जैसा कि मैंने जो शीर्षक रखा है "कलयुग में दो राम" उससे आप सभी पाठक मित्रों को लेखनी के विषय का अन्दाज लग हीं गया होगा। हां। मैं उन्हीं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम जी की बात कर रहा हूं। त्रेता युग में तो केवल मर्यादा पुरुषोत्तम राम हुआ करते थे। जो अयोध्या के राजा महाराज दशरथ के पुत्र के रूप में इस पवित्र भूमि पर अवतरित हुए थे। लेकिन कलयुग में उन्हें दो राम में बांट दिया गया है। एक वो राम जो सौम्य, साहसी, वीर, आज्ञाकारी शिष्य, आज्ञाकारी पुत्र, न्यायप्रिय राजा, सर्वोत्तम भाई और आदर्श पति थे। वो भगवान राम अपने पिता महाराजा दशरथ जी के वचन की रक्षा हेतु अपनी सौतेली मां महारानी कैकेई के कहने पर सब सुख वैभव का परित्याग कर के वन गमन कर गए। उन्होंने पलटकर मां से अपना कसूर भी नहीं पूछा। बल्कि अपने अनुयायियों और सगे-संबंधियों को यही समझाते रहे कि मां के आदेश का पालन हर पुत्र को हर हाल में करना चाहिए।
भगवान श्री राम जी को इस कलयुग ने दो राम के बीच में बांटकर रख दिया है। एक वो आज्ञाकारी राम और कलयुग के पराक्रमी राम। जिन्हें अयोध्या के राजा नाम से जानते हैं। उनका नाम आजकल पिछले तीन दशकों से चुनाव जीतने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। एक वो राम जो सर्वोच्च मानदंड स्थापित कर चुके हैं। अब उनको राजनीति में उपयोग करके सही नहीं किया जा रहा है। आजकल एक विशेष पार्टी के प्रचार में ये देखा-सुना जा सकता है कि "जो राम कै लाए हैं, हम उनको लाएंगे"। क्या इस तरह की बेवकूफी भरी बातें करके हम अपने देवता को अपमानित करने का पाप नहीं कर रहे हैं। अरे हमारी कोई औकात है कि हम अपने माता-पिता को ला सकते हैं, नहीं हमारे माता-पिता हमें ला सकते हैं। अर्थात हमारे भगवान राम ने हम सबको पैदा किया है। हम सबको लेकर इस सृष्टि पर आए हैं। ऐसे घटिया बोल बोलने वाले लोग हमारे राम को अपने फायदे के लिए बदनाम नहीं कर सकते।
एक राम हैं हमारे सनातन धर्म के ध्वजवाहक और कलयुग के दूसरे राम हैं संघ, विश्व हिन्दू परिषद और उनके वैचारिक सहयोगियों के। हमारे राम तो घट-घट में बसने वाले हैं और उनके राम चुनावी बातों में। मैं समाज के हर तबके के लोगों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि हमारे भगवान राम को सौम्य, साहसी और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में हीं रहने दें। उन्हें अलग-अलग उद्देश्यों से बांटना बंद होना चाहिए। अयोध्या क्या देश के हर कण में समा श्रीराम जी के विद्यमान होने का सबको अहसास कराएं एवं उनके आदर्शों पर चलने के लिए लोगों को जागरूक करना चाहिए।
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