Friday, July 19, 2019

सोनभद्र हिंसा में दबंगई का उग्र रूप

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र और माँ विंध्यवासिनी के आँचल से स्टे जिले सोनभद्र में 17 जुलाई को एक बहुत हीं हृदय विदारक घटना घटित हुई. जिसके बारे में सोचने मात्र से हीं रूह काँप जा रहा है. आपको याद होगा कि बुधवार को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के मूर्तिया नामक गांव में जमीन विवाद को लेकर 10 लोगों गोलियों से भूनकर छलनी कर दिया गया और इसी घटना में 28 लोग घायल हुए थे. बताया जा रहा है कि मूर्तिया गांव के बाहरी इलाके में 90 बीघा खेती की जमीन है, जिस पर गाँव के गौड़ (एस सी ) जाती के ग्रामीण पुश्तैनी तौर पर विगत सैकड़ों वर्षों से खेती-किसानी का काम करते आ रहे हैं. तो उस दिन हुआ ये कि वहां का ग्राम प्रधान किसी आई एस अधिकारी से ये सारी जमीनें खरीद लिया था और बाद में ग्राम प्रधान जो कि गुर्जर बिरादरी से आते हैं उनके बेंच दिया। इसी साल फरवरी में दाखिल खारिज कराने के बाद 17 तारीख को ग्राम प्रधान जो राक्षस रूप में जमीन पर अपने 100 से 150 दोस्तों को दर्जनों ट्रैक्टर ट्राली में भरकर ले आया और उक्त जमीन पर हल चलाने लगा तो गौड़ जाति के लोगों ने इसका विरोध किया। इस बात पर प्रधान की तरफ से आये हुए लोगों ने उनपर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दी जिसे अनेक लोग मारे गए और अनेकों घायल हुए. जिसमें बाद में कुछ लोगों की गिरफ्तारियां हुई. बात गिरफ्तारियों की नहीं है बात इतने बड़े घटना की है जो यह सिद्ध कर रहा है कि उत्तर-प्रदेश में एक बार फिर सवर्णों की दबंगई बहुत तीजी से बढ़ रही है. जो मरे हैं या जो घायल है उनमें कई ऐसे हैं जो नाबालिग है. जैसा कि जो पूर्वांचल को जानता है वो पूर्वांचल के मिजाज को अच्छे से जानता होगा। क्योंकि पूर्वांचल में दबंगई वाले ठाठ को राजशाही ठाठ माना जाता है.
इस दबे हुए मुद्दे को आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की घटनास्थल की यात्रा और सरकार की थोड़ी सी बेवकूफाना हरकतों ने और हवा दे दी. बात ये है कि प्रियंका गाँधी सोनभद्र घटना में घयलों से वाराणसी के ट्रामा सेंटर से मिकार उनके गाँव सोनभद्र जाना चाहती थी. जभी मिर्जापुर, सोनभद्र और वाराणसी के सरहद पर नायरायण पुर गाँव के पास पुलिस ने रोक लिया और उन्हें आगे नहीं जाने दिया। मामला बढ़ता देख प्रशासन ने उन्हें चुनार गेस्ट हॉउस में हिरासत में रखा. जिसकी वजह से ये मामला और उछल गया. इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के समस्त फ्रंटल संगठनों ने जगह-जगह सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। जो अब तक निरंतर चल रहा है पर उस दबंग प्रवृत्ति की चर्चा कोई नहीं कर रहा है जिसकी वजह से न जाने कितने मासूमों की जान चली गयी.          

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