Wednesday, September 29, 2021

कपिल सिब्बल

पंजाब में सिद्धू ने क्या इस्तीफा दिया कांग्रेस का नमकहराम G-23 समूह एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। सिब्बल ने आज शाम पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए नेतृत्व परिवर्तन की अपनी और अपने साथियों की पुरानी बातों को फिर से दोहराया और कांग्रेस आलाकमान को एक बार फिर कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। सिब्बल ने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास कोई अध्यक्ष नहीं है। ये बात सत्य है लेकिन अधूरा। कांग्रेस के पास अन्तरिम अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी हैं। जिन्हें सी डब्लू सी की मीटिंग में इन्हीं महानुभावों ने चुना था। लेकिन अब अपनी बात से पलटने की कोशिश कर रहे हैं। निश्चित तौर पर कांग्रेस इस समय बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। इस संकट के वक्त में ये महान नेता बस कांग्रेस नेतृत्व की टांग खिंचने में लगे हुए हैं।
हमें याद करने की जरूरत है कि ये तथाकथित शूरवीर नेता जो 2004-2014 तक मंत्री बनकर सत्ता की मलाई खा रहे थे। उस वक्त इन्होंने पार्टी और संगठन में अपना कितना योगदान दिया ? बल्कि इन्हीं नाकाम लोगों की वजह से कांग्रेस सत्ता से दूर हुई और दहाई के आंकड़ों में आकर सिमट कर रह गई। इन्हें किसी भी कांग्रेसी निति से कोई मतलब नहीं था और न विचारधारा का प्रवाह इनके हृदय में था।
मैं भी कांग्रेस का समर्थक रहा हूं और 2004 से इन महान गैंग के नेताओं को अखबार और टीवी के माध्यम से देखता आया हूं और गांव में इनके विभागों में हुई अनियमितता तथा समर्थकों से संवादहीनता को भी महसूस किया हूं। कांग्रेस के लिए 2014 के चुनाव में भी जमीन पर सहानूभूति थी, लेकिन इन बेगैरत लोगों के लिए जबरदस्त नाराजगी थी। जिसका परिणाम कांग्रेस को बुरी तरह चुनाव हारकर चुकाना पड़ा। खुद सिब्बल साहब 2014 का चुनाव बुरी तरह से हार गए थे और किसी तरह उसी आलाकमान से सिफारिश लगवाकर राज्य सभा के सदस्य बने। उस वक्त इनका आत्मसम्मान शायद घास चरने गया था। सिब्बल गैंग के लोग कायल और डरपोक हैं जो संघ/बीजेपी से डरते हैं और अपनी उपयोगिता सिद्ध करने के लिए पार्टी पर दोष मढ़ते हैं। सिब्बल जी यदि इतने महारथी थे तो उन्हें चांदनी चौक लोकसभा सीट छोड़कर भागना नहीं चाहिए था अपितु डटकर मुकाबला करना चाहिए था। 

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