आज देश ने दो खबर कांग्रेस की तरफ से देखी। पहली खबर प्रमुखता से जो प्रकाशित हो रही थी वो ये थी कि वामपंथी और आंदोलन से जन्में नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे थे। जिनका नाम क्रमश: कन्हैया कुमार (बेगूसराय) और गुजरात से निर्दलीय विधायक और दलित चिंतक जिग्नेश मेवानी थे। लेकिन सारी महफ़िल लूट ले गए पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष श्री नवजोत सिंह सिद्धू ने। कैप्टन अमरिंदर सिंह जी को कुर्सी हटाने के बाद चन्नी जी को मुख्यमंत्री बनाया और जब चन्नी पर सिद्धू का दबाव नहीं चला तो पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इस दौरान कन्हैया कुमार और जिग्नेश की कांग्रेस से जुड़ने वाली खबर दब गई।
कांग्रेस के लिए हाल के दिनों में देखा गया था कि ज्योतिरादित्य, जितिन प्रसाद, प्रियंका चतुर्वेदी, ललितेशपति त्रिपाठी और सुष्मिता देव जैसे युवा नेता कांग्रेस का हाथ छोड़कर या तो बीजेपी/संघ में चले गए या तो क्षेत्रीय पार्टियों में शामिल हो गए। इस सन्दर्भ में देखा जाए तो इन दोनों युवाओं का कांग्रेस के साथ जुड़ना एक बहुत बड़े राजनीतिक संकेत प्रदान करने वाला है। वो इसलिए कि जब कांग्रेस को युवा छोड़ रहे थे जब युवा पार्टी के साथ जुड़ भी रहे थे। आज कांग्रेस से जुड़ने वाले दोनों नेता आन्दोलन से जन्में हैं। जिसमें कन्हैया कुमार पर 2018 में जेएनयू में विवादित नारे लगाने का आरोप लगा था। जिसे दिल्ली पुलिस और भाजपा की सरकार आज तक अदालत में सिद्ध करने में असमर्थ रही है और दूसरे नेता जिग्नेश नए और ऊर्जावान हैं जो गुजरात में दलितों के हितों की रक्षा के लिए आन्दोलन चलाया और उन्हें जागरूक किया। इस तरह से दोनों नेता बिना किसी गाडफादर के खुद आगे बढ़े।
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