भारत जोड़ो यात्रा की सुर्खियों की बीच कांग्रेस की एक खबर और भी सुर्खियों में है। वो है कि कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनेगा? शुरूआती दौर में दो नाम मीडिया और सूत्रों के बीच तैर रहे हैं। जिनमें एक नाम है तिरूवनंतपुरम से मौजूदा सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री शशि थरूर जी एवं दूसरा नाम राजस्थान के मौजूदा मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी का। अब देखना दिलचस्प होगा कि अन्तिम परिणाम किसके हक में जाता ? नौ हजार वोटर मिलकर कांग्रेस के नये अध्यक्ष का चयन करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष के साथ - साथ कांग्रेस शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री के नाम पर भी खूब अटकलें लगाई जा रही हैं।
शशि थरूर एवं गहलोत जी के बीच अगर तुलना की जाए तो एक बात स्पष्ट तौर पर साफ होती है कि थरूर जी प्रशासनिक सेवा के एक कुशल अधिकारी रहें हैं और अंग्रेजी के अच्छे वक्ता हैं। थरूर जी मनमोहन सरकार में केन्द्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा भी रह चुके हैं और लगातार तीन बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। थरूर जी के पास अंग्रेजी का ऐसा शब्द अपने भण्डार है। जो हिन्दुस्तान में बहुत कम लोगों के पास है। कई बार उनके द्वारा बोले/लिखे गए अंग्रेजी शब्द का अर्थ जानने के लिए डिक्शनरी की सहायता लेनी पड़ती है। शशि थरूर जी विवादित G-23 के सदस्य रहें हैं। जिनके ज़्यादातर साथी या तो शान्त होकर बैठ गये या कांग्रेस से बाहर चले गए। जिनमें कपिल सिब्बल और आजाद दो प्रमुख नाम शामिल हैं। थरूर के प्रति जागरूक कांग्रेसियों का रूझान कम रहेगा। उसके दो कारण हैं। पहला कारण ये कि थरूर गैर हिंदी भाषी क्षेत्र से हैं और दूसरा अन्त तक विद्रोही गुट के सदस्य बने रहे
वहीं अगर अशोक गहलोत जी की बात की जाए तो वो एक खांटी कांग्रेसी हैं। जिनका राजनैतिक पालन-पोषण कांग्रेस में हुआ है। जिलाअध्यक्ष से लेकर एन एस यू आइ, प्रदेश अध्यक्ष, तीन बार सांसद, तीन बार केन्द्रीय मंत्री, संगठन महामंत्री, राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री के पदों को सुशोभित कर चुके हैं या कर रहे हैं। गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है। और ये हकीकत भी है कि गहलोत जी अपने पिता जी के साथ जादू दिखाने का काम करते थे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बचपन के दिनों में दिल्ली स्थित घर में गहलोत जी जादू का खेल दिखाते थे और राहुल, प्रियंका प्यार से गहलोत जी को जादूगर अंकल नाम से बुलाते थे। गहलोत जी गांधी/नेहरू परिवार के तीन पीढ़ियों से बहुत विश्वासपात्र रहें हैं। गहलोत इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ काम किए और उनका विश्वासपात्र बने रहे। गहलोत हीं वो जादूगर थे जो पिछले साल सचिन पायलट के बगावत के बाद भी अपनी सरकार बचा ले गए थे और बीजेपी के मंसूबों को नाकामयाब कर दिया था। अशोक गहलोत ने बिकट से बिकट परिस्थिति में भी गांधी परिवार का साथ नहीं छोड़ा। एक तरफ जहां सिब्बल, आजाद, आर पी एन सिंह, जितिन प्रसाद, सिंधिया जैसे लोग सत्ता के के आगे घुटने टेक दिए वहीं गहलोत कमान की तरह गांधी परिवार का कंवच बने रहे।
राहुल गांधी के अध्यक्ष पद की अनिच्छा को देखते हुए यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि थरूर और गहलोत में अध्यक्ष तो बाजीगर हीं बनेगा। उसका मुख्य कारण यह है कि गहलोत कांग्रेस और गांधी परिवार के परम विश्वासी नेता हैं। उनकी छवि भी बेदाग है, हिंदी भाषी श्रेत्र से आते हैं एवं पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। जो भी अध्यक्ष निर्वाचित हो। अब एक बात तो तय है कि 1998 के बाद कांग्रेस को गांधी परिवार से बाहर एक नया अध्यक्ष मिलने वाला है।