Tuesday, April 14, 2020

कोरोना का कहर और लाकडाउन भाग -2

जनता कर्फ्यू से होते हुए हम देशवासियों ने 24 मार्च से 14 अप्रैल तक पूरे देश में 21 दिन का लाकडाउन देखा. इस दौरान प्रधानमंत्री जी के आग्रह पर कोरोना को भगाने के लिए पूरे देश में ताली-थाली और दीपोत्सव का सफल आयोजन किया गया. उसके बाद भी दिन-ब-दिन स्थिति गंभीर बनती गयी। जिसका परिणाम ये रहा कि आज से फिर 3 मई तक के लिए लाकडाउन 2.0 को बढ़ा दिया गया है। जनता अब हताश होती नजर आ रही है. लोगों का धैर्य अब टूटने लगा है.

देश की जनता का सब्र टूट अब टूट रहा है-
देश जिस विकट स्थिति से गुजर रहा है. उसने जनता के सब्र की सीमा को लांघते हुए बहुत ऊपर जा पहुंचा है. वो ज्वालामुखी की तरह कब विस्फोट कर जाएगा ? इसका निश्चित अनुमान किसी सरकार या सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी के पास नहीं है. उसी का नतीजा ये रहा कि आज जैसे हीं प्रधानमंत्री जी द्वारा लाकडाउन को सुबह 10 बजे 3 मई तक बढ़ाने का बाकायदा एलान किया गया. तो शाम होते-होते उस बेचैनी का असर महाराष्ट्र में दिखने लगा. जहां बांद्रा रेलवे स्टेशन पर (निकट जामा मस्जिद) प्रवासी मजदूरों की भीड़ हजारों की संख्या में एकत्रित हो गयी. जो कोरोना संक्रमण को देखते हुए एक गंभीर समस्या नजर आने लगी. जो अपने-अपने घरों को लौटने के लिए बेताब थे. कुछ मेरे भी रिश्तेदार जो गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. वो भी बंबई में बहुत परेशान नजर आ रहें है. वो लोग किसी भी कीमत पर गाँव वापस आने के लिए तैयार हैं. हो सकता है कि उनके जैसे लोग हीं उस भीड़ का हिस्सा हों. अंततः भीड़ को तितर-बितर करने के लिए महाराष्ट्र पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा.  
महाराष्ट्र सरकार के युवा मंत्री आदित्य ठाकरे जी ने इस घटना का जिम्मा केंद्र सरकार पर फोड़ने की कोशिश की. आदित्य ठाकरे ने कहा कि "केंद्र सरकार ने लाकडाउन को बढ़ाते हुए दिहाड़ी और प्रवासी मजदूरों का ख्याल नहीं रखी. महाराष्ट्र सरकार सबको भोजन देने  प्रतिबद्ध है. पर केंद्र सरकार को उनका ख़याल रखना चाहिए. यूपी और बिहार के प्रवासी मजदूरों की संख्या महाराष्ट्र में बहुत ज्यादा है. वे सभी लोग अपने घर पहुंचने को बेताब हैं. कुछ ऐसी हीं तस्वीर 24 मार्च के लाकडाउन के बाद दिल्ली , नोएडा और देश के अन्य भागों में देखने को मिला था. जिसमें लाखों लोग सैकड़ों मील दूर अपने-अपने घर के लिए पैदल हीं निकल लिए थे. बाद में जिनके लिए कुछ बसें इत्यादि चलाकर उनके मंजिल तक पहुंचाने का निर्णय राज्य सरकारों ने लिया था. अहमदाबाद, मुंबई, कर्नाटक जहां भी प्रवासी मजदूर फंसे हैं सब पैदल हीं यूपी, बिहार के लिए निकल लिए है.

सुझाव-
  • ऐसे वक्त में हम जितना सम्भव हो सके अपने घरों में रहें.
  • ये महामारी देश को लाशों का टीला बना सकती है, यदि हमने सरकार का साथ नहीं दिया। हम अपने आस-पास के लोगों को भी घर में रहने के लिए प्रोत्साहित करें. 
  • राज्य सरकारें स्वयं सेवी संस्थाओं की सकारात्मकता के साथ उपयोग में लाये.
  • केंद्र सरकार को हर पीएफ धारी के खाते में एक निश्चित रकम आने वाले कुछ महीनों तक जमा करें.
  • राज्य सरकारें, केंद्र सरकार के सहयोग से यह सुनिश्चित करें कि शहर में रह रहे किसी भी किरायेदार को किराया देने के लिए अनावश्यक दबाव न बनाएं.
  • राज्य के मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और केंद्र के मंत्रियों को डाक्टर, पुलिस की तरह सड़क पर उतरकर जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की जरूरत है. 


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