विश्व भर में जनवरी महीने से शुरू हुआ कोरोना का कोहराम आज कहर ढा रहा है. और परिणाम ये है कि हमारे देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 7 हजार पार कर चुकी है. केंद्र सरकार का ढुलमुल रवैया अभी तक जारी है. 200 से ज्यादा मरीजों की इस वायरस से मृत्यु भी हो चुकी है. लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कोरोना के संक्रमण को फैलने पर थोड़ा बहुत रोक जरूर लगी है. सरकार लाकडाउन के अलावा और कोई दूसरा तरीका अब तक ईजाद नहीं कर पायी है. देखना है लाकडाउन के भरोसे सरकार कब तक लोगों के बीच में अपने आपको प्रस्तुत कर पाती है.
कोरोना को रोकने में गैर-भाजपाई दलों की सरकारें आगे -
अब तक जिन सरकारों ने इस महामारी को रोकने में सफलता हासिल की है या कहें कि कुछ हद तक वायरस को फैलने से रोका है. उनमें गैर-भाजपाई सरकारों का मुख्य भूमिका रहा है. बात चाहे कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़, राजस्थान की करें या लेफ्ट शासित केरल की. इन सब राज्यों ने कोरोना को रोकने में काफी हद तक सफलता अर्जित की. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने होली बाद से हीं सिनेमा घरों, माल, स्कूल, कॉलेज को बंद करा दिया था. जिसका परिणाम ये हुआ कि छत्तीसगढ़ में मरीजों की संख्या सिमित होकर रह गयी. केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने सुसंगठित तौर पर बहुत हीं बढ़िया काम किया। जब भारत में कोरोना का आगमन हुआ उस समय केरल में मरीजों की संख्या पूरे देश में पहले स्थान पर थी. जो विजयन की प्रशासनिक क्षमता की वजह से आज कंट्रोल करते हुए तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है. इनके अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कोरोना से निपटने के लिए एक "भीलवाड़ा" मॉडल तैयार किया। जिसका सफलता का जिक्र देश भर में किया जा रहा है. भीलवाड़ा में एकाएक मरीजों संख्या में काफी इजाफा हुआ था. जिसे कम वक्त में हीं सामान्य कर दिया और पूरे राज्य में तीव्र गति से कोरोना की नि:शुल्क जांच करवाई। जो पूरे में देश में सर्वाधिक संख्या जांच वाला प्रदेश बना.
विजयन जी को इस तरह की आपदा से निकलने का बहुत अनुभव है और उनके अनुभवों से केंद्र समेत अन्य राज्यों को सीखने की जरूरत है. 2018 में आये निपाह से निपटने का अनुभव विजयन जी के प्रशासन के पास है. निपाह के वक्त केरल ने हीं पूरे राज्य को तीन जोन येलो, ऑरेंज, ग्रीन में बांटकर उसे खत्म किया था. वही मॉडल आज महाराष्ट्र से झारखंड, छत्तीसगढ़ तक अपनाया जा रहा है.
बीजेपी के मुख्यमंत्री लाचार क्यों ?
इन सबके बीच बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री कहीं नजर नहीं आ रहें हैं. बीजेपी से अकेले मोदी जी हीं नजर आ रहे हैं. क्योंकि उनकी मजबूरी ये है कि अगर वो कोई प्लान लेकर सामने आते हैं तो सरकार उनकी ही पार्टी पर उठने शुरू हो जाएंगे। आप देखेंगे कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में स्थिति कितनी भयावह बनी हुई है. शिवाय घोषणा के जमीन पर कोई काम नजर नहीं आ रहा है. बीजेपी मुख्यमंत्रियों के पास भी इस लड़ाई से लड़ने के लिए अच्छे विचार है. पर चाह कर भी उसे वो जनता के सामने नहीं ला पा रही है.
कांग्रेस आगे बढ़ कर कोरोना पर लड़ाई लड़ती हुई दिख रही है
कांग्रेस पार्टी कोरोना के मुद्दे पर आगे बढ़ते हुए लड़ाई लड़ते हुए दिखना चाह रही है. उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने एक चाल के मुताबिक अपने राज्यों को मीडिया के सामने ला रही है और बारी-बारी से पत्रकार वार्ता करवा रही है. जिनमें सवाल-जबाब का सिलसिला भी रखा जाता है. इसी तरह की एक पत्रकार वार्ता में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि 'हमारे नेता राहुल गांधी जी ने काफी पहले हीं तैयारी करने का निर्देश दे दिया था. जिसकी वजह से हमारी सरकारों ने इससे निपटने में सफलता पाई. भूपेश बघेल ने ये कहते हुए सरकार से भी सवाल पूछ लिया कि "यदि विदेश से आने वालों को सरकार हवाई अड्डे हीं रोक लेती और चेक करती तथा हवाई जहाज़ों को रद्द कर देती तो आज इतनी बुरी स्थिति देखने को नहीं मिलती. इससे एक बात स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि कांग्रेस अब सरकार को घेरना शुरू कर चुकी है.
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