नये साल में इटली की ब्यक्तिगत यात्रा से वापस आने के बाद कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गांधी किसानों और तीनों विवादित कानूनों को लेकर लगातार मार्च और सोशल मीडिया पर आवाज उठा रहे थे। लेकिन एक कदम और चलकर आज दोपहर डेढ़ बजे राहुल गांधी ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता किया। जहां पर उन्होंने किसानों के समर्थन में अपना बयान दोहराया तथा किसानों के लिए लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया। अपने पत्रकार वार्ता के दौरान आज राहुल गांधी की शारीरिक भाषा संतुलित थी। राहुल गांधी एकाध मौकों को छोड़कर बस किसान और नव कृषि कानून पर हीं बात करते दिखे। और हर पत्रकार के सवालों का जबाव दिए। लेकिन इतने भर से काम नहीं चलने वाला। उन्हें अपने अन्दर निरंतरता लाए रखने की जरूरत है।
इस नए कानून में कई खामियां है। जैसे कि कमोडिटी एक्ट में जो बदलाव किया गया है। उसके मुताबिक कोई भी ब्यवसायी किसी भी कृषि फसल का कम मूल्य पर कितनी भी जमाखोरी कर सकता है और महंगे मूल्य पर बाजार में बेच सकता है। इसका असर देश के आम लोगों पर पड़ेगा। राहुल गांधी ने चीन और अर्नब गोस्वामी पर भी अपने विचार देश के सामने संक्षिप्त रूप से साझा किया। इसी दौरान कांग्रेस ने 'खेती का खून' "तीन काले कानून" नामक एक बुकलेट भी जारी किया।
राहुल गांधी के प्रेस वार्ता की कुछ महत्वपूर्ण झलकियां -
4, 5 लोगों को देश की खेती का ढाँचा दिया जा रहा है.
‘मैं साफ़ सुथरा आदमी हूँ, मुझे ये लोग छू नहीं सकते, हाँ गोली ज़रूर मार सकते हैं, मैं इनसे डरता नहीं हूँ
चाहे केई मेरे साथ न हो मैं अकेला खड़ा रहूँगा और लड़ता रहूँगा, ये मेरा धर्म है
आज मेरी बात मत मानना, जब गुलाम बन जाओगे तब मानोगे’- राहुल गांधी
एक पत्रकार को बालाकोट की जानकारी दी गई थी। पत्रकार ने कहा , यह हमारे लिए बहुत अच्छा हुए हैं कि हमारे 40 जवान मर गए अब हम चुनाव जीत जाएँगे। जिसने जानकारी दी और जिसे मिली दोनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.
विपक्ष को मीडिया की ज़रूरत होती है। विपक्ष को कोर्ट की ज़रूरत होती है। विपक्ष को संसद की ज़रूरत होती है।विपक्ष को संस्थानों की ज़रूरत है लेकिन इन सब पर सरकार का क़ब्ज़ा है.
किसान जानता है राहुल गांधी क्या करता है। भट्टा परसोल में जेपी नड्डा कहाँ थे ? भूमि अधिग्रहण के वक्त जेपी कहाँ थे.
राहुल गांधी कौन है? क्या करता है? यह बात हिंदुस्तान का हर किसान जानता है। किसान जानता है कि भट्टा परसोल में कौन किसान के साथ खड़ा था ? भूमि अधिग्रहण के समय नड्डा जी या मोदी जी नहीं बल्कि 'राहुल गांधी' किसानों के साथ खड़ा था.

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