कल शाम मोदी कैबिनेट विस्तार में मंत्री बने टेनी जी ने अपने गृह क्षेत्र में सरकारी किसान सम्मेलन का आयोजन किया था। जिसमें प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी आने वाले थे। जिसकी भनक उस क्षेत्र के सच्चे किसानों को लगी। तो उन्होंने हेलीपैड को घेर लिया और यह सुनिश्चित किया कि मौर्य जी का विमान वहां उतर न सके। इतना सब होता रहा और किसानों और बीजेपी समर्थकों के बीच विवाद बढ़ता गया। दोपहर बाद एकाएक खबर आती है कि लखीमपुर खीरी में तीन किसानों की गाड़ी से कुचलने से मौत हो गई और अब उसकी संख्या बढ़कर दस तक हो गई है। जिसमें किसान और बीजेपी समर्थक भी शामिल हैं। जिस गाड़ी से रौंदने की खबर मिल रही है वो गाड़ी मंत्री जी के बेटे की थी। अतः कथित आरोपी मिश्रा जी के बेटे पर आरोप यह लगा कि वही गाड़ी चला रहे थे। गाड़ी से कुचलने के बाद उन्होंने बन्दूक और गोली भी चलाया और भागते बने।
किसानों की हत्या की खबर देश भर में आग की तरह फ़ैल गई। तमाम राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के लोग लखीमपुर खीरी जानें का ऐलान कर दिया। जिस वजह से शासन-प्रशासन के हाथ- पांव फूल गए। सभी नेताओं को सरकार पुलिस का उपयोग करते हुए नजरबंद या हाउस अरेस्ट करने लगी। लेकिन इनमें प्रियंका गांधी लड़ते-झगड़ते लखनऊ कौल निवास से निकल कर सीतापुर तक पहुंचने के बाद तड़के सुबह हिरासत में ले ली गई। अब तक वो हिरासत में हीं हैं, जबकि अखिलेश यादव समेत दूसरे राजनैतिक लोगों को रिहा कर दिया गया।
भाजपा की शासन में हीं क्यों किसानों के उपर इतने अत्याचार होते हैं ? ये कोई पहला अवसर नहीं है जब बीजेपी सरकार ने किसानों के उपर अत्याचार किया हो। इससे पहले 2018 मे शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने 'मन्दसौर' में किसानों के उपर गोलियां चलवाई थी। जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा किसान शहीद हुए थे और किसानों पर गोली किसी नेता-मन्त्री का बेटा या समर्थक नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की पुलिस ने चलाई थी। वो जख्म अभी भरा नहीं था कि उत्तर प्रदेश को फिर वही देखना पड़ा। जो हमारे लिए शर्म की बात है।
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