आज सुबह-सुबह जब गोदी मीडिया का हाल देखा तो बहुत दंग रह गया देश के प्रधानमंत्री ने एक ब्लॉग लिखा और कांग्रेस, गांधी, नेहरू परिवार पर कटाक्ष करते हुए अपने ब्लॉग में लिखा था कि कांग्रेस ने संविधान से लेकर, प्रेस और न्यायपालिका में वंशवाद को बढ़ावा दिया और देश के संस्थानों को बर्बाद किया। मैं ब्यक्तिगत तौर पर प्रधानमंत्री के इस बयान की घोर निंदा करता हूँ क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी जी का इस तरह अपने लेख में जिक्र करना संविधान निर्माताओं का अपमान है, न्यायपालिका का अपमान है, देश के लोकतंत्र का अपमान है. क्योंकि ये सब इस लिए प्रधानमंत्री जी से बुलवाया जा रहा है क्योंकि पूरा देश जानता है कि प्रधानमंत्री जी जिस संगठन आरएसएस से संबंध रखते हैं उसके सभी शीर्ष नेता अंग्रेजों के साथी रही हैं उनसे माफियां भी मांगी थी तो अपने उस कलंकित दाग को कम करने के लिए प्रधानमंत्री जी और उनका मातृ संगठन आरएसएस झूठ फैलाते हैं. संघ वैसे तो १९४७ से झूठ का सहारा लेना शुरू किया था जो जाकर २०१४ में पूरा हुआ.
वंशवाद के मुद्दे पर संघ और हमारे प्रधानमंत्री से कुछ जरूरी सवाल है-
- वंशवाद की परिभाषा क्या है ?
- वंशवाद का स्वरूप कैसा होता है ?
- नेहरू जी की तीन पीढ़ियां प्रधानमंत्री बनी क्या आपके अनुसार ये वंशवाद है ?
- स्वर्गीय पंडित मोतीलाल नेहरू और स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू जी स्वतंत्रता संघर्ष में अनेकों-अनेक बार जेल गए, तो आप पिता-पुत्र के इस रिश्ते को किस श्रेणी में रखना चाहेंगे ?
- क्या वंशवाद की वजह से कोई देश का प्रधानमंत्री बनता है ?
आपके लेख के अनुसार २०१४ में देश में पहली बार देश में गैर वंशवाद की सरकार बनी, ऐसा कहकर आप स्वर्गीय श्री जवाहरलाल नेहरू, स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी, स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री, स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह, स्वर्गीय चंद्रशेखर सिंह, देवगौड़ा जी, मनमोहन सिंह जी जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों का अपमान तो नहीं कर रहें हैं. अगर आपने इस लेख में भूल वश इन प्रधानमंत्रियों को अपमानित करने कार्य किया है तो आपको खेद जताना चाहिए, अगर आप अपनी राजनितिक विचारधारा के आधार पर इस बात को लिखते हुए इस पर बल देना चाहते है तो भी इसमें से नेहरू परीवार के प्रधानमंत्री रहें लोगों के नाम हटा सकते थे. जहां तक इतिहास की लघु जानकारी मुझे है उसमें स्वर्गीय नेहरू जी के पिता जी किसी देश के प्रधानमंत्री नहीं थे हो सकता है कि आपके और आरएसएस के पास कोई ऐसा दस्तावेज हो जिसमें स्वर्गीय मोतीलाल नेहरू जी को किसी देश का प्रधानमंत्री बताया गया हो. ऐसा हीं इंद्रा जी और राजीव को छोड़कर देश के अन्य पूर्व और वर्तमान प्रधानमंत्रियों के संबंध में भी है. मुझे ये नहीं समझ है कि आपके पास ऐसे कौन से दस्तावेज लग गए जिसमें आप अपने पार्टी के पहले अध्यक्ष को भी वंशवाद की पहचान बता बैठे। हम जानते थे कि अटल जी एक सम्मानित नेता और प्रधानमंत्री थे और उनके पिता जी किसी भी राष्ट्र के प्रधानमंत्री नहीं थे.
हम जनता के रूप में चुप रहकर एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा दे रहें हैं जिसमें लोग सिर्फ और सिर्फ भेड़िये के रूप में परिवर्तित होते जा रहे हैं. लोग झूठ बोलने से अपने आपको सम्मानित महशूस करने लग गए हैं. क्या हम और आप ऐसे हीं देश की कल्पना करते हैं. आइये हम अपनी जिम्मेदारी को समझे और एक सपनों के भारत का निर्माण करें.
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