Friday, March 20, 2020

बाबा आपका जाना एक सदी का जाना है

19 मार्च 2020 को मेरे दादा जी का देहावसान हो गया। यह दुखद खबर मुझे मेरे आफिस से शाम को घर आने के बाद मिली। घर से पिता जी और छोटे भाई मोनू का फोन मेरे पास आया था। बाबा अक्सर कुछ महीनों से बीमार रहने लगे थे तो होली के दिन सोनू ने बाबा के कष्ट को देखा और मुझे फोन किया। जब मैं उसे बोला कि बाबा की जांच-पड़ताल बीएचयू में करवाईए। उसके बाद सोनू-मोनू गाड़ी करके घर से बाबा जी को बीएचयू ले गये और दो दिन बाद बदहाल ब्यवस्था से जंग लड़कर हम हार गये पर इलाज तो दूर कोई खाट भी नहीं मिली। अन्त में हार मानकर उनका बनारस के हीं किसी प्राइवेट अस्पताल में जांच पड़ताल करवाया गया। जांच की तीन दिन बाद उनकी रिपोर्ट आई। जिसमें दादा जी के अस्त होने की कहानी लिखी गई थी। जांच में पता चला कि दादा जी को कर्क रोग की शिकायत है। इसी के बाद हम सब समझ चुके थे कि अब वो ज्यादा दिन नहीं जीने वाले हैं।
अन्ततः कल के दिन हमारे परिवार का सूरज अस्त हो गया। नि:संकोच आप किसी के लिए अच्छे तो किसी के लिए बुरे रहे होंगे। लेकिन हमारे लिए आप सच्चे नायक रहे हैं। मैं बहुत से लोगों को जानता हूं जो आपको नापसंद करते थे। उसका कारण उनका निजी स्वार्थ हुआ करता था।
आपके हीं संस्कार की वजह से हमने एक भाई का दूसरे भाई के प्रेम को देखा, समझा और जाना। आपका और छोटे बाबा (सिपाही) का प्रेम तो गांव के लोगों और हमारे सगे-संबंधियों के बीच में एक उदाहरण हुआ करता था। लेकिन एक बात सत्य है कि आपका मोह आपके अन्तिम समय में भंग होने लगा था। जो आपके देहावसान के महज कुछ घंटे पहले आपके शब्दों से प्रतीत हुआ। बाबा आप जहां भी रहोगे ईश्वर वहां आपको खुशहाल रखेंगे।

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