Saturday, December 24, 2022
भारत जोड़ो यात्रा का दिल्ली में जलवा
Sunday, December 4, 2022
भारत जोड़ो यात्रा एम पी से पहुंची राजस्थान
राजस्थान में हो रहे गहलोत पायलट के झगड़ों के बीच आज शाम राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा आखिरकार राजस्थान में प्रवेश कर हीं गयी. राजस्थान में कांग्रेस भाजपा से राजनैतिक लड़ाई तो लड़ हीं रही है और साथ-साथ दो खेमों में बटी राजस्थान सरकार अपनों से भी लड़ रही है. एक तरफ गहलोत समर्थक अपने अनुभव की बता करते हैं तो दूसरी तरफ पायलट समर्थक युवा तुर्क की बात करते हैं. कांग्रेस चक्की के दो पाटों की तरह पिस रही है.
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बाद राजस्थान हिंदी क्षेत्र का तीसरा राज्य है.जहां भारत जोड़ो यात्रा जारी है. एक्सपर्ट की तमाम आशंकाओं को खारिज करते हुए हिंदी भाषी क्षेत्र में भी यात्रा कमाल कर रही है. अपने पूरे दम-खम के साथ यात्रा चल रही है. राहुल गाँधी यात्रा की शुरुआत से हीं कहते आ रहे हैं कि उनकी यह यात्रा गैर-राजनितिक है. लेकिन एक बात जान लेनी बहुत जरूरी है कि राजनिति करने वाले लोग गैर-राजनैतिक कुछ भी नहीं करते. और इसमें कोई बुराई भी नहीं है.
हम जैसे लोग अपने आपको भाग्यशाली मानते हैं कि हमने तो महात्मा गांधी जी की यात्रा नहीं देखी लेकिन राहुल गांधी की यात्रा देख रहें हैं. राहुल की भारत जोड़ों यात्रा की यदि सच्चे मन से विवेचना किया जाय, तो ये पता चलेगा कि यात्रा एकसमुद्र की तरह विशाल रूप ले चुकी है. जिसमें गावों, कस्बों और बड़े-बड़े शहरों से लोग जुड़ते हुए यात्रा को मुकम्मल बना रहे है और इतिहास में अपना नाम दर्ज करा रहे हैं. भारत जोड़ों यात्रा लगभग दो हफ्तों तक राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरेगी. उम्मीद है विगत राज्यों की भाँति भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान में सफलता का एक नया कीर्तिमान रचेगी.
Wednesday, November 30, 2022
रवीश कुमार
Wednesday, October 19, 2022
खरगे या थरुर किसकी अर्जी हुई मंजूर
Tuesday, October 11, 2022
Thursday, October 6, 2022
Sunday, October 2, 2022
मैसूर में भीषण बारिश के बीच राहुल का भाषण
Friday, September 30, 2022
खरगे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय
Tuesday, September 27, 2022
क्या अब गहलोत बन पायेंगे कांग्रेस अध्यक्ष
Sunday, September 25, 2022
पायलट की उड़ान पर गहलोत का जादू भारी
Thursday, September 22, 2022
कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन
Friday, September 16, 2022
भारत जोड़ो यात्रा नौवां दिन
Sunday, September 11, 2022
भारत जोड़ो यात्रा पांचवा दिन
Saturday, September 10, 2022
भारत जोड़ो यात्रा चौथा दिन
Friday, September 9, 2022
भारत जोड़ो यात्रा तीसरा दिन
Tuesday, September 6, 2022
भारत जोड़ो यात्रा
Wednesday, August 3, 2022
तिरंगा रैली
Sunday, June 26, 2022
Friday, June 24, 2022
बुढ़ापे का इश्क पार्ट - 3
Wednesday, June 22, 2022
बुढ़ापे का इश्क पार्ट -2
पार्ट - 1 से आगे लिख रहा हूँ -
इंसान ये भूल जाता है कि वो जिस जगह जा रहा है. उस जगह भी उसे पहचानने वाला कोई हो सकता है. लेकिन अधेड़ उम्र के चक्कर में पड़कर वो सोचता है कि अब तो शादी भी हो चुकी है, बच्चे और पति भी हैं. लेकिन ये भूल जाता है/जाती है कि ये दुनिया है. यहां के लोग नजरों को देखकर हकीकत पहचान जाते हैं. वो भी तब जब आप अपने काम के लिए सुबह-सुबह किसी और के साथ निकलते हैं और घर से 60 किलोमीटर दूर आपका अधेड़ पुरूष/महिला मित्र पहुँच जाता है. उसके साथ 1 घंटे का सफर 5 घंटे में पूरा करते हैं.
