2019 के बाद पेगसस नाम का जीव देशद्रोही की संज्ञा के साथ फिर से अवतरित हो गया है। बहरहाल इस बार यह संज्ञा विपक्षी पार्टियों द्वारा दी जा रही है। "द वायर" इस रिपोर्ट को विश्लेषण के साथ हिंदी और अंग्रेजी में निरंतर छाप रहा है। वायर की रिपोर्ट को पढ़ने पर जो बात सामने निकलकर आ रही है, वो भारतीय लोकतंत्र को और संविधान को शर्मशार करने वाली है।
पेगासस साफ्टवेयर है क्या - यह साफ्टवेयर मूलतः एक एंटीवायरस है। जो इजरायल में निर्मित किया गया है। जो सरकारें निगरानी के लिए खरीदती हैं और यह कंपनी अपना साफ्टवेयर सिर्फ वहां की केन्द्र सरकारों को बेचती है। तो यह सवाल उठता है कि सरकार को विपक्षी नेताओं की जासूसी की क्या जरूरत आ गई थी?
पेगासस से किसकी-किसकी जासूसी हुई- जो खबरें निकलकर सामने आ रही हैं उसके अनुसार विपक्ष के बड़े नेताओं, संवैधानिक पदों पर बैठे हुए माननीयों, पत्रकारिता से जुड़े हुए लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम मुख्यत: शामिल है। विपक्षी नेताओं में अब तक सबसे बड़ा नाम कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गांधी और उनके पांच सहयोगियों के सामने आए हैं। संवैधानिक पदों पर आसीन ब्यक्तियों में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री अशोक लवासा, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई और पत्रकारिता जगत से न्यूज नेटवर्क 18, India Today Network, Poineer, Weekly Economic Times, Rojnama, द वायर, प्रसांत किशोर, अभिषेक बनर्जी, मोदी सरकार में शामिल कुछ मंत्रियों प्रहलाद पटेल, वैष्णव इत्यादि के नाम शामिल है। लिस्ट जारी होने का सिलसिला अभी भी जारी है। "द वायर" के तो M K Venu, Vardrajan पर सरकार की नजर शुरुआत से टेढ़ी है। क्योंकि यह न्यूज पोर्टल सरकार से सवाल पूछती है, जो जाहिर सी बात है कि सरकार को चुभती है और सरकार की छवि पर असर भी डालती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत जिस महिला ने मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई पर जी पर sexual harassment के सनसनीखेज संगीन आरोप लगाये थे। उस महिला और उसके पति के अलावा उसके परिजनों को भी जासूसी का शिकार बनाया गया। जो इस महिला के साथ घटित हुआ, वह अत्यंत शर्मनाक और बेहूदा था। बाद में उस महिला के साथ क्या न्याय हुआ और राफेल पर जो फैसला आया, जगजाहिर है।
लेकिन जासूसी को लेकर एक सवाल देश के हर समझदार लोगों के मन में है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, राजनेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं से सरकार को क्या डर था ? क्या ये लोग आतंकवादी, अलगाववादी या नक्सली हैं? यह कृत्य सीधा-सीधा भारत के महान संविधान को चुनौती देता है। अगर मोदी सरकार इतनी पाक-साफ है तो इनको आगे आकर सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान जज से जांच करवाकर दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहिए। नहीं तो सरकार के उपर जनता का शक और बढ़ता जाएगा।
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