Friday, September 30, 2022

खरगे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय

कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव की सरगर्मियों के बीच चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की अन्तिम लिस्ट आज सामने आ गई।‌‌ आज अप्रत्याशित रूप से कर्नाटक के अनुभवी नेता और राज्यसभा सांसद, राज्यसभा में कांग्रेस के विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे का नाम निकल कर बाहर आया और उन्होंने मधुसूदन मिस्त्री के समक्ष अपना नामांकन दाखिल किया। खरगे के नामांकन के वक्त  अध्यक्ष पद के दो चर्चित नामों अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह जी के साथ G-23 गुट में शामिल आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक, हुड्डा, मनीष तिवारी समेत प्रमोद तिवारी, शुक्ला, पुनिया जैसे दर्जनों लोग खरगे के प्रस्तावक बने।
निश्चित रूप से खरगे जी कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए एक अच्छे उम्मीदवार हैं। इसके साथ-साथ आजकल जो पहचान की राजनीति का फ़ैशन चल चुका है। उसमें भी वो फिट बेड रहे हैं। इतिहास में सबसे सताई हुई दलित जाति से संबंध रखने वाले खरगे कर्नाटक के गुलबर्गा जिले से आते हैं। यदि खरगे जी कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने में सफल हो जाते हैं तो बाबू जगजीवन राम के बाद दूसरे दलित अध्यक्ष होंगे। मल्लिकार्जुन खरगे साहब के बारे में एक बात कही जाती है कि वो पार्टी आलाकमान के हर आदेशों को बिना किसी शिकायत के स्वीकार करते हैं। उसी का नतीजा है कि आज कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बहुत नजदीक हैं।

Tuesday, September 27, 2022

क्या अब गहलोत बन पायेंगे कांग्रेस अध्यक्ष

भारत जोड़ो यात्रा के बीच राजस्थान से कांग्रेस के लिए बहुत हीं चिंताजनक तस्वीरें सामने आए रही है. कांग्रेस आलाकमान एक तरफ गहलोत को राजस्थान का मुखिया बनाने का मन बना चुका है. तो दूसरी तरफ गहलोत गुट सचिन को किसी भी कीमत पर मुख्यमंत्री बनने से रोकने पर आमादा है. इन सब के बीच राजनितिक हलकों में एक बात बहुत तेजी से तैर रही है कि क्या अब गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन पाएंगे ? राजस्थान में हुईं विधायकों के जमघट के पीछे आलाकमान गहलोत को जिम्मेदार मान रही है. कांग्रेस के लिए सोचने की बात ये है कि जिस गांधी परिवार पर गहलोत अटूट आस्था रखते थे. तो दो दिन में ऐसा क्या हुआ कि गहलोत ने पायलट को रोकने के लिए अपनी पूरी बेदाग़ जिंदगी को हीं दांव पर लगा दिया। कांग्रेस के इस बुरे दौर में भी गांधी परिवार के ऊपर G-23 के सस्दस्यों एवं विरोधियों ने हमला किया. तब-तब अपने आलाकमान की तरफ से मुखर होकर मोर्चा संभाला और करारा जबाब दिया.
कांग्रेस के अंदर गहलोत हीं एक ऐसे नेता थे. जिन पर गांधी परिवार अटूट विश्वास रखता था. उन्होंने हीं राजस्थान में आलाकमान को झकझोर कर रख दिया. इससे संशय होने लगा है कि अब गहलोत के ऊपर से आलाकमान का भरोसा उठ चुका है. आलाकमान के लिए इस समय दोहरी मुसीबत है. एक तरफ राजस्थान है और दूसरी तरफ गहलोत और पायलट की जगजाहिर अदावत. जिस तरह से गहलोत के समर्थन में 90 से ज्यादा विधायक एकजुट हुए और गहलोत के समर्थन का खुला ऐलान एवं पायलट की मुखालफत की. गहलोत समर्थक विधायक जुलाई 2020 में पायलट की बगावत को माफ़ करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. उस समय पूरे देश ने देखा था कि कैसे सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ 35 दिन तक मनेसर के होटल में बंद थे. उस समय पायलट ने कांग्रेस की गहलोत सरकार को बहुमत साबित करने की चुनौती दी थी. इस घटना को सरकार बचाने वाले विधायक भूल नहीं पा रहें हैं और भूलना भी नहीं चाहिए. उससे दिल्ली से भेजे गए दोनों पर्यवेक्षकों अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को नाराज कर दिया. क्योंकि खरगे और माकन जी सोनिया जी के दूत बनकर आये थे. ऐसे में गहलोत की निष्ठा अब सशंकित हो गयी है. आलाकमान अब अपनी साख बचाने के लिए चाहे जितनी भी कठोर कार्रवाई कर ले. लेकिन इस प्रकरण से हुए नुकसान की भरपाई  बड़ी कीमत राजस्थान कांग्रेस को चुकानी पड़ेगी.

