरूक्षेत्र में जमें हों। और वही योगी बाबा आज सबसे बड़े सूबे के मुख्यमंत्री हैं। जो लोग टिकैत के रोने का मजाक उड़ा रहे हैं। उन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है। 

मिडिया और अन्य तबके के लोग कह रहें हैं कि राकेश टिकैत के आंख से निकले आंसू ने दोबारा से किसान आन्दोलन में जान डाल दिया। वैसे आंसूओं के गिरने की ताकत भारत और विश्व जगत ने कई बार देखा है। आंसू की बात करें तो अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन, बराक ओबामा, रूस के मौजूदा राष्ट्रपति पुतिन,  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और मौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तक की आंखों से कभी न कभी किन्हीं कारणों से आंसू टपके हैं। कर्नाटक के किसान परिवार से आने वाले पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा को भी हमने रोते देखा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को भी लोकसभा में पूरे देश ने फूट-फूटकर रोते देखा है।

राकेश टिकैत के रोने का हीं असर हुआ कि गाजीपुर बार्डर पर सात स्तरीय अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था तालीम कर दी गई हैं। सड़कों पर लोहे की कीलें गाड़ दी गयी हैं, कंक्रीट की दिवारें चुनवा दी गई हैं और सिंघु बार्डर पर तो सड़क कै बीचोबीच गड्ढे सरकार द्वारा खुदवा दिए गए हैं। टिकैत के आंसुओं का हीं असर है कि सिंघु बार्डर के आस-पास के इलाकों में कई दिनों तक इन्टरनेट सेवा बाधित रही और यही समस्या गाजीपुर धरना स्थल पर है। मैं एक बात बेझिझक महसूस करता हूं कि टिकैत के निकले कीमती आंसुओं ने आन्दोलन को जीवन दे दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में जगह-जगह किसानों के समर्थन में महापंचायतों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बहुत भारी भीड़ इकट्ठी हो रही है और उनमें धरना स्थल से उठकर राकेश टिकैत भी उपस्थित हो रहें हैं।

No comments:

Post a Comment