मौसम का बदलता मिजाज और देश में कोरोना का कहर एक साथ घटित हो रहा है. रोज-रोज देश के अनेक हिस्सों से नए केस आ रहें हैं. लेकिन अब सरकार ने इसका कोई ठोस इलाज नहीं निकल सका है. लेकिन मुँहजोरी चारो तरफ से जारी है. जहां विपक्ष सत्ता पर ऊँगली उठा रहा है वहीं सत्ता अब अपनी अकड़ कम करते हुए विपक्ष के नेताओं से मेल-मिलाप और वार्तालाप करने की कोशिश कर रहा है. मुझे लगता है कि मोदी १ और मोदी २ के कार्यकाल में विपक्ष को साधने की ये पहली कोशिश है. सरकार अब विपक्ष की महत्ता को समझने लगी है और विपक्ष से कोरोना से निपटने के लिए राय भी मांगना शुरू कर दिया है. जो देश की राजनीति के लिए एक अच्छी बात है. मीडिया खबरों से पता चला कि दो दिन पहले मोदी जी ने सोनिया समेत समस्त विपक्ष के नेताओं से बात की और कोरोना से लड़ने के लिए उन नेताओं से सुझाव भी मांगे. आज कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी द्वारा ५ सुझाव भी दिया गया. जिस पर यदि सरकार अमल करती है तो समाज में एक अच्छा संदेश जाएगा.
मोदी एंड कम्पनी को चाहिए कि इस आफत की घड़ी में अपने अहम को त्यागकर देशहित में सोचें और अपने अज्ञानी प्रवक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भड़काऊ बयानबाजी करने से रोके. और सरकार को निम्न बातों की तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहिए -
1. सरकार को कोरोना टेस्ट की गति बढ़ाने की तरफ बहुत जल्दी कदम उठाने की आवश्यकता है.
2. ग्रामीण क्षेत्रों में जांच के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की प्रशिक्षित टीम का एक टास्क फ़ोर्स बनाना चाहिए। जो गांव के हर नागरिक का घर-घर जाकर टेस्ट करें.
3. जो लोग संक्रमित नजर आए. उनको कुछ दिनों नसरकारी निगरानी में रखा जाय.
4. देश के समस्त नागरिकों को अनाज और जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार के प्रमुख अजेंडे में शामिल करना होगा.
5. दिहाड़ी मजदूरों को उनके खाते में किश्तों में नगद भुगतान का प्रबंध सरकार को करना चाहिए.
6. छोटे और मझोले उद्योगपतियों को उद्योग में कर एवं अन्य तरिके से कुछ सरकारी रियायत देकर ब्यवसाय को बूस्ट करने के लिए नियमों में ढील देने की आवश्यकता है.
7. लकडाउन में फंसे लोगों को निकालने के सरकार को एक पारदर्शी एवं सहूलियत भरा फैसला करना चाहिए.
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