Sunday, September 25, 2022

पायलट की उड़ान पर गहलोत का जादू भारी

अशोक गहलोत के कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन ? यह सवाल राजस्थान समेत देश के राजनीतिक फिजाओं में तैर रहा है। एक तरफ पायलट के समर्थक विधायक पुरजोर तरीके से पायलट के समर्थन में आवाज बुलंद कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ गहलोत गुट ने भी अपने ढ़ीले कल-पूर्जों को कस कर पायलट को रोकने की कोशिश कर रहा है। अब वक्त बताएगा कि राजस्थान में कांग्रेस के मुख्यमंत्री का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा ? क्या पायलट उड़ान भर पायेंगे ? या उन्हें जादूगर अपने कौशल से पटखनी दे देंगे। यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
आपको याद होगा कि पिछले साल सचिन पायलट अपने १८ समर्थक विधायकों के साथ गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था और महीने भर से ज्यादा दिन तक गहलोत खेमा और पायलट खेमा अपने-२ समर्थक विधायकों के साथ बाड़ेबंदी में रहे थे। अब वही वाकया पायलट के उड़ान भरने में रोड़ा बन रहा है। एक तरह से पायलट के बगावत के बाद राजस्थान की सत्ता कांग्रेस के हाथ से फिसल चुकी थी। लेकिन गहलोत ने अपनी जादूगरी से न सिर्फ वो राजनैतिक संकट टाला बल्कि अपनी सरकार बचाने में भी कामयाब रहे। आज जब पायलट के सिर पर ताजपोशी का एक अवसर बन रहा है। उसमें उनका पुराना कृत्य उनकी ताजपोशी में आड़े आ रहा है। 
मीडिया के माध्यम से खबरें आ रही हैं कि पायलट के नाम पर कांग्रेस के ज्यादातर तो विधायक सहमत नहीं हैं। वे विधायक पायलट और उनके द्वारा किए गए पाप पार्टी को याद दिला रहे हैं। जो मौजूं भी है। जब पूरे देश में बीजेपी/संघ जनता द्वारा चुनी हुई सरकारों को अस्थिर कर रही थी। उस दौर में पायलट ने कांग्रेस के इतिहास में सबसे बड़ा पाप किया। कहा तो यहां तक जाता है कि पायलट भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए तैयार थे। लेकिन जादूगर के कौशल के आगे पायलट समर्थकों को घुटने पड़े। क्योंकि भाजपा से गठबंधन करने लायक विधायक पायलट नहीं तोड़ पाए। आज जब भी कांग्रेस आलाकमान पायलट की ताजपोशी के बारे में सोचेगा तो उसे एक साल पहले हुए विश्वासघात को भी याद करना होगा।
अभी की मीडिया हेडलाइन्स चल रही है कि राजस्थान कांग्रेस में सचिन पायलट के नाम पर बहुत बड़ी बगावत हो गई है और ९० से ज्यादा विधायक लामबंद होकर विधानसभा अध्यक्ष डा. सी पी जोशी को अनिश्चित काल के लिए अपना इस्तीफा सौंप दिया हैं । यह कांग्रेस नेतृत्व के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। एक तरह से अशोक गहलोत ने सीधे - २ गांधी परिवार को चुनौती देते हुए एक संदेश भेजा है। शायद अब गहलोत जी की उतनी इज्जत आलाकमान की नजरों में ना हो जितनी अब से पहले तक थी। हर किसी राजनीतिक ब्यक्ति को यह पता था कि अशोक गहलोत सचिन पायलट को रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। क्योंकि गहलोत ने पायलट के विद्रोह के बाद बड़ी मुश्किल से अपनी सरकार बचाई थी। उस सरकार को अब वे विद्रोही गुट के हाथों में जाते देखना नहीं चाह रहे। गहलोत वैचारिक रूप से खांटी कांग्रेसी रहे हैं। उनके इस राजनीतिक जीवन को और मौजूदा विवशताओ  को भी कांग्रेस आलाकमान नजर अंदाज नहीं कर सकता।

