Tuesday, July 14, 2020

भाजपा के सह पर पायलट कहीं के नहीं रहे

राजस्थान में कांग्रेस नीत सरकार में पिछले तीन दिनों से बहुत उथल-पुथल मची हुई है। इस उथल-पुथल के पिछे युवा नेता और उप-मुख्यमंत्री श्री सचिन पायलट जी की बढ़ती हुई महत्त्वाकांक्षाएं है। मध्य प्रदेश की तरह पिछे से भाजपा ने उनको हवा दिया और अपने समर्थक विधायकों की गिनती किए बिना बगावत कर दिल्ली में डेरा डाल रखा है। और उधर पुराने, मंझे हुए तीन बार के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी थे। जिन्हें पायलट ग्रुप के विद्रोह की भनक बहुत पहले हीं पता चल गई थी। उसी के मद्देनजर गहलोत जी ने भी अपना चौरस बिछाना शुरू कर दिया था। जिसमें सचिन पायलट और उनके समर्थक फंसते चले गए और परिणाम आज सबके सामने है।
बीजेपी ने पायलट को अन्दर खाने हवा देने का काम काफी समय पहले से शुरू कर दिया था। और अभी तक सफलता पूर्वक आगे भी बढ़ रहें हैं। सचिन पायलट और गहलोत के बीच संघर्ष की पटकथा दिसंबर 2018 में हीं लिखी जा चुकी थी। जब पायलट पर तरजीह देकर गहलोत को राजस्थान का मुख्यमंत्री बना दिया गया था।

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