Wednesday, October 19, 2022

खरगे या थरुर किसकी अर्जी हुई मंजूर

आज 22 सालों बाद कांग्रेस में अध्यक्ष पद चुनाव कराए जाने का निर्णय लिया गया। जिसका नतीजा आज आने वाला है। जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे और श्री शशि थरूर जी आमने-सामने हैं। आज शाम तक यह आ जाएगा कि कांग्रेस जैसे ऐतिहासिक पार्टी का अगला अध्यक्ष कौन होगा ? लेकिन निश्चित तौर पर मैं कह सकता हूं कि भारतीय लोकतंत्र के लिए यह एक अच्छी बात होगी। चाहे हम कांग्रेस के प्रशंसक हो या फिर भाजपा के। हम सबको अपने पार्टी में इस तरह के चुनाव को वरीयता देने का दबाव आलाकमान के ऊपर या सर्वोच्च नेताओं के ऊपर बनाना चाहिए। मुझ जैसे और न जाने कितने करोड़ों लोग जो राजनीति में दिलचस्पी रखते हैं और युवा भी हैं। उन्हें राजनैतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र को स्थापित होते हुए देखना सुखद अनुभव है। कांग्रेस पार्टी ने अध्यक्ष पद का चुनाव का जो साहसिक कदम उठाया है। वह काबिलेतारिफ है। काफी सालों से हम लोगों ने देखा है कि विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में मनोनय के आधार पर अध्यक्ष का चुनाव होता आ रहा था। जिसे कांग्रेस ने आज खत्म किया है। पिछले दो दशकों में कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में श्रीमती सोनिया जी उनके बाद श्री राहुल गांधी जी अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस की सेवा की। 2019 लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। फिर एक बार दोबारा सोनिया जी अंतिम अध्यक्ष बने। उसके बाद बदले हालात को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष चुनाव की चर्चा शुरू हुई। जिसमें अशोक गहलोत के नाम से चर्चा शुरू होकर अन्ततः मलिकार्जुन खरगे और शशि थरूर पर नामांकन के वक्त जाकर खत्म हुई।
इस दरम्यान राजनीतिक चर्चाओं में हम देखते थे कि भाजपा/संघ और उनके समर्थक संगठनों के लोग कांग्रेस के ऊपर परिवारवाद का आरोप जोरदार ढंग से लगाते थे और कांग्रेस पार्टी को एक परिवार की पार्टी बताते थे। अब शायद उन्हें यह कहने से पहले अपने गिरेबान में झांकना पड़ेगा। जहां की खुद इसी महीने जेपी नड्डा जी को 3 साल के लिए अध्यक्ष पद का कार्यकाल और बढ़ा दिया गया। जिसमें ना चयन हुआ ना चुनाव हुआ। अब देखना सुखद है लग रहा है कि टी वी चैनलों एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में तरह-तरह  की चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। जहां कोई कह रहा है कि नया कांग्रेस अध्यक्ष गांधी नेहरू परिवार के नीचे काम करेंगे। उनके कहने पर काम करेंगे। उन्हीं के सुनेंगे। रिमोट कंट्रोल से चलेंगे। खैर जो भी हो यह लोकतंत्र के लिए कांग्रेस के लिए कांग्रेेस के कार्यकर्ताओं के लिए अच्छा है। हम लोग लगभग दो दशक से एक ही तरह की राजनीति देख रहे हैं। जिसमें एक तरफ हिंदू आस्था तो दूसरी तरफ सेकुलरिज्म की बात होती थी। राजनीतिक विमर्श से सेक्यूलरिज्म शब्द जैसे नदारद से हो चुकाए है। हाल के दिनों में भी देखा जाए तो कांग्रेस ने सेकुलरिज्म की लड़ाई लड़ी है। जिसमें कुछ क्षेत्रीय पार्टियां जैसे सपा, राजद, डीएमके ने भी सेक्यूलरिज्म की बात की और उस पर आगे बढ़ने की कोशिश भी की।
थरूर और खड़गे जी में से जो भी व्यक्ति अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर कांग्रेस जैसी ऐतिहासिक पार्टी के मुखिया का पद संभालेगा। उसके सामने विराट चुनौतियां भी होंगी और अपार संभावनाएं भी होंगी। जिसमें जनता और कार्यकर्ताओं का मनोबल उठाने के लिए कार्य करने भी होंगे। उन्हें जिम्मेदारी भी लेनी होगी। जवाबदेही भी तय करनी होगी। एक तरफ राहुल गांधी जी भारत जोड़ो यात्रा पर निकल चुके हैं। राहुल गांधी की यात्रा 40 दिनों से निरंतर चल रही है। जो 150 दिनों तक चलती रहेगी उसमें राहुल गांधी जी को काफी प्यार और स्नेह मिल रहा है उसे प्यार और स्नेह को समेटने की जिम्मेदारी आने वाले अध्यक्ष क्यों होने वाली है और एक लंबे अंतराल के बाद हम देखेंगे कि कांग्रेस का अध्यक्ष कोई गांधी परिवार से बाहर का बन रहा है।

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