उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव की घोषणा आज चुनाव आयोग ने तीन बजे तिथि व चरणवार घोषित कर दिया। अबकी बार यह चुनाव बहुत अलग होने जा रहा है। कोरोना की बढ़ती रफ्तार को मद्देनजर रखते हुए आयोग ने १५ जनवरी तक रोड शो, मेगा शो, रथ यात्रा एवं पब्लिक रैली पर रोक लगा दिया है तथा विधानसभा वार चुनावी खर्च को भी बढ़ा दिया है। यह चुनाव बहुत हद तक सोशल मीडिया पर आधारित होगा। यहां जिसके पास जितना पैसा होगा, जितने व्हाट्सएप विश्वविद्यालय के छात्र एवं अध्यापक होंगे उसकी बात जमीन तक बहुत जल्दी पहुंच पाएगी। इसलिए इस चुनाव में बहुत नयापन दिखने वाला है।
जिन पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा हुई है उसमें पंजाब को छोड़कर बाकी सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है। जिसको बीजेपी के छोटे-बड़े नेता डबल इंजन की सरकार कहकर संबोधित करते हैं। उन राज्यों में फैले अब्यवस्थाओं का असर बस बस जुमलों से खत्म नहीं होने वाला बल्कि फजीहत भी कराने वाला होगा। सारी राज्य सरकारों पर जनता का गुस्सा भी देखने को मिलेगा। डबल इंजन की सरकारों को तो केन्द्र और राज्य सरकार का भी हिसाब जनता मांगेगी।
मैं उत्तर प्रदेश से हूं और मैं अपने प्रदेश की बात करूंगा। जो मैंने अपनी आंखों से देखा है। उत्तर प्रदेश कोरोना में हुई सरकारिया बदइंतजामी को नहीं भूलेगा। कोरोना में करोड़ों प्रदेश वासी जो अपने घरों से बाहर अन्य प्रदेशों में फंसे थे। वे सब किन कठिनाइयों का सामना करके दो हफ्ते में पैदल, साईकिल से भूखे-प्यासे वापस लौटे। उन्हें वो दर्द आज भी याद है। उसके बाद की बदली परिस्थितियों में बढ़ती हुई महंगाई और ११० रूपया लीटर पेट्रोल, १८३ रूपया किलो सरसो का तेल, इलाहाबाद संगम पर दफनाई गई लाशें, मोक्षदायिनी गंगा में तैरते शव, ८९६ रूपया गैस सिलेंडर को कैसे भूल सकता है ? और तो और पेपर लीक बिना कोई परीक्षा पूर्ण न हो पाना ये सब तो राज्य के युवाओं के जेहन में घर बना कर बैठा है। अब तो हिसाब लोकतांत्रिक तरीके से लिया हीं जाएगा।
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