Thursday, September 22, 2022

कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन

भारत जोड़ो यात्रा की सुर्खियों की बीच कांग्रेस की एक खबर और भी सुर्खियों में है। वो है कि कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनेगा? शुरूआती दौर में दो नाम मीडिया और सूत्रों के बीच तैर रहे हैं। जिनमें एक नाम है तिरूवनंतपुरम से मौजूदा सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री शशि थरूर जी एवं दूसरा नाम राजस्थान के मौजूदा मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी का। अब देखना दिलचस्प होगा कि अन्तिम परिणाम किसके हक में जाता ? नौ हजार वोटर मिलकर कांग्रेस के नये अध्यक्ष का चयन करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष के साथ - साथ कांग्रेस शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री के नाम पर भी खूब अटकलें लगाई जा रही हैं। 
शशि थरूर एवं गहलोत जी के बीच अगर तुलना की जाए तो एक बात स्पष्ट तौर पर साफ होती है कि थरूर जी प्रशासनिक सेवा के एक कुशल अधिकारी रहें हैं और अंग्रेजी के अच्छे वक्ता हैं। थरूर जी मनमोहन सरकार में केन्द्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा भी रह चुके हैं और लगातार तीन बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। थरूर जी के पास अंग्रेजी का ऐसा शब्द अपने भण्डार है। जो हिन्दुस्तान में बहुत कम लोगों के पास है। कई बार उनके द्वारा बोले/लिखे गए अंग्रेजी शब्द का अर्थ जानने के लिए डिक्शनरी की सहायता लेनी पड़ती है। शशि थरूर जी विवादित G-23 के सदस्य रहें हैं। जिनके ज़्यादातर साथी या तो शान्त होकर बैठ गये या कांग्रेस से बाहर चले गए। जिनमें कपिल सिब्बल और आजाद दो प्रमुख नाम शामिल हैं। थरूर के प्रति जागरूक कांग्रेसियों का रूझान कम रहेगा। उसके दो कारण हैं। पहला कारण ये कि थरूर गैर हिंदी भाषी क्षेत्र से हैं और दूसरा अन्त तक विद्रोही गुट के सदस्य बने रहे 
वहीं अगर अशोक गहलोत जी की बात की जाए तो वो एक खांटी कांग्रेसी हैं। जिनका राजनैतिक पालन-पोषण कांग्रेस में हुआ है। जिलाअध्यक्ष से लेकर एन एस यू आइ, प्रदेश अध्यक्ष, तीन बार सांसद, तीन बार केन्द्रीय मंत्री, संगठन महामंत्री, राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री के पदों को सुशोभित कर चुके हैं या कर रहे हैं। गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है। और ये हकीकत भी है कि गहलोत जी अपने पिता जी के साथ जादू दिखाने का काम करते थे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बचपन के दिनों में दिल्ली स्थित घर में गहलोत जी जादू का खेल दिखाते थे और राहुल, प्रियंका प्यार से गहलोत जी को जादूगर अंकल नाम से बुलाते थे। गहलोत जी गांधी/नेहरू परिवार के तीन पीढ़ियों से बहुत विश्वासपात्र रहें हैं। गहलोत इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ काम किए और उनका विश्वासपात्र बने रहे। गहलोत हीं वो जादूगर थे जो पिछले साल सचिन पायलट के बगावत के बाद भी अपनी सरकार बचा ले गए थे और बीजेपी के मंसूबों को नाकामयाब कर दिया था। अशोक गहलोत ने बिकट से बिकट परिस्थिति में भी गांधी परिवार का साथ नहीं छोड़ा। एक तरफ जहां सिब्बल, आजाद, आर पी एन सिंह, जितिन प्रसाद, सिंधिया जैसे लोग सत्ता के के आगे घुटने टेक दिए वहीं गहलोत कमान की तरह गांधी परिवार का कंवच बने रहे।
राहुल गांधी के अध्यक्ष पद की अनिच्छा को देखते हुए यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि थरूर और गहलोत में अध्यक्ष तो बाजीगर हीं बनेगा। उसका मुख्य कारण यह है कि गहलोत कांग्रेस और गांधी परिवार के परम विश्वासी नेता हैं। उनकी छवि भी बेदाग है, हिंदी भाषी श्रेत्र से आते हैं एवं पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। जो भी अध्यक्ष निर्वाचित हो। अब एक बात तो तय है कि 1998 के बाद कांग्रेस को गांधी परिवार से बाहर एक नया अध्यक्ष मिलने वाला है। 