ऐसे अधेड़ लोगों में मैंने मिलने की बहुत तड़प देखी है. दोनों अधेड़ उम्र के आशिक शुक्रवार को बहाने से 5 घंटों तक साथ रहते हैं और फिर शनिवार को इनके दिल में मिलने की इतनी तड़प होती है कि किसी रिश्तेदार के यहां (अपने घर वालों से दूर) बहाने बनाकर बुलाते हैं, फिर रविवार को पीवीआर मॉल में बहाने बनाकर बुलाते हैं और एक अपने रिश्तेदार और उसके छोटे से बच्चे के साथ जाते हैं. ये सब उनके कुछ जानकार लोगों के नजरों के सामने घटित होता है. जिन लोगों के सामने ये जाया करते थे/थी. उनमें से एक उनका जानने वाला भी उनके रिश्तेदारों के आस-पास रहता है. और जब वो पूछता है तो पूर्व की भांति आँखों में आँखें डालकर झूठ बोल देता/देती है कि मैं तो वहाँ गया/गयी हीं नहीं था/थी. आप झूठ बोल रहे हो. आप मुझ पर शक कर रहे हो. मुझे बदनाम कर रहे हो. आपने मुझे कहाँ देखा ? जब देखा तो मुझे बुलाया क्यों नहीं ? अब इन्हें कोई कैसे बताएं कि राह चलते किसी को कोई बुलाकर अपनी जान जोखिम में क्यों डाले ? वहाँ पहचाने से इंकार कर देती/देते तो जनता उस बेचारे का क्या हश्र करती ? ये न तो आप को अंदाजा होता और न उस बेचारे को. ये शहर है कोई गांव नहीं, जहां आप किसी को रोककर न पहचानने पर भी थोड़े समय में अपना परिचय दे सकते हैं.
ऐसे घट रही घटनाओं को साक्षात देखकर मैं हतप्रभ हो जाता हूँ. क्योंकि, उस घटना का मैं भी उस दिन गवाह था. इन सब बातों को देखकर तो अब रिश्तों से भी विश्वास उठता जा रहा है. जब कोई 40 साल की महिला/पुरूष किसी दूसरे महिला/पुरूष से संबंध बनाने पर इतने उतारू हो जाएँ तो उनमें शर्म कहा बची ? और कोई कैसे विश्वास करें कि उनके बच्चों की उम्र 20 साल हो जाने के बाद भी वो अपने जीवनसाथी पर पूर्ण विश्वास कर सकें ?
उन्होंने ये सारे पैंतरे बड़ी चालाकी के साथ आजमाए थे. लेकिन जब आप किसी से बात करते हैं और घूम किसी और के साथ रहे/रही हैं. तो सामने वाला अपने भी पैंतरें बदलता रहता है. जिसने इस सत्य घटना को लिखने के लिए प्रेरित किया उसके मन को टटोला तो इनको लेकर उसके मन में कोई दुराभाव नहीं था. बल्कि उसका मात्र इतना कहना था कि आप जिस पुरूष/महिला के साथ अपना काम करवाने के लिए गए/गयी. उसके बारे में आप अपने घरवालों को बताकर जाती/जाते। क्योंकि वो जिस पुरूष/महिला के साथ गए/गयी थी. वो भी उनके परिवार वालों को बहुत करीब से जानता था/थी. अभी तो टेलीविजन और किताबों पढ़ने/देखने को मिलता था कि प्यार की कोई उम्र नहीं होती, लेकिन अब साक्षात देख भी रहा हूँ. इस स्टोरी में अभी बहुत से रूचिकर मोड़ आने बाकी हैं. जिन्हे आगे -आगे घट रही घटनाओं के आधार पर समेटने का प्रयास करूंगा.
मेरा लेख के माध्यम से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा बिलकुल नहीं हैं, अपितु समाज में घट रही सत्य घटनाओं से सबको परिचित कराने का इरादा है.
