Saturday, November 9, 2019

रामलला टाट से ठाट तक

490 साल पुराने अयोध्या मामले पर अन्ततः आज 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व में 5 जजों ने निपटारा कर दिया. आज भगवान राम और बाबरी मस्जिद के मुकदमें का एक अच्छे फैसले के साथ पटाक्षेप हो गया. यह फैसला इतना महत्वपूर्ण था कि दशकों तक इससे देश की राजनिति प्रभावित होती रही. हमे तो समाचार पत्रों और मीडिया के अन्य माध्यमों से पढ़ने और सुनने को मिलता है. उसमें 12 वीं शताब्दी तक या उससे पहले तक का भी कागजी जिक्र देखने-सुनने को मिला. आज कोर्ट उन सबको जबाब दे दिया और विवादित जमीन को हिन्दू पक्षों को समर्पित कर दिया। इससे उम्मीद की जानी चाहिए कि समाज में अब हिन्दू-मुस्लिम की खाई जो समुद्र जितनी चौड़ी हो चुकी है. वो जल्दी भर जायेगी.
दिन-ब-दिन यह मुद्दा बढ़ता गया और अंततः भावुकता में बदल गया. मेरी उम्र महज 5 साल रही होगी जब उक्त स्थान पर निर्मित मस्जिद जिसका नाम 'बाबरी' था. उसे  शिव सेना, संघ/बीजेपी के लोगों ने 6 दिसंबर 1992 को ढहा दिया. उस वक्त राज्य में बीजेपी की सरकार थी. जिसके मुखिया कल्याण सिंह थे. जिन्होंने कोर्ट में हलफनामा भी दिया था कि उनकी सरकार हर हाल में बाबरी मस्जिद की हिफाजत करेगी। परन्तु अपनी कुटिल मंशा की वजह से उन्होंने आतताई भीड़ पर कोई अंकुश लगाने की कोशिश नहीं की. उसका परिणाम अब आप सबकी सामने है. जिसके बाद नरसिम्हा राव की सरकार ने कल्याण सिंह की सरकार को बर्खास्त कर दिया और कोर्ट की अवमानना के आरोप में कल्याण को जेल भी जाना पड़ा था.
कल्याण सरकार जाने के बाद बाबरी विध्वंश पर अदालती सुनवाइयों का दौर चला और मामला फैजाबाद की जिला अदालत से होते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंचा फिर 2010 में सुप्रीम कोर्ट तक आया और आज अपने अंतिम सफर पर पहुंचा. इसमें भी बड़ी दिलचस्प बात ये है कि जिला अदालत के आदेश पर पुअर प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी ने राम मंदिर का दरवाजा खुलवाया था. बाद में बाबरी विध्वंश का कुछ कारक मुस्लिम समाज राजीव गांधी की मानता है. बाबरी विध्वंश के बाद कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार ने विवादित जमीन के अलावा 63 अकड़ के आस-पास जमीन अधिगृहित की थी. जो आज तक काबिज है. अब तक राम मंदिर पर खुलकर न बोलने की वजह से संघ/बीजेपी कांग्रेस की छवि मुस्लिम परस्त बनाने में काफी हद तक सफल हो गयी थी. इसलिए आज के फैसले पर पहले से चौकन्नी बैठी कांग्रेस ने कल की बजाय आज हीं सीडब्लूसी की बैठक आहूत की और संघ/बीजेपी से पहले राम मंदिर के बारे में अपना मन्तब्य दिया.      

कांग्रेस पार्टी का पक्ष भी अयोध्या मामले पर आ गया और वो इस निर्णय का समर्थन करती है और पार्टी मर्यादा पुरषोत्तम भगवान राम के भब्य मंदिर का समर्थन करती है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि "भगवान राम सदाचार हैं, भगवान राम त्याग हैं, भगवान राम करूणा हैं, भगवान राम प्रेम हैं. जो इन्हें बांटने की कोशिश करता है वो भगवान श्री राम की मर्यादा को नहीं समझता."


कोई नहीं जीता, नहीं कोई हारा 
देश जीता, देश का संविधान जीता  

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