आज एक साल गुजर जाने के बाद भी कुछ सवालों का जबाब आ तक नहीं मिल पाया है. मसलन इतनी बड़ी मात्रा में बिस्फोटक कहाँ से आया ? उसे लाने वाला कौन था ? किस रास्ते से आया ? जो भी दोषी था वो पकड़ा गया या अभी नहीं ? इन सब सवालों का जबाब अभी जनता के सामने के सामने नहीं आया है. हाँ, हमने पाकिस्तान पर दो-2 कड़ी कार्रवाई की परन्तु इन सवालों का अभी भी गौड़ है. सरकार कहती है कि पुलवामा हमले में शामिल कायरों में से 5 को हमारी शेर सेना ने मार गिराया। इस पर हमें पूर्ण विश्वास है. पर सरकार यह बताने में अक्षम क्यों है कि इसमें कौन-कौन से गद्दार शामिल थे. उनकी पहचान जनता के सामने आनी जरूरी है. कम से कम हमें भी तो उस आस्तीन के सांप का पता लगे कि वो कायर कौन है ?
जब हमारे शहीद तिरंगे में लिपटकर अपने-2 घर पहुंचे थे तो उस वक्त अपनी आदतों के अनुरूप हमारे महान राजनेताओं ने शहीदों के सम्मान में बड़े-2 वादे करने से नहीं चुके परन्तु आज एक साल बीत जाने के बाद शहीद परिवारों को बस आश्वासन हीं मिलता जा रहा है. कुछ परिवारों को उचित सम्मान तो मिला पर कुछ को उनके हाल पर छोड़ दिया गया. यह हाल किसी एक पार्टी या सरकार की नहीं हैं. लगभग सभी राज्य सरकारें एक हीं ढर्रे पर हैं. आज जो बाप अपने बेटे की फोटो हाथ में लिए निहारता रहता है. तो उसकी ममता का तो कोई मोल हो हीं नहीं सकता. परन्तु जो सरकारों के हाथ में हैं उसके माध्यम से उस शहीद के पिता को थोड़ी सांत्वना तो दिलवा हीं सकता है. पुलवामा शहीद जवानों की याद लोगों को लोक सभा चुनाव बाद आज उनके बरसी पर आ रही थी. आज से पहले तो हम गाली-गलौज में, चुनाव-प्रचार में ब्यस्त थे. हमारे जवानों के प्रति हमारा ये नजरिया कत्तई उचित नहीं कही जा सकती. उन्हें हम हर वक्त अपनी साँसों में बसा कर रखे. जब उन्हें उनकी कुर्बानी का वाजिब मिलेगा. हमारे वीर जवान सीमा पर हैं जभी हम सुरक्षित हैं. अन्यथा हमारा कोई अस्तित्व नहीं.
अंग्रेजी के एक पतिष्ठित अखबार hindustantimes की एक कटिंग मैं इस लेख के साथ संलंग्न कर रहा हूँ -

अंग्रेजी के एक पतिष्ठित अखबार hindustantimes की एक कटिंग मैं इस लेख के साथ संलंग्न कर रहा हूँ -
हिन्द के शेर आपके चरणों को नमन.
sahi baat
ReplyDelete