Friday, September 16, 2022

भारत जोड़ो यात्रा नौवां दिन

भारत जोड़ो यात्रा आज अपने नौवें दिन में प्रवेश कर चुकी है। जो कि लेफ्ट के गढ़ केरल के विभिन्न क्षेत्रों में चल रही है। केरल को मैं लेफ्ट का गढ़ इसलिए भी कह रहा हूं कि वर्तमान में केवल केरल हीं एक ऐसा राज्य है जहां लेफ्ट पार्टियां सत्ता में हैं और पिछले विधानसभा चुनाव में लेफ्ट ने लगातार दूसरी बार कांग्रेस नीत गठबंधन को हराकर जनता का विश्वास प्राप्त किया था।‌‌ कांग्रेस को केरल में अभूतपूर्व सफलता मिल रही है। राहुल के साथ पदयात्रा में अपार जनसमर्थन चल रहा है। इस यात्रा ने देश को एक नया रास्ता दिखाने का कार्य आने वाले समय में करेगा। धनबल और चुनाव मैनेजमेंट के दौर में भी लोगों से सीधा संवाद आज भी सफलता की कूंजी है। यह आने वाले वर्षों में लोगों को बताया जाएगा कि कैसे कांग्रेस और राहुल गांधी ने 2022 में जनसंपर्क हेतू पैदल भारत भ्रमण पर निकले थे।
एक तरफ राहुल गांधी और उनके राजनैतिक गुरु दिग्विजय सिंह जी एवं विश्वासपात्र नेता जयराम रमेश जी पदयात्रा की रणनिति बना रहे थे और उसे अंजाम दे रहे थे। तो वहीं दूसरी तरफ संघ/बीजेपी अपना चिरपरिचित काम विधायकों को तोड़ने/खरीदने में मस्त दिखे। यात्रा आगे हीं बढ़ रही थी कि अचानक खबर आई कि गोवा कांग्रेस के ग्यारह में से आठ विधायक भाजपा में शामिल होकर भ्रष्टाचार मुक्त हो गये। खैर कांग्रेस को इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला। क्योंकि न अब राष्ट्रपति/ उप-राष्ट्पति का चुनाव है और न हीं इतने संख्या बल के आधार पर कांग्रेस सरकार बना या बिगाड़ सकती थी। 
भारत जोड़ो यात्रा में टीवी के माध्यम से पता चल रहा है कि पदयात्रा को ऐसे लोग भी अपना समर्थन दे रहे हैं जो आज तक कभी भी कांग्रेस का समर्थन नहीं किया था। ऐसे सिविल सोसाइटी वालों को भी अब लगने लगा है कि वाकई देश का लोकतंत्र बहुत बड़ी मुश्किल में है। आप देखेंगे तो पाएंगे कि इस पदयात्रा में लोग भावनाओं से सराबोर होकर जुड़ रहे हैं और दूसरों लोगों को भी जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