Tuesday, June 21, 2022
बुढ़ापे का इश्क पार्ट - 1
जमाना बहुत बदल गया है. अब कभी किसी को अपने निजी रिश्तों पर विश्वास नहीं रह पायेगा. सोशल मीडिया के इस दौर में देख पा रहा हूँ और तमाम उदाहरण मेरे सामने घटित हुए हैं और वर्तमान में हो भी रहें हैं. पुरूष/महिला अपने साझीदार को छोड़कर दूसरे पुरूष/महिला की तरफ बहुत तेजी से आकर्षित हो रहें हैं. इस प्रकार की मनो: स्थिति में वो क्यों पहुंच रहें हैं ? ये शोध का विषय है. मैं यहां बात युवक/ युवतियों की नहीं बल्कि 40 की उम्र पार कर चुके लोगों की कर रहा हूँ. जिनकी 18/20 साल की अपनी संतानें हैं. ऐसे लोगों में अपने पार्टनर से असंतुष्टि की भावना जागृति होना बहुत आश्चर्यचकित करने वाला हूँ. लेकिन यह घटित हो रहा है. ऐसे लोग अलप समय के लिए थोड़ा सुख तो उठा सकते हैं. लेकिन जब वो अपने चौथेपन में प्रवेश करेंगे तब उनको आज की गलती का अहसास करेंगे.
मैं कोई दूध का धुला नहीं हूँ. हो सकता है कि मैं भी किसी से बात करता हूँ, लेकिन वो बस बात तक हीं सिमित है. पार्टनर बदल-बदलकर मिलने-जुलने, घूमने-फिरने का कोई इरादा भी नहीं हैं और न कभी होगा. उनसे मैं एक अच्छे दोस्त के रिश्ते के दरम्यान बात करता हूँ. वो भी कोई एक होगी, एक से ज्यादा नहीं.
हाँ, मैं बात कर रहा था अधेङ उम्र के प्यार के बारे में. कई बार इस तरह के लोग आँखों देखी हकीकत को झूठ साबित करने के लिए अनेक तरह की बातों का जिक्र करते/करती हैं. और सच देखने वाला जब सबकुछ सोच-समझ कर कहता है कि मैं जो बोल रहा हूँ वो झूठ था. तब उस चरित्र को लोगों के सामने संतुष्टि तो जरूर मिलता/मिलती है, लेकिन मेरा दावा है कि उसकी अंतरात्मा उसे धिक्कारती होगी और कहती होगी कि तुमने तो चार लोगों के सामने उसे झूठा साबित कर दिया. लेकिन अपने जमीर को कैसे समझा पायेगा/पाएगी. हकीकत को तू, मैं और ऊपरवाला तो देख रहा था ना. उसके बाद चालाकी बस स्टेटस पर दो-चार ऐसे परिचित लोगों का चेहरा लगाकर वो फिर से दोहराई जाने वाली उस कहानी को छुपाने का असफल प्रयास करता/करती है. यार स्क्रिप्ट तो पहले से लिखी होती है, बस उसके अनुसार नाटक किया जाता है. आजकल के कैब वाले भी दिन में 11 बजे फ्री होते हैं और उसके बाद अपने ग्राहक को लाने के लिए गंतब्य को निकलते हैं और उचित किराया भी वसूलता है. लेकिन जो यात्री है, वह कहता है कि मैंने कोई किराया अदा नहीं किया है. इसे कैसे सच मान लिया जाय कि इस भागम-भाग की दुनिया में जहां हर किसी के पास समय का अभाव है, उस दौर में नि:स्वार्थ सेवा कौन करता है ? बहरहाल, मैं अपने मुद्दे पर फिर से लौट कर आता हूँ कि आजकल बुढ़ापे में इश्क का बुखार क्यों इतना बढ़ रहा है. मैंने कुछ लोगों को देखा है कि बहुत दूर से चलकर आते हैं और किसी वयस्क पुरूष/महिला से मिलते है और घंटे भर की दूरी को 5-6 घंटों में पूरा करते हैं. मिले हुए 24 घंटे भी नहीं बीतते है और फिर मिलने की बहुत बेचैनी रहती है, फिर कहीं बुलाते हैं और मिलते हैं. ऐसे लोगों को मेरे ख्याल से शायद अपने बच्चों के भविष्य के बारे में सोचने से ज्यादा किसी एक इंसान के बारे में सोचने की उत्तेजना रहती है. और वह इंसान अब उनकी जिंदगी में वर्तमान भी नहीं बन सकता.
