गाँधी जी के बारे जितनी भी बातें कही, लिखी या बोली जाए वो कम होगी. क्योंकि गाँधी जी का ब्यक्तित्व हीं ऐसा था कि उनके आस-पास के सभी विचार उनके समावेशी हो जाते थे. गाँधी जी के ऊपर लिखी अथवा छपी किसी भी किताब को अगर पढ़ा जाय तो आप आसानी से उनके विचारों का जुड़ाव समाज के प्रति समझ सकते हैं. गाँधी जी ने कोई भी काम बिना लक्ष्य के नहीं करते थे. जिस काम को करने की ठान लेते थे. उसे उसके अंजाम तक ले जाते थे. हम गाँधी जी के 'सत्याग्रह' को हीं समझने की कोशिश करें तो ऐसा प्रतीत नहीं होता कि सत्याग्रह की नींव गाँधी जी हमारे अपने देश में डाली थी, अपितु 'सत्याग्रह' एक सुसंगठित आंदोलन की तरह योजनाबद्ध तरिके से चलाया गया था. गांधी जी ने 18 जुलाई सन 1914 तक अफ्रिका में तमाम आंदोलनों की अगुवाई कर रहे थे. जिनमे वहां भारत से जाकर बसे ब्यापारी बंधु, गिरमिटिया मजदूर, खानों में मजदूरी करने वाले तथा नस्लवाद की खिलाफत करने करने वाले आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी.
गाँधी जी के विचारों का क्षेत्र बहुत विस्तृत है. बापू के विचारों को समझने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने आस-पास की बातों को समझें. गांधी जी ने किसी बातों को समझाने के लिए तर्क के रूप अपना उदाहरण देते थे और उसमें अनेक कड़ियाँ अपने आप जुड़ती जाती थी. जभी तो कृपलानी जी ने लिखा है कि ‘‘गांधीजी ने तर्क और गणित के आधार पर तैयार किया गया ऐसा कोई सिद्धान्त प्रस्तुत नहीं किया... गांधीजी इतनी द्रुतगति से विचार करते थे कि तर्क को श्रृंखलाबद्ध करनेवाली बीच की नेक कड़ियों को जोड़ने का उन्हें ध्यान ही नहीं रहता था. इन कड़ियो को उनकी जगह बिठाने का काम तो उन विचारों को कार्यान्वित करनेवाले कार्यकर्ताओं या उनका सैद्धांतिक अध्ययन-विवेचन करने वाले व्यक्तियों को ही करना पड़ता था,जो अपनी बुद् तथा अपने पर्यवेक्षण और अनुभव से ऐसा करते थे".
विदेशी इतिहासकार लुई फिशर कहते है कि " अगर उस अंग्रेज के बच्चे को ये मालूम होता कि जिस आदमी को वो ट्रेन के डिब्बे से बाहर फेक रहा वहीं आदमी एक दिन अंग्रेजी हुकूमत को पूरे ग्लोब से बाहर फेक देगा. तो ऐसी गलती कभी नहीं करता.
गांधी जी का विचार वैश्विक समाज के लिए बहुत हीं उपदेशी था. गांधी जी कहना था कि " आँख के बदले आँख फोड़ने से तो पूरी दुनिया हीं अंधी हो जायेगी". गाँधी जी कहते थे कि हम हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब एक माँ की हीं संतान है. अगर हम आपस में लड़ेंगे तो दमनकारी अंग्रेजी हुकूमत से हमारी माँ को कौन आजाद कराएगा ? परन्तु आज के परिवेश में कुछ विध्वंशक विचार धारा के लोग निरंतर गाँधी जी को अपमानित करने का कार्य करते हैं. परन्तु वो भूल जाते हैं कि दुनियाँ के सामने जब भी कोई घातक सामाजिक चुनौती आती है तो विश्व के लोग गाँधी जी के बताये हुए सिद्धांत का अनुसरण करने पर जोर देते हैं न कि बदले की बात करने की.
aaj Gandhi ji ko gaali diyaa jaa rha hai or unke htyaare ko sahi btaya jaa rha h.
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