Sunday, September 11, 2022

भारत जोड़ो यात्रा पांचवा दिन

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का आज पांचवा दिन है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कल चौथे दिन हीं तमिलनाडु से निकलकर यह यात्रा केरल पहुंच गई थी। आज सुबह से यात्रा प्रारम्भ हुआ और तिरूवनंतपुरम की सड़कों पर अपना असर छोड़ रही थी। यहां आपको ये बताना बहुत जरूरी हो गया है कि तिरूवनंतपुरम शशि थरूर जी का संसदीय क्षेत्र है। कुछ दिन पहले तक एक खबर राजनितिक गलियारों में चलती थी कि थरूर जी G-23 गुट के सक्रिय सदस्य हैं। आपकी याद्दाश्त के लिए बता दूं कि ये वही ग्रूप था जिसके मुखिया गुलाम नबी आजाद साहब हुआ करते थे। आज वही थरूर कांग्रेस और राहुल के साथ तिरूवनंतपुरम की सड़कों पर थे।
आज तिरूवनंतपुरम में यात्रा के दौरान राहुल गांधी छात्रों और बुनकरों से मुलाकात कर उनकी बुनियादी समस्याओं को सुना। यह देखकर कितना अच्छा लगता है कि देश में कोई तो ऐसा नेता है जिसे देश की फ़िक्र है। देश के भविष्य की फ़िक्र है। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस भावी पीढ़ी को हिन्दुस्तान की शानदार एवं गौरवशाली इतिहास को बता रही है और वर्तमान में हो रहे क्षरण को भी रेखांकित कर रही है। इस यात्रा और इसमें मिल रहे अपार जनसमर्थन को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हमारा लोकतंत्र अनाथ नहीं है। देश में कुछ जिम्मेदार कंधे हैं जो देश की आकांक्षाओं, आशाओं का बोझ अपने मजबूत कंधों पर उठा सकते हैं और उसके भार को सहन भी कर सकते हैं।
यहां एक बात ध्यान देने योग्य और है कि वो केरल हीं था जो 2019 के चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा (एक प्रदेश से) लोकसभा की सीटों से चुनाव जीताकर संसद में भेजा था। स्वयं राहुल गांधी जी भी केरल प्रदेश से हीं लोकसभा सांसद चुने गए है। तो यहां कांग्रेस के समर्थन में जनसमर्थन स्वाभाविक है। कांग्रेस के संगठन महासचिव श्री के सी वेणुगोपाल जी केरल के स्थाई निवासी हैं। इन सभी समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस के मुखर आलोचक भी ये कहने लगे हैं कि राहुल गांधी जी के भारत जोड़ो यात्रा को भरपूर समर्थन मिल रहा है और यह यात्रा निश्चित तौर पर आगामी चुनावों में कांग्रेस के लिए सुखद परिणाम लाएगा।