मेरे अनुमान के मुताबिक़ ऐसी घट रही घटनाओं के पीछे पैसा हीं एकमात्र कारण होता है. अब समझ में आता है कि अगर हमारे पास पैसा है तो दुनिया की हर ख़ुशी हमारे पास होगी वर्ना आप बेकार हैं. मेरी हर किसी से यही प्रार्थना रहती है कि आप इधर-उधर भागने से अच्छा है अपने परिवार के साथ रहें। वो हर हाल में, हर परिश्थिति में आपके साथ होंगे और आपका सहयोग करेंगे।
मेरे लिखें हुए शब्दों से यदि किसी भाई/बहन को तकलीफ पहुंचती है. तो मैं उनसे खेद प्रकट करता हूँ, माफी चाहता हूँ.
Monday, June 13, 2022
Sunday, March 13, 2022
द कश्मीर फाइल
Thursday, March 10, 2022
Thursday, February 24, 2022
रूस-यूक्रेन युद्ध
यूक्रेन और रूस में आधिकारिक युद्ध की घोषणा आज हो गयी. जिसकी खबर आज तड़के मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई. मेरा और मेरे जैसे करोड़ों लोगों का मानना होगा कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है. युद्ध में नुकसान केवल और केवल मानवता की होती है. हम जैसे लोग भगवान से बस यही प्रार्थना कर सकते हैं कि जल्द से जल्द इस युद्ध को पूरे विश्व के लोग रोकें और मानवता को संरक्षण दें. यदि बड़े देश ऐसा करने में अक्षम होते है. तो उन्हें विश्व पावर कहलाने का कोई हक नहीं है. एक तरफ जहाँ यूक्रेन में करोड़ों लोगों की जिंदगियां दांव पर लगी हो और वहां विश्व के संप्रभु देश बस रूस पर प्रतिबंध लगाने की बात करके अपनी जिम्मेदारी से बचना चाह रहें हैं.
भारत समेत सभी देशों को युद्ध को शान्ति में बदलने के लिए तत्काल सार्थक कोशिश करनी चाहिए। वर्ना मानव समाज के लिए ये 1945 की तरह एक विभीषिका साबित होगी। मुझ जैसे करोड़ों लोगों ने तो द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका को तो नहीं देखा है, लेकिन उस दौरान हुए विभीषिका को आज महशूस कर सकते हैं और उस दौर में हुई तबाही को आज महशूस कर सकते हैं. द्वितीय विश्वयुद्ध की भयानक त्रासदी को हम किताबों में पढ़ सकते है और उसके असर को जानने-समझने के लिए हम जापान के नाकासाकी-हिरोशिमा के हालात को और सकते हैं. जहां मनुष्यों पर पहली बार परमाणु हथियारों का प्रयोग किया था. उसका असर नाकासाकी में आज भी देखने को मिलता है. जहां आज हरी-भरी जमीनों की जगह बंजरों ने ले लिया है. आज जब भी कोई बच्चा वहां पैदा होता है तो वो अपाहिज होता है.
अब रूस, अमेरिका और यूक्रेन को अपनी हठ छोड़कर शान्ति स्थापित करने में जुट जाना चाहिए तथा मानव जाति को एक विभाषिका से बचाना चाहिए। बड़े देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, चीन बस बयान दे रहें हैं और धरातल पर कुछ ख़ास करते हुए नहीं दिख पा रहें हैं. मेरे अनुमान के मुताबिक़ ये लड़ाई अमेरिका और रूस बादशाहत कायम करने की हो रही है.
