Tuesday, February 25, 2020

दंगों में झुलसती दिल्ली को प्यार की दरकार

दिल्ली के आप सभी प्रबुद्ध नागरिगों से विनम्र निवेदन है कि आप लोग अफवाहों पर ध्यान न दें. सरकार के प्रतिनिधि और प्रशासन के लोगों पर आप आँख बंद करके यकीन करें. प्रशासन के लोग निश्चित तौर पर आप पीड़ितों की मदद करेंगे और जरूरत के मुताबिक़ आपको सुरक्षा भी प्रदान करेंगे. इस आफत की घड़ी में आप सभी लोग मिलकर दिल्ली में शांति स्थापित करने का प्रयास करें. कुछ लोग सोशल मीडिया पर धर्म इत्यादि के नाम से नफरत फैला रहें हैं. उनकी बातों पर थोड़ा सा यकीन न करें. हम सबका धर्म बहुत बृहद है. उसे कोई क्षीण नहीं कर सकता है. आप लोग संयम से काम करें और प्रशासन की मदद करें। इस तरह आतंक का खुला नंगा नाच हमें किताबों में पढ़ने को मिलता है. जिसे 1984 के दंगे के नाम से जाना जाता है. हमें बुरे इतिहास से सिखने की जरूरत है और सबके अंदर इंसानियत की भावना जगाने की जरूरत है.
आप चिंता न करें. जिन्होंने धर्म की आड़ में कल इतिहास लिखने की कोशिश की थी उसमें से एक को अंग्रेज का समर्थक और दूसरे को पाकिस्तान का जन्मदाता जिन्ना बोला जाता है. ऐसा इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है. और इस देश में उन्होंने खड़ा होने में कई दशक लगे हैं. ये देश किसी की जागीर नहीं है. देश का संविधान है. जो सबको अपनी बात रखने का हक देता है. जैसे आज के सत्ताधारी 1975 में प्रचंड आंदोलन किये थे. जो लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी था. जब वो देशद्रोही नहीं बोले गए थे. आतंकियों को जब कंधार में ले जाकर छोड़ा गया था. जब वो देशद्रोही नहीं थे. धर्म हमारा अपना ब्यक्तिगत विषय है और देश सबका सार्वजनिक विषय है, अभिमान का विषय है. इस समय हमें दिल्ली वालों के लिए ईश्वर, अल्ला से प्रार्थना करना चाहिए कि ये माहुअल जल्द से जल्द सुधरे और तमाम शहरी पूर्व की भाँति फिर से एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकें. हमें दिल्ली वासियों के लिए अपनी शुभेच्छा जाहिर करने की जरूरत है.


No comments:

Post a Comment