यूक्रेन और रूस में आधिकारिक युद्ध की घोषणा आज हो गयी. जिसकी खबर आज तड़के मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई. मेरा और मेरे जैसे करोड़ों लोगों का मानना होगा कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है. युद्ध में नुकसान केवल और केवल मानवता की होती है. हम जैसे लोग भगवान से बस यही प्रार्थना कर सकते हैं कि जल्द से जल्द इस युद्ध को पूरे विश्व के लोग रोकें और मानवता को संरक्षण दें. यदि बड़े देश ऐसा करने में अक्षम होते है. तो उन्हें विश्व पावर कहलाने का कोई हक नहीं है. एक तरफ जहाँ यूक्रेन में करोड़ों लोगों की जिंदगियां दांव पर लगी हो और वहां विश्व के संप्रभु देश बस रूस पर प्रतिबंध लगाने की बात करके अपनी जिम्मेदारी से बचना चाह रहें हैं.
भारत समेत सभी देशों को युद्ध को शान्ति में बदलने के लिए तत्काल सार्थक कोशिश करनी चाहिए। वर्ना मानव समाज के लिए ये 1945 की तरह एक विभीषिका साबित होगी। मुझ जैसे करोड़ों लोगों ने तो द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका को तो नहीं देखा है, लेकिन उस दौरान हुए विभीषिका को आज महशूस कर सकते हैं और उस दौर में हुई तबाही को आज महशूस कर सकते हैं. द्वितीय विश्वयुद्ध की भयानक त्रासदी को हम किताबों में पढ़ सकते है और उसके असर को जानने-समझने के लिए हम जापान के नाकासाकी-हिरोशिमा के हालात को और सकते हैं. जहां मनुष्यों पर पहली बार परमाणु हथियारों का प्रयोग किया था. उसका असर नाकासाकी में आज भी देखने को मिलता है. जहां आज हरी-भरी जमीनों की जगह बंजरों ने ले लिया है. आज जब भी कोई बच्चा वहां पैदा होता है तो वो अपाहिज होता है.
अब रूस, अमेरिका और यूक्रेन को अपनी हठ छोड़कर शान्ति स्थापित करने में जुट जाना चाहिए तथा मानव जाति को एक विभाषिका से बचाना चाहिए। बड़े देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, चीन बस बयान दे रहें हैं और धरातल पर कुछ ख़ास करते हुए नहीं दिख पा रहें हैं. मेरे अनुमान के मुताबिक़ ये लड़ाई अमेरिका और रूस बादशाहत कायम करने की हो रही है.
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