एक साल बीत जाने के बाद मार्च महीने के अंतिम सप्ताह से कोरोना का कहर विगत वर्ष से भी तेजी से बढ़ रहा है. उसके रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के पास कोई ठोस रणनीति अब बची नहीं है. दिसंबर महीने के बाद जिस तरिके से कोरोना के मामलों में कमी देखी गयी और दो देश में विकसित दवाइयां बाजार में आई. उससे जनता में सन्देश में गया कि कोरोना अब ख़त्म होने के कगार पर पहुँच चुका है. जिसके बाद कोरोना संबंधी नियमों को लेकर केंद्र तथा राज्य स्तर पर ढिलाई देखी गयी. पब, माल, रेस्त्रा, सिनेमाघर, पार्क को खोल दिया गया. इन्हें खोलने से अर्थब्यवस्था सुधरी जरूर लेकिन कोरोना ने एक बार फिर बहुत प्रभावी तरिके से वापस लौट आया है.
जनवरी के बाद जब कोरोना लगभग निष्प्रभावी रूप में जी रहा था. उस वक्त बड़बोले नेताओं ने और स्वयं मोदी जी, शाह जी, नड्डा जी सार्वजनिक रैलियों में मोदी जी की सफल निर्णय से जोड़ते नहीं थकते थे. लेकिन जब कोरोना आज फिर से भयंकर रूप धारण कर लिया है तो ये सब नेता दृश्य से गायब हो चुके हैं. अब भी तो इनको आगे आकर जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जब हम मानेंगे कि वाकई इन्हीं लोगों के नेतृत्व का करिश्मा था. जबकि मैं शुरू से कहता आया हूँ कि वो सफलता देश के समस्त नागरिकों, राज्य सरकारों समेत केंद्र सरकार की थी और आज की विफलता भी इन्हीं सबकी है. क्योंकि हम सब शिथिल पड़ गए और अपनी जिम्मेदारियों से भागने लगे.
एक बात मेरे समझ में आज तक नहीं आई कि बंगाल, केरल, पुड्डुचेरी, असम और तमिलनाडू जैसे राज्यों में कोरोना क्यों नहीं बढ़ रहा है ? क्या चुनावी राज्यों से कोरोना ने छुट्टी ले रखी है ? सभी पार्टियां बहुत बड़ी-बड़ी जनसभाएं कर रहीं हैं. न वहां सामाजिक दूरी का पालन हो रहा है. न वहाँ मास्क का ख्याल रखा जा रहा है. मतलब समझ नहीं आता कि देश में चल क्या रहा है ? इसके लिए देश की सभी पार्टिया दोषी हैं. जिस कोरोना की वजह से 542 सांसदों के बैठने वाला संसद भवन अल्पावधि में समाप्त कर दिया जाता हो. कई राज्य की विधान सभाओं की बैठक को स्थगित कर दिया जाता है. वहाँ चुनाव में हजारों, लाखों लोगों की भीड़ के साथ रोड शोज और जनता रैली की जा रही हैं. यह हास्यास्पद है. यही लापरवाही की सबसे बड़ी मिसाल है. क्या ये नेता हम नागरिकों को बेवकूफ समझते हैं या हम नागरिक इन नेताओं को अपना सबसे बड़ा रहनुमा ? कोरोना को निष्प्रभावी करने का एक मात्र उपाय ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मेडिकल सेवाएं जा सके.
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