हर देशवासी जानता है की कोरोना आज समाज के हर तबके के बीच घुस चुका है. गांव से लेकर शहर तक यह महामारी का रूप धारण कर चुका है. इसे रोकने के लिए कुछ कड़े फैसले की जरूरत थी. जिस पर अमल भी हुआ. २१ तारीख की मध्य रात्रि २२ मार्च की मध्य रात्रि तक प्रधानमंत्री महोदय जी ने जनता १४ घंटों के लिए जनता कर्फ्यू का ऐलान कर दिया. जिसमें ये होना था कि २२ की सुबह को सड़क पर कोई भी सरकारी या प्राइवेट वाहन नहीं चलेंगे. आदेश तो यहां तक था कि लोगों को घर से निकलने के लिए रोका जाय. इसी बीच मेरे दादा जी का देहावसान हो चुका था. मैं दिल्ली से मंडुआडीह चलने वाली रेल में टिकट भी ले चका था. जिसमें मेरे साथ परिवार के अन्य सदस्य भी यात्रा में जुड़ने वाले थे. गाजियाबाद से हम सबने अपनी यात्रा शुरू की और हम बनारस के लिए निकल गए. जहां से हमें अपने गांव जाना था. जो जौनपुर-वाराणसी राजमार्ग पर स्थापित था. इस बीच जब हम मंडुआडीह स्टेशन पहुंचे तो वहां परिवहन का कोई भी साधन मौजूद नहीं था. लोग घंटों वाहनों के इन्तजार में थे. कुछ लोग तो पैदल हीं लहरतारा होते हुए कैंट रेलवे स्टेशन की तरफ जा रहे थे. जिसमें बूढ़े लोग भी शामिल थे. उन्हें पैदल चलने में काफी तलकीफ का सामना करना पड़ रहा था. क्योंकि एक तो मंडुआडीह से कैंट की दूरी तकरीबन चार किमी थी ऊपर सर दोपहर के १२.३० बज चुके थे. सूरज सर पर चढ़ कर नांच रहा था. उन लोगों की आँखों में देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा थी कि सरकार का ये फैसला सही था पर उसका क्रियान्यवन सही नहीं था.
जैसे हीं जनता ने एक दिन का 'जनता कर्फ्यू' झेला. उसके बाद थोड़ी राहत की सांस लेनी चाही तो २४ मार्च की शाम को भक्तों के देव पुरूष श्री मोदी जी अपने पसंदीदा समय रात्रि के ८ बजे फिर से उपस्थित होंगे। ऐसा समाचार भक्तगड़ों समेत देशवासियों को पता चला. हर कोई आशंकित हो गया कि मोदी जी अपनी आदतों के अनुरूप कुछ तो घोषणा करेंगे. और हुआ भी वही. साहेब तय समय पर उपस्थित हुए और ऐलान कर दिया कि ये कर्फ्यू आगे २१ और दिनों के लिए के लिए बढ़ाया जा रहा है. फिर क्या था ? भक्त प्रसन्न हो गए और मोदी जी को देव् अवतार बताने में जुट गए. पर जब उनसे ये सवाल किया गया कि जब १२ फरवरी को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी ने कोरोना को लेकर चेता दिया था. तो सरकार ने क्या किया ? ऐसे सवाल का जबाब न दे पाने की स्थिति में भक्त तिलमिलाने लगे और अपने संस्कारों के अनुरूप गाली-गलौज करने लगे.
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