कल यानि ७ सितम्बर से कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी जी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से "भारत जोड़ो यात्रा" पर निकल रहें हैं। जो कल कन्याकुमारी से शुरू होगी और कश्मीर में जाकर पूर्ण होगी। यह यात्रा लगभग ३५०० किलोमीटर से लंबी होगी एवं देश के १२ राज्यों तथा ४ केन्द्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरेगी। एक अनुमानित लक्ष्य के मुताबिक इस यात्रा को परिपूर्ण होने में लगभग छः महीने का वक्त लग सकता है। इस यात्रा की सबसे विशेष बात यह है कि भारत जोड़ो यात्री पैदल चलेंगे। इस यात्रा की अगुवाई पूर्ण रूप से राहुल गांधी करेंगे और ध्वज के रूप में राष्ट्रध्वज का उपयोग पूरी यात्रा के दौरान किया जाएगा।
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा महत्वपूर्ण क्यों है? उसके बारे में मेरे जैसा साधारण जानकार और संविधान में यकीन करने वाला ब्यक्ति आसानी से समझ सकता है। आज के वक्त में तानाशाही चरम पर है। राजनैतिक पतन का चलन अपने चरम पर पहुंच चुका है, विपक्ष एकदम नेपथ्य में जा चुका है, जहां कहीं विपक्ष है तो वहां भी केन्द्र की सत्ता पक्ष द्वारा देश के सभी संस्थाओं, मीडिया, केन्द्रीय संस्थाओं का दुरूपयोग करके या तो सत्ता के साथ जोड़ लिया जा रहा है या उनपर अनेक आपराधिक केस लगाकर कर झूकने पर मजबूर कर दिया जा रहा है। उदाहरण स्वरुप उत्तराखंड, मेघालय, गोवा, अरूणांचल प्रदेश और हाल हीं में २०१९-२० में कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को गिराकर अपनी सरकार बनाना, मुंबई में शिवसेना को तोड़ना, अग्निवीर नामक योजना लाकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना, महंगाई का चरम पर पहुंच जाना, शिक्षा, स्वास्थ्य की बदहाली, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना, सड़क, बिजली, पानी, धार्मिक सौहार्द को बहाल करना और गरीबों की दयनीय स्थिति भारत जोड़ो यात्रा का मूल अंश है।
राहुल गांधी जी जब कल कन्याकुमारी से यात्रा की शुरुआत करेंगे तो उनके साथ कांग्रेस के सभी बड़े नेता तो मौजूद होंगे हीं तथा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम के स्टालीन राहुल को तिरंगा देकर यात्रा शुरू करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। आज से हीं कन्याकुमारी राहुल और कांग्रेस के पोस्टर-बैनरों से पट चुका है। टीवी के माध्यम से यह दृश्य हम सूदूर बैठकर भी देख सकते हैं और उसकी अनुभूति कर सकते हैं।
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