Thursday, January 20, 2022
कलयुग में दो राम
Tuesday, January 11, 2022
बीजेपी के स्वामी प्रसाद मौर्य बने बागी
उत्तर प्रदेश बीजेपी में आचार संहिता लागू होते हीं भगदड़ मच गयी. आज पूर्वांचल के विधायक और योगी सरकार में श्रम मंत्री श्री स्वामी प्रसाद मौर्या और उनके साथी विदायक बाँदा जिले की तिंदवारी विधानसभा सीट से ब्रजेश प्रजापति, शाहजहांपुर की तिलहर सीट से रोशन लाल वर्मा और कानपुर के बिल्हौर सीट से विधायक भगवती सागर भगवा कुनबा छोड़कर साईकिल पर सवार हो गए हैं. ये दोपहर के बाद की आज की सबसे बड़ी खबर है. कल हीं विभिन्न चैनलों पर चुनावी सर्वे लाईव किया था. जिसमें भगवा पार्टी की सरकार बनते हुए दिखाया जा रहा था. वो सर्वे ठंडा भी नहीं पड़ा था कि पूस की ठंड में आज स्वामी प्रसाद मौर्या ने पार्टी छोड़कर पूर्वांचल के माहौल को गरमा दिया है. गौर करने वाली बात ये है कि चुनावी नजर में नजर आने वाले सारे महारथी अपनी कर्मभूमि पूर्वांचल की भूमि को हीं बना रखें हैं. जिनमें हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी वाराणसी (काशी), श्री योगी जी (गोरखपुर), सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव (आजमगढ़), उत्तर प्रदेश के एक उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्या (फूलपुर, इलाहबाद), कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राहुल गांधी, श्रीमती प्रियंका गांधी (रायबरेली, अमेठी) प्रमुख सियासी चेहरे हैं. जो पूर्वांचल को अपनी राजनैतिक उपजाऊ जमीन बनाये हुए हैं.
स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी में आने से पहले बीएसपी में रहे और २०१७ में बसपा छोड़ बीजेपी से जुड़े थे. स्वामी जी एक वरिष्ठ नेता हैं और ५ बार के विधायक रहे. वर्तमान सरकार समेत पिछली सरकारों में भी मंत्री रहे हैं. मौर्या जी बेटी श्री संघमित्रा मौर्या भी बीजेपी से सांसद है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौर्या जी का राजनैतिक रसूख कितना बड़ा है. एक तरह से कहें तो सपा प्रमुख श्री अखिलेश यादव पूर्वांचल को अच्छे तरिके से साध लिया है. जो प्रदेश में परिवर्तन की खबर को पुख्ता कर रही है. आगे स्वामी प्रसाद मौर्या अपने साथियों के साथ मिलकर बीजेपी को और कितना नुकसान पहुंचाते हैं ? यह देखना दिलचप होने वाला है. लेकिन इतना तो तय है कि मौर्या ने बीजेपी की किल्ली हिला चुके हैं. अब पूर्वांचल में एक बार फिर अगड़े-पिछड़े की राजनितिक लड़ाई बड़े जोर-शोर से उठेगी. स्वामी प्रसाद मौर्या अपने को पिछड़ों और वंचितों का नेता के रूप में अपने आप को प्रचारित करेंगे. पहले भी इनकी पहचान पिछड़ों के एक बड़े नेता के रूप में रही है. अब सपा को ये कितना फायदा पहुंचा सकते हैं ? इसका आंकलन भविष्य में जरूर किया जाएगा.
जमीन पर घट रहे घटनाओं पर नजर डाले तो प्रचण्ड बहुमत के घमंड ने बीजेपी को डूबा दिया. बीजेपी अपने निचे की जमीन को देखने की कोशिश नहीं की या यूं कहें कि बीजेपी अपने पैर को देखना को देखना मुनासिब नहीं समझा. अहंकार में बस आँखों के बराबर हीं देखना जरूरी समझा. इतना बड़ा मंत्री और उसके समर्थक विधायक पार्टी को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो जाते हैं और बीजेपी शीर्ष नेतृत्व महज मूक दर्शक बना रहता है. ये अहंकार की बानगी है. इस एक नासमझी के कारण बीजेपी चुनाव में अब धीरे-धीरे निचे की तरफ खिसकते जा रही है. खासकर पूर्वांचल का क्षेत्र हमेशा जातियों में बंटकर वोट करता है. जिसका बीजेपी ने २०१७ विधानसभा और २०१९ लोकसभा चुनाव में बहुत अच्छे से उपयोग किया था. लेकिन समय मामला थोड़ा उलटा पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. इस क्षेत्र के ओम प्रकाश राजभर जो अपनी जाति पर बढ़िया पकड़ रखते हैं. वो बीजेपी का साथ छोड़ अखिलेश के साथ जुड़ चुके हैं. निश्चित तौर पर बीजेपी अब नुकसान में रहने वाली है. जमीन का मुद्दा रोजगार, आवारा पशुओं से निजात, भय मुक्त शासन, महिलाओ का सम्मान, कृषि उपज की बेहतर कीमत, महँगाई इत्यादि है न कि धर्म. जनता अब अपने हक के लिए सरकार से सवाल पूछना शुरू कर दिया है.