Saturday, September 10, 2022

भारत जोड़ो यात्रा चौथा दिन

आज भारत जोड़ो यात्रा का चौथा दिन है। अन्य दिनों की भांति आजकी दिनचर्या रही है। आज चौथे दिन के यात्रा की मुख्य बात ये रही कि तमिलनाडु से निकल कर केरल पहुंच चुकी है। केरल वही जगह हैं जहां से राहुल गांधी वर्तमान में सांसद हैं। आज भी राहुल गांधी बेरोजगार युवाओं के एक समूह से मुलाकात की और उन्हें अपने साथ जोड़कर यात्रा में शामिल कर लिया। साथ - साथ चलते हुए राहुल ने उन युवा बेरोजगारों की परेशानियों को सुना और समझा तथा साथ हीं निवारण का तरिका भी बताया। राहुल गांधी आज केरल के विभिन्न दलित संगठनों के साथ भी चर्चा किए और उनकी चिंताओं को करीब से देखा, समझा। 
आज जैसे - जैसे यात्रा आगे बढ़ी तो उम्मीद के मुताबिक भाजपा की तरफ से राहुल पर राजनैतिक हमले भी होने लगे। उसका मुख्य आधार यह था कि केरल के किसी पोप ने राहुल गांधी से कहा कि ईशु हीं ईश्वर हैं बाकी और कोई शक्ति नहीं है‌। वह पादरी एक बार अपने विवादास्पद बयानों के कारण एक बार जेल भी जा चुका है। इस विडियो में राहुल गांधी पादरी से सवाल-जबाब कर रहे हैं। उस पूरे विडियो को न डालकर अपनी सुविधानुसार भाजपा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया। फिर हुआ ये कि भाजपा के सभी खाली मंतरी-संतरी अपने पसंदीदा मुद्दा ट्रोलिंग पर लग गये। देखो-देखो भाई राहुल गांधी हिन्दूओं का अपमान कर रहा है, भारत को जोड़ने का नाटक करके भारत तोड़ने वालों के साथ खड़ा है। यही है राहुल गांधी और कांग्रेस की हकीकत वगैरह-वगैरह।
अब इन संघीयों को कौन बताए कि भारत कैसे जोड़ा जा सकता है ? अरे भाई जो हमसे सहमत है वो तो हमारे है हीं। अब जो सहमत नहीं है, उसे हीं तो जोड़ना है। और रही बात धर्म की तो हम जिस भी धर्म के लोगों से संवाद करेंगे। वो अपने हीं धर्म का महिमा मंडन करेंगे न कि दूसरे धर्म का। अगर हमारे किसी धर्मगुरु से कोई कैथोलिक मिलता है तो हमारे गुरु हमारे धर्म को हीं महान बताएंगे। तो बीजेपी को अब ये समझ लेना चाहिए कि धर्म पर राजनीति करने वाले दिन अब लद चुके हैं। आज युवा शिक्षा और रोजगार मांग रहा है, गरीब दो वक्त की रोटी मांग रहा है, किसान अपने उपज का सही मूल्य मांग रहा है, बहन-बेटियां विधायकों से अपने इज्जत की सुरक्षा मांग रही हैं, गृहणियां सस्ता गैस सिलेंडर और सस्ती रसोई का सामन मांग रही है। अब भाजपा औने-पौने जबाब देकर नहीं बच सकती है। जनता जाग चुकी है।

आज की यात्रा का समापन कुछ इस तरह हुआ। मौका मिलते हीं आगे का यात्रा वृत्तांत लिखूंगा।

Friday, September 9, 2022

भारत जोड़ो यात्रा तीसरा दिन

कन्याकुमारी से शुरू हुई कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा आज तमिलनाडु के शहरों में घूम रही है। भारत जोड़ो यात्री और वहां के स्थानीय लोगों का विश्वास कांग्रेस को मिल रहा है। इसकी तस्दीक यात्रा के साथ चलने वाले पत्रकार, यू-ट्यूब ब्लागर, स्वाधीन पत्रकार, स्थानीय चैनल एवं समाचार इस बात की पुष्टि कर रहे हैं। यह यात्रा अभी तीन दिनों तक अपने तय लक्ष्य के अनूरूप चल रही है। इस यात्रा के जो विजुअल आ रहे हैं। वह हमारे लोकतंत्र एवं कांग्रेस के लिए काफी सकारात्मक होने वाले हैं।
इन तीन दिनों की यात्रा में स्थानीय लोग जोश और उत्साह के साथ जुड़ रहे हैं तथा यात्री बनकर साथ भी दे रहे हैं। राहुल गांधी जी के साथ चलने वाले सभी यात्री एक साथ विश्राम करते हैं, एक साथ खाना खाते हैं और रात्रि विश्राम भी टिन के बने कंटेनर में करते हैं। मेरा निश्चित विश्वास है कि राहुल के साथ परमानेंट चलने वाले यात्री आने वाले वर्षों में बहुत बड़े नेता के रूप में स्थापित होने वाले हैं। क्योंकि जो लोग विविधताओं से भरे समाज को देख रहे हैं। उनसे मिल रहे हैं तो उन लोगों से वे यात्री कुछ न कुछ अच्छी बात जरूर सिखेंगे।
आज यात्रा के दौरान हीं दोपहर में विश्राम के वक्त राहुल गांधी ने पत्रकार वार्ता भी की। जिसमें देश और पत्रकारों के मन में यात्रा को लेकर उठ रहे सवालों का बहादुरी के साथ अपने चिरपरिचित अंदाज में जवाब भी दिया और यात्रा की महत्व पर प्रकाश डाला। इसी बीच भाजपा ने राहुल के टी-शर्ट को लेकर (अनुमानित कीमत 41000) सोशल मीडिया पर सवाल खड़े किए। जिसका जबाब कांग्रेस ने भी मोदी जी के सूट, घड़ी और चश्मे के साथ दिया‌। कांग्रेस ने मोदी जी के साथ शाह जी एवं वशुंधरा राजे को भी नहीं बख्शा। अब अनुमान लगाना सहज हो गया है कि जैसे -२ राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा बढ़ती जाएगी वैसे -२ हीं बीजेपी घबराहट में राहुल गांधी पर हमलावर होती जाएगी। यही नियति भाजपा को नुक़सान पहुंचाने का काम करेगी। जब पांच महीने बाद भारत जोड़ो यात्रा कश्मीर में खत्म होगी तब तक राहुल गांधी देश के बड़े नेता के रूप में स्थापित हो चुके होंगे।

