हमारे प्राचीन धरोहरों को सहेज कर रखने वाली और श्री शंकराचार्य स्वामी जी के आदर्शों को जिंदा रखने वाला जोशीमठ आज तबाह हो रहा है। जोशीमठ की तबाही का कारण सरकारों का घमंड है। अनेकों बार साधु-संतों ने विभिन्न सरकारों को चेताया कि प्रकृति से खिलवाड़ मत करो, जब प्रकृति कोप करेगी तो उसका परिणाम अत्यंत भयंकर होगा। वो आज देखने को मिल रहा है। जहां खुशहाल जोशीमठ में घरों-मकानों में दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं। सैंकड़ों परिवारों को अपने मकानों से निकलकर कैंपों में रहने को मजबूर होना पड़ा है। जगह-जगह जल की धाराएं अपने आप फूट कर बह रही हैं और आने वाले किसी भयंकर अनहोनी की आशंका को बलवती कर रही है।
इन सब के बीच एक पौराणिक, सांस्कृतिक नगरी लगभग उजड़ने की कगार पर है। हमारे सनातन हिंदू धर्म के ध्वजवाहक श्री शंकराचार्य जी की कर्मभूमि आज अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए सरकार से लड़ाई लड़ रही है। मैं गर्व से कहता हूं कि जिस गिरि "जाति" को मैं अपने सम्मान के साथ जोड़ता हूं। वह हमारे पूज्यनीय शंकराचार्य जी द्वारा जन्माए गये दशनामी अखाड़े में से एक है। लेकिन हम कितने लाचार और विवश हैं जो अपने भगवान के कर्मस्थली की रक्षा करने में असमर्थ हैं।
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