Wednesday, October 30, 2019

यूरोपियन जमूरों का कश्मीर दौरा और विपक्ष नजरबंद

जैसा कि यूरोपियन सांसदों की कश्मीर जाने की कुछ खबरें अपुष्ट रूप से छन-छनकर बाहर आ रहीं थी. तो कल से वह पुष्ट हो गईं हैं. जिन 23 सांसदों का दल यूरोप से कश्मीर भ्रमण को आया है. उनमें से 17 सांसद मुस्लिमों के खिलाफ काफी आपत्तिजनक भाषा में ट्वीट किये हुए हैं और मुस्लिम समाज के खिलाफ नजरिया रखते हैं. ऐसे लोगों को हमारे देश की संघ/बीजेपी की सरकार ने कश्मीर के हालात के मुआयने के लिए बुलाया है. जब देश के विपक्षी पार्टियों के नेता अपने कश्मीरी भाइयो/बहनों से मिलने के लिए श्रीनगर जाना चाह रहे थे. तो उन्हें जबरन वापस लौटा दिया. वैसे अंग्रेज प्रेम का संघ/बीजेपी का रिश्ता बहुत पुराना रहा है. चाहे माफीवीर सावरकर रहें हों या अब भागवत. इन सबका आदर्श अंग्रेज हीं रहें हैं. पता नहीं ये लोग अंग्रेजों पर इतना यकीन क्यों करते हैं ?

बहरहाल बात ये होनी चाहिए था कि जब कश्मीर हमारे देश का आंतरिक मामला था. तो उसे साक्ष्य भारत के नेताओं और कश्मीर के जनता से मिलना चाहिए था न कि विदेशी और दक्षिण पंथी सांसदों का. जो क्रीमिया में रूस के अतिक्रमण का खुला समर्थन करते हैं. हम कैसे मान लें कि कश्मीर में सब कुछ सामान्य है. कल हीं आतंकियों ने बंगाल से 5 मजदूरों को पंक्ति में खड़ा करके गोली मारकर उन्हें मौत की नींद सुला दिया. तो सरकार और नाजीवाद के समर्थक धुर दक्षिणपंथी सांसदों की बात पर कैसे यकीन किया जाय. संघ का राष्ट्रवाद के राष्ट्रवाद की परिभाषा अब अपने मूल विचार के बिलकुल विपरीत हो चुकी है. जिसे हम देशवासियों को समझने की जरूरत है. कहीं सरकार के लोग एक अंतरराष्ट्रीय दलाल जिसका नाम 'मैडी शर्मा' है. कहीं उसके हाथ खेल तो नहीं रहें हैं, कहीं राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता तो नहीं किया जा रहा है. मुझे शक हैं कि कहीं न कहीं यह सरकार दलालों के हाथ की कठपुतली भर बनकर रह गई है. 

संघ/बीजेपी का राष्ट्रवाद 
  • अपने देश के सांसदों को जबरन हवाई अड्डे से मारकर भेज देना 
  • महिला पत्रकारों के साथ अभद्रता करना 
  • कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को नजर बंद करना 
  • पठानकोट में आईएसआई को जांच के लिए बुलाना 
  • मोदी जी का केक खाने के लिए पाकिस्तान जाना
  • असहमति रखने वालों को पाक परस्त बताना 
  • विरोध के स्वर को दबाना 
  • सन्यासी का वस्त्र धारण करे हुए ने महिला यौन शोषण के आरोपियों को संरक्षण देना 



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