इस यात्रा के दौरान घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं पर मैं अपने विवेक के अनुसार कुछ न कुछ लिखने की कोशिश अवश्य करूंगा। 

Tuesday, September 6, 2022

भारत जोड़ो यात्रा

कल यानि ७ सितम्बर से कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी जी एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से "भारत जोड़ो यात्रा" पर निकल रहें हैं। जो कल कन्याकुमारी से शुरू होगी और कश्मीर में जाकर पूर्ण होगी। यह यात्रा लगभग ३५०० किलोमीटर से लंबी होगी एवं देश के १२ राज्यों तथा ४ केन्द्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरेगी। एक अनुमानित लक्ष्य के मुताबिक इस यात्रा को परिपूर्ण होने में लगभग छः महीने का वक्त लग सकता है। इस यात्रा की सबसे विशेष बात यह है कि भारत जोड़ो यात्री पैदल चलेंगे। इस यात्रा की अगुवाई पूर्ण रूप से राहुल गांधी करेंगे और ध्वज के रूप में राष्ट्रध्वज का उपयोग पूरी यात्रा के दौरान किया जाएगा।
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा महत्वपूर्ण क्यों है? उसके बारे में मेरे जैसा साधारण जानकार और संविधान में यकीन करने वाला ब्यक्ति आसानी से समझ सकता है। आज के वक्त में तानाशाही चरम पर है। राजनैतिक पतन का चलन अपने चरम पर पहुंच चुका है, विपक्ष एकदम नेपथ्य में जा चुका है, जहां कहीं विपक्ष है तो वहां भी केन्द्र की सत्ता पक्ष द्वारा देश के सभी संस्थाओं, मीडिया, केन्द्रीय संस्थाओं का दुरूपयोग करके या तो सत्ता के साथ जोड़ लिया जा रहा है या उनपर अनेक आपराधिक केस लगाकर कर झूकने पर मजबूर कर दिया जा रहा है। उदाहरण स्वरुप उत्तराखंड, मेघालय, गोवा, अरूणांचल प्रदेश और हाल हीं में २०१९-२० में कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को गिराकर अपनी सरकार बनाना, मुंबई में शिवसेना को तोड़ना, अग्निवीर नामक योजना लाकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करना, महंगाई का चरम पर पहुंच जाना, शिक्षा, स्वास्थ्य की बदहाली, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना, सड़क, बिजली, पानी, धार्मिक सौहार्द को बहाल करना और गरीबों की दयनीय स्थिति भारत जोड़ो यात्रा का मूल अंश है।
राहुल गांधी जी जब कल कन्याकुमारी से यात्रा की शुरुआत करेंगे तो उनके साथ कांग्रेस के सभी बड़े नेता तो मौजूद होंगे हीं तथा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम के स्टालीन राहुल को तिरंगा देकर यात्रा शुरू करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। आज से हीं कन्याकुमारी राहुल और कांग्रेस के पोस्टर-बैनरों से पट चुका है। टीवी के माध्यम से यह दृश्य हम सूदूर बैठकर भी देख सकते हैं और उसकी अनुभूति कर सकते हैं।