कल भारत के प्रधानमंत्री ने देश के अधिकतर अपने समर्थकों को दिया जलाने के काम पर लगा गया. जिसे भक्त मंडली ने बखूबी अंजाम दिया. एक बात समझ में नहीं आयी या ये कहें तो भक्तों ने ये नहीं सोचा कि कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए दिया नहीं दवा की जरूरत है. प्रधानमंत्री के दिया और थाली बजाने वाले अभियान का उनके समर्थकों ने इतने शिद्द्त से निभाया कि मानो कोरोना अब देश छोड़कर भाग हीं जाएगा. सब लोग सोशल मीडिया पर दिया की फोटो अपलोड करने लग गए और अपने आप को सच्चे देशभक्त के रूप में प्रदर्शित करने लगा गए. सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ ऐसी तस्वीरें भी देखने को मिली कि कुछ अति उत्साही भक्त सर पर दिया लेकर मोदी-मोदी चिल्ला रहे हैं तो कुछ सिलेंडर जलाकर उजाला करने लगे. हैदराबाद से बीजेपी विधायक राजा सिंह तो दिया जलाकर प्रधानमंत्री जी के सोशल डिस्टेंसिंग का खुला मजाक उड़ाते हुए मशाल जुलूस भी निकाल दिया.
शायद प्रधानमंत्री जी को अपने समर्थकों पर पूरा यकीन था. जभी तो ताली-थाली के बाद दिया जलाने के काम पर लगा दिया. और उसका भरपूर उपयोग भी किया गया. मुझे ये लगे लग गया है कि मौजूदा दौर में विपक्ष का कोई और नेता नजर नहीं आता है। जो मोदी जी की लोकप्रियता को चुनौती दे सके. ऐसा मैं अपने घटित अनुभवों के आधार पर कह रहा हूँ. मैं ताली-थाली और दिया जलाने तक के प्रधानमंत्री के दोनों अभियानों के वक्त अपने पैतृक गाँव में था. उस दौरान मैंने एक बात देखीं कि लोगों ने जातियों के विभेद को तोड़ते हुए ताली-थाली भी बजाया और आज रात बिजली बंद करके दिया, मोमबत्ती भी जलाया. हमें आलोचना करनी चाहिए लेकिन अगर किसी का कुछ आकर्षण है तो उसकी प्रशंसा भी खुले दिल से करना चाहिए.
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