आज देश किसान आंदोलन के साथ-साथ महंगाई से त्रस्त है। एक तरफ घरेलू गैस की सब्सिडी को खत्म करते हुए प्रति सिलेंडर की कीमत 717 रूपए कर दी गई है। पेट्रोल की तो बात करना देशद्रोह समान है। एक वक्त था जब मुझे याद है कि 2013 में डीजल की कीमत 52 रुपये लीटर डीजल तथा 73 रूपए पेट्रोल की कीमत थी और उस दरम्यान अमिताभ बच्चन ,अक्षय कुमार जैसे कईयों अभिनेताओं ने कीमत वृद्धि की आलोचना करते हुए गाड़ियों में ब्यंग स्वरूप आग लगाने की बात करते थे। परन्तु आज देखिए कि @abpnews के अनुसार भाजपा शासित मध्य प्रदेश में आज पेट्रोल की कीमत 70 सालों में पहली बार सैकड़े अर्थात 100 रुपये लीटर तथा डीजल 80 रूपए से ऊपर रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज की गई। फिर भी इन अभिनेताओं की गाड़ी मक्खन की तरह चल रही है। अब इनकी एक ट्वीट करने तक की हिम्मत नहीं है।अब तो ऐसा प्रतीत होता है कि इनकी गाड़ी में तेल भरपूर है मात्रा में है और साथ हीं मुंह में दही भी प्रचुर मात्रा में जमी हुई है।
मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है कि तब की कांग्रेस सरकार के खिलाफ इन अभिनेताओं ने सुनियोजित तरीके से एक षणयन्त्र रचने का काम किया था। वास्तव में अगर ये तथाकथित महान अभिनेता राष्ट्र की जनता के प्रति उत्तरदाई होते तो आज इस सरकार के खिलाफ भी आवाज उठाते। पर इनका उद्देश्य देश की जनता नहीं एक राजनैतिक पार्टी को पुनर्स्थापित करने की थी। जिसमें वो भली-भांति सफल भी हुए। मैं किसी और का नहीं अपना हीं उदाहरण दे रहा हूं। कोरोना काल के बाद नौकरी चली गई, गैस की सब्सिडी चली गई, पेट्रोल-डीजल के भाव आसमान पर चढ़ गये। फिर भी इस घमण्डी सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंग रहा है।

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