Friday, October 25, 2019

सरकारी एग्जिट पोल को जनता ने नकारा

आज मैं बात करना चाहूंगा ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल पर. क्या ओपिनियन पोल करने वाली एजेंसियां देश की जनता को गुमराह करती है ? क्या एग्जिट पोल करने वाली एजेंसियां मासूम जनता के सामने झूठ परोसती है ? अगर हाँ तो हमारे देश के लोकतंत्र करे लिए ये किसी बहुत गहरे संकट की आहात है. उदाहरण के तौर पर हरियाणा में 'इण्डिया टूडे' को छोड़कर लगभग आधा दर्जन चैनलों के पोल ने बीजेपी को 75 से 83 सीटें जीता रही थी. ऐसा एग्जिट पोल्ल में नहीं बल्कि ओपिनियन पोल पोल में भी दिखा रही थी और ओपिनियन पोल मतदान से मात्र 48 घण्टे पहले टीवी पर प्रसारित किया गया था. क्या इन मीडिया घरानों ने देश की जनता को गुमराह करने का काम नहीं किया है ? क्या इनके झूठ के लिए इन पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती ?

 ओपिनियल पोल की कुछ भ्रामक तस्वीरें संलग्न कर रहा हूँ -







हरियाणा जैसा हीं हाल महाराष्ट्र में भी मीडिया वाले दिखा रहे थे. जहां बीजेपी को अकेले 140 सीट से ज्यादा और बीजेपी, सेना युति को 240 से ज्यादा सीटें जीतती हुई दिखा रहे थे तथा कांग्रेस, एनसीपी गठबंधन को 50 के निचे का आँकड़ा दे रहे थे. हकीकत क्या हुआ आप अपनी आँखों से खुद देखें और सोचे कि क्या आज की मीडिया वाकई आजाद मीडिया की तरह काम कर रही है या किसी के दबाव में काम कर रही है. 
हरियाणा की जनता ने किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत न देते हुए वहां त्रिशंकु विधानसभा का खाका खींच दिया है. बीजेपी और सेना ने मिलकर महाराष्ट्र में बहुमत के आंकड़े को तो पार कर लिया है परन्तु हरियाणा में पेंच फंसा हुआ है. जहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने सरकार गठन की सभी संभावनाओं को तलाशना शुरू कर दिया है. कुछ हद तक बीजेपी को इसमें सफलता भी मिल रही है. जब कुछ निर्दलीय विधायक जिनमें 'गोपाल काण्डा' एक प्रमुख नाम हैं. उनके समेत पांच निर्दलीयों ने मिलकर खटटर को सरकार बनाने के लिओए समर्थन का दावा किया है. काण्डा के काण्ड के चर्चे मैं निश्चित तौर पर अगले लेख में करना चाहूंगा.

ओपिनियन पोल और मिलता-जुलता परिणाम ये रहा -



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